यामीन विकट, ठाकुरद्वारा। मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा में शनिवार को उस वक्त भारी अफरा-तफरी मच गई, जब नगर पालिका की एक टीम दलबल के साथ एक व्यापारी की जमीन पर 'खोखा' रखने पहुंच गई।
मामला तब और संगीन हो गया जब पीड़ित व्यापारी ने नगर पालिका अध्यक्ष पर सीधे तौर पर 50 लाख रुपये की मोटी रंगदारी मांगने का आरोप जड़ दिया। इस घटना के बाद गुस्साए व्यापारियों और भाजपा नेताओं ने कोतवाली का घेराव किया, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।
दरअसल, यह पूरा विवाद कोतवाली के ठीक सामने स्थित परख ज्वैलर्स के मालिक अवनीश कुमार सिंघल की दुकानों के पास पड़ी जमीन को लेकर शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि शनिवार सुबह नगर पालिका के कर्मचारी ट्रैक्टर-ट्रॉली में लोहे का खोखा लेकर वहां पहुंचे और उसे रखने की कोशिश करने लगे। व्यापारी का दावा है कि यह जमीन उनके नाम रजिस्टर्ड बैनामे से है, जबकि पालिका प्रशासन इसे सरकारी संपत्ति बता रहा है।
'पैसे नहीं दिए तो जमीन पर कब्जा करने की कोशिश'
व्यापारी अवनीश कुमार सिंघल द्वारा लगाए गए आरोपों ने ठाकुरद्वारा की राजनीति में भूचाल ला दिया है। अवनीश का आरोप है कि नगर पालिका अध्यक्ष इरफान सैफी पिछले चार महीनों से उनसे 50 लाख रुपये की रंगदारी मांग रहे थे। उन्होंने पुलिस को दी तहरीर में कहा कि शनिवार सुबह भी पालिकाध्यक्ष का एक खास आदमी उनके पास आया था और धमकी दी थी कि "अगर आज पैसा नहीं मिला तो तुम्हारी जमीन पर खोखा रख दिया जाएगा।"
व्यापारी का कहना है कि उन्होंने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद बदले की भावना से उनकी निजी भूमि पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की गई। अवनीश के अनुसार, वे लंबे समय से इस मानसिक प्रताड़ना को झेल रहे हैं और अब मामला बर्दाश्त से बाहर होने पर उन्होंने पुलिस की शरण ली है।
पालिकाध्यक्ष की सफाई: "यह सरकारी जमीन को बचाने की जंग है"
दूसरी ओर, इन गंभीर आरोपों के बीच नगर पालिका अध्यक्ष इरफान सैफी ने अपना पक्ष भी मजबूती से रखा है। उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक साजिश बताया। इरफान सैफी का कहना है कि खसरा नंबर 51 में नगर पालिका की 20 दुकानें हैं। उनके मुताबिक, "वहां पहले भी खोखे रखे थे जिन्हें हटा दिया गया था। हमें सूचना मिली कि सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है, इसलिए हमने वहां पालिका का खोखा रखने के लिए टीम भेजी थी।"
पालिकाध्यक्ष ने व्यापारी के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी कभी आरोप लगाने वाली व्यक्ति से बात तक नहीं हुई। उन्होंने पुलिस जांच की मांग करते हुए कहा कि उनके और व्यापारी के मोबाइल फोन की लोकेशन की जांच कर ली जाए, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। हालांकि, व्यापारी पक्ष उनके इस तर्क को केवल अपना बचाव बता रहा है।
व्यापार मंडल की चेतावनी: "कार्रवाई नहीं हुई तो बाजार होगा बंद"
इस घटना के विरोध में उत्तर प्रदेश लघु उद्योग व्यापार मंडल भी मैदान में उतर आया है। व्यापारियों की एक बैठक हुई जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि पालिकाध्यक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरे नगर में बाजार बंद कर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। भाजपा नेताओं ने भी पीड़ित व्यापारी का समर्थन करते हुए पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने फिलहाल व्यापारियों को शांत कराया और मामले की जांच का आश्वासन दिया है। पुलिस का कहना है कि जमीन के कागजों की जांच और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल, ठाकुरद्वारा में इस 'खोखा विवाद' ने भ्रष्टाचार और रंगदारी जैसे गंभीर सवालों को जन्म दे दिया है, जिसकी गूंज अब शासन-प्रशासन तक पहुंच चुकी है।

तनाव में बिगड़ी व्यापारी की तबीयत, अस्पताल में भर्ती
इस पूरे घटनाक्रम और कथित रंगदारी के दबाव ने पीड़ित व्यापारी अवनीश सिंघल की सेहत पर गहरा असर डाला है। बताया जा रहा है कि शनिवार को हुए हंगामे और पालिका प्रशासन के साथ तीखी नोकझोंक के बाद अवनीश को अचानक घबराहट की शिकायत हुई। उनकी बिगड़ती हालत को देख परिजनों ने उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया।

