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अजब एमपी का गजब मामला! 25 मार्च को गुना डाकघर को मिली थी ब्लास्ट की धमकी, 13 दिन बाद हुआ खुलासा

अजब एमपी का गजब मामला! 25 मार्च को गुना डाकघर को मिली थी ब्लास्ट की धमकी, 13 दिन बाद हुआ खुलासा

Vistaar News 1 week ago

MP News: मध्य प्रदेश के गुना के कर्नलगंज स्थित मुख्य डाकघर और नवनिर्मित पासपोर्ट सेवा केंद्र को RDX बम से उड़ाने की धमकी भरे ई-मेल मिलने के बाद हडक़ंप मच गया है, लेकिन इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू डाकघर प्रबंधन का गैर-जिम्मेदाराना रवैया रहा.

जानकारी के मुताबिक, ये धमकी भरा ई-मेल करीब 13 दिन पहले यानी 25 मार्च को ही प्राप्त हो गया था, लेकिन मुख्य डाकघर के जिम्मेदारों ने इसे बेहद हल्के में लेते हुए पुलिस को सूचना तक देना उचित नहीं समझा.

मंगलवार (7 अप्रैल 2026) को जब यह खबर लीक हुई और पुलिस अधीक्षक हितिका वासल तक पहुंची, तब कहीं जाकर पुलिस सक्रिय हुई. एसपी के निर्देश पर तत्काल कोतवाली पुलिस की एक विशेष टीम जांच के लिए डाकघर पहुंची. सवाल यह उठता है कि संवेदनशील पासपोर्ट शाखा और सैकड़ों कर्मचारियों व आम जनता की आवाजाही वाले इस संस्थान की सुरक्षा को लेकर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे बरती गई? यदि इस दौरान कोई अनहोनी हो जाती, तो इसका उत्तरदायी कौन होता?

इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य पोस्ट मास्टर एस.एस. साहू की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है. जब मीडिया और पुलिस ने इस संबंध में उनसे संपर्क किया, तो उन्होंने पहले तो इस तरह के किसी भी धमकी भरे मेल आने से साफ इनकार कर दिया. हालांकि, जब मामला पुख्ता हुआ तो वे अपनी बात से पलट गए और यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि मैं इस विषय पर कोई बात नहीं कर सकता. डाकघर प्रबंधन की यह कार्यप्रणाली नई नहीं है.

सूत्रों के अनुसार, पिछले वर्ष भी पोस्ट ऑफिस के एटीएम से करीब 3 लाख रुपये की राशि रहस्यमयी ढंग से गायब हुई थी, जिसे विभाग ने आंतरिक स्तर पर लीपापोती कर दबा दिया था. उस मामले में भी जांच अब तक अधर में है, जिसमें एटीएम में पैसा डालने वाली निजी कंपनी के कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई थी. जिन्हें वेतन नहीं मिलने से उनके द्वारा पैसे रखने का मामला सामने आया था. उक्त मामले में भी डाक प्रबंधक ने न तो अपने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की, न ही एटीएम कंपनी कर्मचारियों पर एफआईआर.

देशभर के कई शहरों में पिछले दिनों पासपोर्ट केंद्रों को ऐसे धमकी भरे मेल भेजे गए हैं, लेकिन गुना में इसे गुप्त रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है. पुलिस अधीक्षक हितिका वासल ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि हमें डाकघर की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत या सूचना नहीं मिली थी. जानकारी मिलते ही हमने तुरंत पुलिस टीम भेजी है और मामले की वैधानिक जांच की जा रही है.

फिलहाल, पुलिस की साइबर सेल और स्थानीय टीम प्रदेश पुलिस के समन्वय से मेल के सोर्स का पता लगाने में जुटी है. लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गुना मुख्य डाकघर के शीर्ष अधिकारी सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर कितने बेपरवाह हैं. अब देखना यह होगा कि इतनी बड़ी जानकारी पुलिस से छिपाने के मामले में विभाग अपने अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है.

शहर के मुख्य डाकघर एवं पासपोर्ट केंद्र को भेजे गए धमकी भरे ई-मेल की भाषा और उसमें किए गए दावे बेहद चौंकाने वाले हैं. इस मेल में न केवल पासपोर्ट शाखा को बम से उड़ाने की धमकी दी गई, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति, क्षेत्रीय दलों और मीडिया घरानों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं. मेल भेजने वाले ने खुद को कोयंबटूर का निवासी बताते हुए दावा किया है कि राजनीतिक दलों ने उनका इस्तेमाल किया और अब उनकी आवाज दबाई जा रही है. मेल में साइनाइड जहरीली गैस और आरडीएक्स के इस्तेमाल की बात कहते हुए दोपहर 12:10 बजे का समय मुकर्रर किया गया था. इसमें यह भी लिखा गया है कि वे केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, इसलिए लोगों को हटा लिया जाए.

चौंकाने वाली बात यह है कि मेल में नक्सलियों और बाहरी ताकतों की मदद लेने का भी जिक्र किया गया है. इतनी संवेदनशील और खतरनाक भाषा वाले मेल को 13 दिनों तक पुलिस से छिपाए रखना डाकघर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा करता है. फिलहाल पुलिस की साइबर सेल इस मेल के आईपी एड्रेस और भेजने वाले के मूल स्थान की सघन जांच कर रही है.

इस मामले में पुलिस अधीक्षक हितिका वासल ने हुए कहा कि हमें डाकघर की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत या सूचना नहीं मिली थी. जानकारी मिलते ही हमने तुरंत पुलिस टीम भेजी है और मामले की वैधानिक जांच की जा रही है. फिलहाल, पुलिस की साइबर सेल और स्थानीय टीम प्रदेश पुलिस के समन्वय से मेल के सोर्स का पता लगाने में जुटी है.

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