लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लाखों संविदा कर्मचारियों के लिए खुशियों वाली खबर आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है।
सरकार ने लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की मुराद पूरी कर दी है। इस फैसले से प्रदेश के शिक्षा विभाग में कार्यरत लाखों परिवारों के घरों में अब ज्यादा खुशहाली आएगी।
शिक्षामित्रों की सैलरी में 80% का भारी उछाल
राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में जबरदस्त बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। अब तक शिक्षामित्रों को हर महीने 10,000 रुपये मिलते थे, जिसे बढ़ाकर अब सीधे 18,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में करीब 1.42 लाख शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से लगभग 1.29 लाख शिक्षामित्रों के मानदेय का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगी, जबकि बाकी बचे शिक्षामित्रों के वेतन का पूरा बोझ राज्य सरकार खुद उठाएगी।
अनुदेशकों की भी चांदी, मानदेय में हुई बड़ी वृद्धि
योगी कैबिनेट ने सिर्फ शिक्षामित्रों को ही नहीं, बल्कि अनुदेशकों को भी बड़ी राहत दी है। अनुदेशकों का मानदेय जो पहले 9,000 रुपये प्रति माह था, उसे बढ़ाकर अब 17,000 रुपये कर दिया गया है। इस फैसले से प्रदेश के हजारों अनुदेशकों को बड़ी आर्थिक मजबूती मिलेगी और वे बेहतर तरीके से अपनी सेवाएं दे सकेंगे।
कब से लागू होगा नया नियम और कब आएगी पहली बढ़ी हुई सैलरी?
कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह पैसा उन्हें कब से मिलेगा। सरकार के आदेश के मुताबिक, यह फैसला 1 अप्रैल से प्रभावी माना जाएगा। हालांकि, बढ़ा हुआ मानदेय कर्मचारियों के बैंक खातों में 1 मई से आना शुरू होगा। इसका मतलब है कि अप्रैल महीने की बढ़ी हुई सैलरी का भुगतान मई के पहले हफ्ते में किया जाएगा।
कर्मचारियों के खिले चेहरे, आर्थिक स्थिति में होगा सुधार
इस फैसले का असर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर भी सकारात्मक रूप से देखने को मिलेगा। मानदेय में इस बड़ी बढ़ोतरी से शिक्षा क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा। लंबे समय से कम वेतन में काम कर रहे शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि उनके काम करने के उत्साह में भी बढ़ोतरी होगी।

