मिडिल ईस्ट में छिड़े भीषण तनाव और युद्ध के बीच भारत अपनी बेहतरीन कूटनीति का लोहा मनवा रहा है। आज जब दुनिया के कई देश संकट में फंसे अपने नागरिकों और तेल की सप्लाई को लेकर परेशान हैं, तब हिंदुस्तान की विदेश नीति बाकी देशों के मुकाबले '21' साबित हो रही है।
भारत ने खेल कुछ ऐसा रचा है कि उसे अजरबैजान भी मदद पहुंचा रहा है और उसका कट्टर दुश्मन आर्मेनिया भी।
दुश्मन के दोस्त और दोस्त के दुश्मन, सब भारत के साथ
अजरबैजान और आर्मेनिया दो ऐसे देश हैं जो एक-दूसरे के जानी दुश्मन माने जाते हैं। अजरबैजान को हमेशा से पाकिस्तान का करीबी मित्र माना जाता रहा है और भारत के साथ उसके संबंध बहुत मधुर नहीं रहे। लेकिन हाल के दिनों में भारतीय कूटनीति ने हवा का रुख बदल दिया है। जब ईरान में भारतीय नागरिक फंसे, तो पहले पाकिस्तान के दोस्त अजरबैजान ने मदद का हाथ बढ़ाया और अब आर्मेनिया ने भी भारतीय मछुआरों को सुरक्षित निकालने में बड़ी भूमिका निभाई है। भारत ने बिना किसी हिचकिचाहट के दोनों ही देशों का खुले दिल से आभार जताया है।
विदेश मंत्री जयशंकर का 'स्पेशल थैंक्स'
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस कामयाबी की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, "ईरान से भारतीय मछुआरों को आज आर्मेनिया के रास्ते भारत लाने में मदद करने के लिए विदेश मंत्री अरारत मिर्जायान और आर्मेनिया की सरकार का धन्यवाद।" बढ़ते तनाव को देखते हुए हाल के दिनों में सैकड़ों भारतीयों को ईरान से निकालकर पड़ोसी देश आर्मेनिया पहुंचाया गया है। भारत सरकार इस इलाके की सरकारों के साथ मिलकर अपने नागरिकों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने में दिन-रात जुटी हुई है।
जब अजरबैजान ने खोला अपना रास्ता
इस हफ्ते की शुरुआत में नई दिल्ली में हुई एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अजरबैजान की मदद का जिक्र किया था। उन्होंने बताया कि लगभग 204 भारतीय नागरिक जमीनी सीमा के रास्ते ईरान से सफलतापूर्वक अजरबैजान पहुंच गए हैं। इनमें से कई लोग वतन लौट चुके हैं और बाकी भी अगले कुछ दिनों में घर पहुंच जाएंगे। पाकिस्तान के करीबी दोस्त अजरबैजान का भारत की मदद के लिए आगे आना वैश्विक राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
तेल से लेकर सप्लाई चेन तक, भारत का दबदबा
भारत की कूटनीति सिर्फ लोगों को बचाने तक सीमित नहीं है। अमेरिकी पाबंदियों के बावजूद मोदी सरकार ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा, जिसका नतीजा यह है कि मिडिल ईस्ट में आग लगने के बाद भी भारत में तेल की सप्लाई सामान्य है। जहां दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं भारत में दाम अब भी स्थिर बने हुए हैं।
इतना ही नहीं, ईरान ने भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज' के दरवाजे भारत के लिए खुले रखे हैं। जंग शुरू होने के बाद से अब तक करीब 7 भारतीय जहाज वहां से सुरक्षित निकल चुके हैं। एक तरफ जहां भारत के पड़ोसी देशों में महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है, वहीं भारत अपनी शानदार कूटनीति के दम पर हर संकट से बेअसर बना हुआ है।

