पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ब्लॉक किए जाने के बाद से ही अमेरिका के हाथ-पांव फूले हुए हैं।
यह कोई मामूली रास्ता नहीं है, क्योंकि दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में सीधे ईरान को चेतावनी दे डाली है।
ट्रंप का सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
रास्ता बंद होने की वजह से पूरी दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई है। डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस रास्ते को खुलवाने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन सफलता न मिलते देख अब वह अपनी हताशा पर उतर आए हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए ईरान को कड़ा संदेश दिया।
उन्होंने लिखा, "अगर हमें थोड़ा और समय मिले, तो हम बहुत आसानी से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल सकते हैं, वहां से तेल निकाल सकते हैं और खूब पैसा कमा सकते हैं। क्या यह दुनिया के लिए तेल का फव्वारा नहीं होगा? - राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप।" ट्रंप के इस बयान से साफ झलक रहा है कि तेल सप्लाई में आ रही बाधा ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है।
एक महीने से थमा है तेल का कारवां
आपको बता दें कि यह समुद्री मार्ग पिछले एक महीने से पूरी तरह बंद पड़ा है। यह तनाव तब शुरू हुआ जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज स्ट्रेट की घेराबंदी कर दी। इस ब्लॉकेड की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे उन देशों की अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी है जो पूरी तरह एनर्जी इंपोर्ट पर निर्भर हैं।
क्या युद्ध की आग में झुलसेगा ईरान का पावर प्लांट?
होर्मुज स्ट्रेट कब खुलेगा, इसे लेकर ट्रंप ने फिलहाल कोई साफ कूटनीतिक रास्ता (Diplomatic Roadmap) नहीं दिखाया है। 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने बातचीत के बजाय सीधे हमले की चेतावनी दी है। उन्होंने संकेत दिया है कि अगर यह रास्ता नहीं खुला, तो अमेरिका ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है। ट्रंप ने हाल ही में ईरान के सिविल पावर प्लांट्स पर संभावित हमलों की ओर भी इशारा किया था। तेहरान ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिससे साफ है कि पश्चिम एशिया में फिलहाल शांति के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं।

