केरल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी क्रम में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अलप्पुझा, इडुक्की और एर्नाकुलम में चुनावी जनसभाओं को संबोधित करते हुए राज्य की सत्तारूढ़ एलडीएफ और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न हिस्सों में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में दो ननों पर हमले और मणिपुर में चर्च जलाने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ऐसी ताकतों के खिलाफ खड़े होने के बजाय उनके साथ खड़े नजर आते हैं।
कोच्चि में आयोजित रैली में राहुल गांधी ने कहा कि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) अब सिर्फ नाम का 'लेफ्ट' रह गया है और वह उन ताकतों का समर्थन कर रहा है जो धर्म के आधार पर समाज को बांटती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि वामपंथी विचारधारा से जुड़े मुख्यमंत्री को ऐसी ताकतों के साथ खड़े होने में शर्म क्यों नहीं आती।
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डरने का आरोप लगाते हुए कहा कि अपने परिवार को बचाने के लिए उन्हें केंद्र सरकार के सामने झुकना पड़ा। उनका इशारा मुख्यमंत्री की बेटी से जुड़े कथित मामले की ओर था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केरल में भाजपा, आरएसएस और सीपीआई-एम के बीच अंदरूनी गठजोड़ है। राहुल ने कहा कि एलडीएफ में अब 'लेफ्ट' जैसा कुछ नहीं बचा है और चुनाव के बाद इसकी स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे देश के अन्य हिस्सों में धर्म और मंदिर की बात करते हैं, लेकिन केरल में आकर इन मुद्दों से दूरी बना लेते हैं, क्योंकि यहां की राजनीति अलग है।
फिलहाल, इन बयानों के बाद केरल की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।

