नई दिल्ली: एक तरफ जहां ईरान युद्ध की तपिश से दुनिया सहमी हुई है और कई देश अपनी अर्थव्यवस्था बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं चीन ने एक ऐसा दांव चला है जिसने सुपरपावर अमेरिका के होश उड़ा दिए हैं।
चीन ने एक झटके में 53 देशों के लिए जीरो टैरिफ (Zero Tariff) का ऐलान कर सबको चौंका दिया है। यह सिर्फ व्यापारिक फैसला नहीं है, बल्कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वह चाल है जो चीन को दुनिया की इकलौती महाशक्ति बनाने की ओर ले जा सकती है।
ट्रंप का 'टैरिफ वॉर' बनाम जिनपिंग का 'मास्टरस्ट्रोक'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत दुनिया भर के देशों पर नए-नए टैरिफ (आयात शुल्क) थोप रहे हैं। लेकिन ठीक उसी समय, चीन ने 1 मई, 2026 से अफ्रीका के 53 देशों से होने वाले आयात पर टैरिफ को शून्य कर दिया है। यह व्यवस्था अगले दो साल यानी 30 अप्रैल 2028 तक लागू रहेगी। चीन ने इस सूची से केवल 'एस्वातिनी' को बाहर रखा है, क्योंकि उसके ताइवान के साथ राजनयिक संबंध हैं।
अफ्रीका पर ही क्यों है चीन की नजर?
चीन की नजर अफ्रीका की अकूत प्राकृतिक संपदा पर है। अफ्रीका के पास वो खनिज और संसाधन हैं, जिनकी जरूरत भविष्य की तकनीक के लिए सबसे ज्यादा है। ट्रंप ने हाल ही में अफ्रीकी देशों पर टैरिफ बढ़ाकर उन्हें नाराज कर दिया, जिसका फायदा उठाते हुए चीन ने उनके लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। इस कदम से चीन न सिर्फ अफ्रीकी देशों का भरोसा जीत रहा है, बल्कि वहां के कच्चे माल को सस्ते में अपने देश खींचने का पुख्ता जुगाड़ भी कर लिया है।
व्यापार घाटे में भी चीन का 'विन-विन' गेम
आंकड़े बताते हैं कि चीन पहले से ही फायदे में है। साल 2025 में चीन और अफ्रीका का कुल कारोबार रिकॉर्ड 348 अरब डॉलर (लगभग 33 लाख करोड़ रुपये) रहा। इसमें चीन ने 225 अरब डॉलर का माल निर्यात किया, जबकि अफ्रीका से सिर्फ 123 अरब डॉलर का आयात हुआ। यानी अफ्रीका पहले से ही 102 अरब डॉलर के व्यापार घाटे में है। अब टैरिफ हटने से चीन को कच्चा माल और भी सस्ता मिलेगा, जिससे उसकी 'दुनिया की दुकान' वाली छवि और मजबूत होगी।
भविष्य की तकनीक पर चीन का कब्जा
चीन की यह रणनीति बहुत गहरी है। वह अफ्रीका से तेल, कॉपर, कोबाल्ट, लीथियम और रेयर अर्थ (Rare Earth) जैसे खनिजों का भारी आयात करता है।
- EV और बैटरी: इलेक्ट्रिक व्हीकल और रिन्यूएबल एनर्जी के लिए लीथियम और कोबाल्ट रीढ़ की हड्डी हैं।
- रक्षा क्षेत्र: रेयर अर्थ की सप्लाई पर चीन का पहले से ही 90% कब्जा है। अगर अमेरिका 2027 तक चीन पर निर्भरता खत्म करना चाहता है, तो चीन ने अफ्रीका को साधकर उस रास्ते में भी रोड़े अटका दिए हैं।
कूटनीतिक और राजनीतिक बढ़त
यह लड़ाई सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि रसूख की भी है। ट्रंप ने अपनी नीतियों से यूरोपीय यूनियन (EU) जैसे पुराने दोस्तों को भी नाराज कर दिया है। 1 मई को जहां चीन ने अफ्रीका को 'जीरो टैरिफ' का तोहफा दिया, वहीं ट्रंप ने ईयू के वाहनों पर 25% टैरिफ ठोक दिया। राजनीतिक रूप से देखें तो संयुक्त राष्ट्र (UN) में इन 53 देशों का वोट बैंक चीन के पक्ष में झुक सकता है, जो वैश्विक मंच पर अमेरिका की पकड़ कमजोर कर देगा।
संक्षेप में कहें तो ट्रंप आज के घाटे की भरपाई में जुटे हैं, जबकि जिनपिंग अगले 50 सालों की बादशाहत का खाका खींच रहे हैं।

