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यूपी, बिहार और बंगाल के बॉर्डर पर बदलने लगी आबादी? अमित शाह के इस बड़े कदम से मची खलबली

यूपी, बिहार और बंगाल के बॉर्डर पर बदलने लगी आबादी? अमित शाह के इस बड़े कदम से मची खलबली

UPUK Live 3 months ago

उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और असम जैसे कई राज्यों के सीमावर्ती इलाकों (बॉर्डर एरिया) में आबादी का पूरा ढांचा बदलने की भनक सरकार को लग चुकी है. बॉर्डर वाले इलाकों में जनसंख्या का यह बदलता पैटर्न सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है, यही वजह है कि अब केंद्र सरकार इस बड़े बदलाव की जमीनी स्तर पर जांच कराने की तैयारी में है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक हाई लेवल कमेटी बहुत जल्द पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत सभी सीमावर्ती राज्यों के जिलों, बड़े शहरों और इंडस्ट्रियल इलाकों का दौरा करने जा रही है. यह कमेटी वहां के प्रशासनिक अफसरों से बातचीत करेगी और स्थानीय लोगों से सीधे मिलकर सवाल-जवाब करेगी. सरकार यह पूरी बारीकी से समझने की कोशिश में है कि साल 2011 की जनगणना के बाद से अब तक इन खास इलाकों में आबादी का पैटर्न आखिर कैसे बदल गया और इसके पीछे की असली वजह क्या है.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज करेंगे जांच, अमित शाह ने मांगी जल्द रिपोर्ट

इस बेहद संवेदनशील मामले की जांच के लिए बनाई गई हाई लेवल कमेटी की कमान सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर के हाथों में है. यह समिति अवैध घुसपैठियों और अन्य वजहों से बॉर्डर वाले इलाकों की आबादी में आए बदलावों पर एक बेहद विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके केंद्र सरकार को सौंपेगी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस समिति को निर्देश दिए हैं कि वह जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपे ताकि सरकार इस पर तुरंत कड़ा एक्शन ले सके. आपको बता दें कि यह कमेटी सिर्फ आबादी बदलने के कारण ही नहीं तलाशेगी, बल्कि इस समस्या से निपटने के लिए क्या सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है, इसकी पूरी पॉलिसी भी सरकार को सुझाएगी. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस डेमोग्राफिक चेंज (आबादी के बदलाव) को पकड़ा कैसे जाता है?

कैसे पकड़ा जाएगा आबादी का यह बदलाव और क्या-क्या चेक करेगी सरकार?

सरकार की यह कमेटी सबसे पहले साल 2011 की जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों को उठाएगी. यह देखा जाएगा कि उस वक्त किसी जिले, शहर या राज्य की आबादी कितनी थी और आज के समय में उसमें कितना अंतर आया है. अगर किसी इलाके में जनसंख्या सामान्य दर से बहुत ज्यादा तेजी से बढ़ी हुई मिलती है, तो उसके पीछे की गहराई से जांच की जाएगी. कमेटी यह पता लगाएगी कि इसके पीछे ज्यादा बच्चों का जन्म होना, रोजगार के अवसर, तेजी से होता शहरीकरण, शिक्षा और इंडस्ट्री वजह हैं या फिर इसके पीछे अवैध घुसपैठियों का हाथ है.

इसके अलावा, सरकार आबादी की ग्रोथ रेट (जनसंख्या वृद्धि दर) का भी मिलान करेगी. उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि किसी पूरे राज्य की औसत जनसंख्या वृद्धि दर 12 फीसदी है, लेकिन उसके बॉर्डर से सटे किसी एक खास जिले में यह दर अचानक 30 फीसदी दिखाई देती है, तो यह बात हर किसी को चौंकाती है. सरकार यह समझने की कोशिश करेगी कि आखिर उस एक जिले में ऐसा क्या हुआ? क्या वहां कोई बड़ी कंपनियां लगीं जिससे दूसरे राज्यों के लोग आए, या फिर कहानी कुछ और है? अगर सामान्य वजहों से इसका जवाब नहीं मिलता, तो जांच का दायरा बढ़ा दिया जाता है.

जन्म-मृत्यु दर का गणित और अचानक बढ़े माइग्रेशन पर नजर

किसी भी क्षेत्र की आबादी में अचानक बड़ा बदलाव तभी आता है, या तो वहां बच्चों का जन्म बाकी जगहों के मुकाबले बहुत ज्यादा हुआ हो या फिर वहां मौतों का आंकड़ा अचानक बहुत कम हो गया हो. सरकार वहां के जन्म और मृत्यु दर के सरकारी आंकड़ों को खंगालेगी. अगर जन्म अधिक और मृत्यु कम है, तो आबादी बढ़ना सामान्य प्रक्रिया है. लेकिन अगर आबादी में हुई बढ़ोतरी इन दोनों आंकड़ों से मेल नहीं खाती, तो यह बेहद चिंताजनक बात है.

इसके साथ ही माइग्रेशन यानी अचानक एक ही जगह पर बहुत सारे लोगों के आ जाने के पैटर्न को भी चेक किया जाएगा. यह जांचा जाएगा कि वहां रहने आए लोग देश के ही किसी कोने से आए हैं या फिर सीमा पार से घुसपैठ करके आए हैं. उनके आने की वजह शिक्षा है, नौकरी है या फिर कोई और गुप्त वजह. इसके अलावा, वहां रहने वाले लोगों की उम्र का अनुपात (जैसे बच्चे, युवा, बुजुर्ग) भी देखा जाएगा, ताकि भविष्य की जरूरतों का अंदाजा लगाया जा सके.

सबसे बड़ी वजह धार्मिक बदलाव और सरकारी व्यवस्था पर पड़ता दबाव

इस पूरी जांच में सबसे बड़ा और संवेदनशील पहलू धार्मिक बदलावों का है. सरकार यह बारीकी से देखेगी कि साल 2011 में उस इलाके में किस धर्म या समुदाय के लोगों की कितनी आबादी थी और आज उसमें कितना भारी फेरबदल हुआ है. उदाहरण के तौर पर, अगर 2011 में किसी जगह पर एक समुदाय के 10 लाख लोग थे और दूसरे समुदाय के 2 लाख लोग थे, तो कहीं ऐसा तो नहीं कि 2 लाख वाली आबादी आज बढ़कर 5 लाख हो गई और 10 लाख वाली आबादी सिर्फ 11 लाख तक ही पहुंची. अगर ऐसा कोई बड़ा असंतुलन दिखेगा, तो उसकी पूरी वजह तलाशी जाएगी.

जनसंख्या में आने वाले इस अचानक उछाल का सीधा असर वहां की सरकारी व्यवस्थाओं पर भी पड़ता है. जब आबादी अचानक बढ़ती है, तो वहां के स्कूल, अस्पताल, सड़क, बिजली, पानी, राशन और पुलिस जैसी बुनियादी सुविधाओं पर जरूरत से ज्यादा दबाव बढ़ जाता है. इसलिए इस डेमोग्राफिक स्टडी में यह भी देखा जाएगा कि बढ़ती आबादी की वजह से कहीं सरकारी अफसरों पर काम का बोझ तो नहीं बढ़ रहा है या फिर उस इलाके का विकास बजट कम तो नहीं पड़ रहा है.

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