Thursday, 23 Mar, 9.06 am

उत्तर प्रदेश
#worldwaterday: सूख रही धरती की कोख, ऐसे बचा सकते हैं पानी

जिले में भूगर्भ जल का स्तर तेजी से गिर रहा है। चार ब्लॉक डार्क जोन में हैं। अन्य विकास खंड भी इसकी चपेट में आते जा रहे हैं, अगर समय रहते भूगर्भ जल रिचार्ज के उपाय नहीं किए गए तो जलस्तर तेजी से नीचे गिर जाएगा।

दस साल पहले भूगर्भ जलस्तर के गिरने के चलते डार्क जोन घोषित किए गए। इसमें मथुरा जनपद के चार विकास खंड एक के बाद एक शामिल होते चले गए। सबसे पहले नौहझील, इसके बाद राया, बलदेव और फरह डार्क श्रेणी में शामिल हैं। नौहझील ब्लाक क्षेत्र की स्थिति पर नजर डालें तो पता चलता है कि सिर्फ एक दो में ही ब्लाक क्षेत्र के गांवों का भूगर्भ जलस्तर 10-15 फीट तक नीचे खिसक गया है।

ब्लाक में पेयजल की गंभीर समस्या से लोग जूझ रहे हैं। ब्लाक के गांव मानागढ़ी, खाजपुर, मडुआका, सींगोनी, मिठोली में पिछले वर्ष 80 फीट पर जलस्तर था। अब इन गांवों में 90 से 100 फीट पर जलस्तर पहुंच चुका है। छिनपारई, दौलतपुर, देदना, मरहला मुक्खा सहित यमुना किनारे बसे गांवों का जलस्तर 10 फीट तक नीचे खिसक गया है।

कई गांवों में 150 फीट के आसपास ही भूगर्भ जल मिल पा रहा है। ठीक यहीं हालात राया, बलदेव व फरह विकास खंड के हैं। भूगर्भ जल विभाग की ओर से वर्ष 2007-08 में नौहझील ब्लाक को डार्क जोन घोषित किया गया था। राया, बलदेव और फरह ब्लॉक इसके बाद डार्क जोन घोषित किए गए थे। इसके बाद से किसानों को नलकूप के कनेक्शन नहीं दिए जा रहे हैं। सिंचाई को सरकारी योजनाओं के लाभ से भी क्षेत्र के किसान वंचित हो गए। इसके विकल्प के तौर पर सरकारी योजनाएं भी नजर नहीं आ रही हैं।

चार दर्जन गांवों में खारा पानी

चारों विकास खंडों के चार दर्जन से अधिक गांवों में लोग खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। नौहझील विकास खंड क्षेत्र के 21 गांवों में खारे पानी की समस्या है। पीने के मीठे पानी को इन गांव की महिलाओं को दूरदराज से पानी लाना पड़ता है। ब्लाक के गांव मडुआका, सींगोंनी, रामगढ़ी, अभयपुरा, बाघई, कौलाना, चिंतागढ़ी, ऐदलगढ़ी, कोलाहर, ढालगढ़ी, जाफरपुर, घसियागढ़ी, उदियागढ़ी, देदना बांगर, मुकदुमपुर, बसाऊ, फोंदा का नगला, बरी का नगला, परसौतीगढ़ी, भिदौनी, नौहझील बांगर में खारे पानी की समस्या है।

वाटर रीचार्ज को चैक डेम बनाने पर जोर

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता जागरुकता सप्ताह में डार्क जोन में शामिल फरह, नौहझील, राया व बलदेव ब्लॉक को लेकर कई बार चर्चाएं हो चुकी हैं। शासन स्तर से भी विभिन्न प्रयास किए जाते रहे हैं। इन ब्लॉकों में लघु सिंचाई विभाग वाटर रिचार्ज को ज्यादा से ज्यादा चैक डेम बनाने पर काम किया जा रहा है। मनरेगा के तहत खोदवाए गए तालाबों व पारंपरिक तालाबों में हमेशा पानी भरे रहना तय किया गया है।

लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सुवेंद्र सिंह ने बताया कि जनपद में वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2016 तक करीब 25 चैक डेम बनाए जा चुके हैं। इनसे भूगर्भ जलस्तर पर काफी प्रभाव पड़ा है। उन्होंने बताया कि गोवर्धन नाला, मथुरा स्क्रेप, राल ड्रेन, कोसी ड्रेन, ब्यौही-बिजहारी ड्रेन, पिरसुआ ड्रेन व पतवा नाला पर चैक डेम बनाए गए हैं।

इन उपायों से बचाया जा सकता है पानी

-बाल्टी में पानी भरकर स्नान करें।

-दाढ़ी बनाते समय नल का टैप बंद रखें।

-बाल्टी या टब में बर्तन साफ करें।

-गांवों, कस्बों और नगरों में छोटे-बड़े तालाब बनाकर वर्षा जल का संरक्षण करें।

-नगरों में घरों की नालियों का पानी पेड़-पौधों की सिंचाई के काम में लाएं।

-छत पर वर्षा जल का भंडार करने के लिए एक या दो टंकी बनाएं।

-घरों, सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों अस्पतालों, दुकानों, मंदिरों आदि में नल की टोंटियां खुली न छोड़ें।

-जंगलों का कटान रोका जाए, वृहद पौधरोपण हो।

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