Ambikapur: अंबिकापुर के नए बस स्टैंड के पास रिंग तालाब की जमीन का फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार कर उसे अपने नाम रजिस्ट्री करा कर तालाब में मिट्टी काटने का मामला सामने आया था जिसके बाद प्रशासन के द्वारा माफिया के द्वारा तालाब में पाते गए मिट्टी को हटाने के लिए नगर निगम के माध्यम से कल कार्रवाई की जा रही थी इसी दौरान जमीन माफिया ने मौके पर पहुंचकर नगर निगम के कर्मचारियों को खुलेआम मारने पीटने और जेल भिजवाने की की धमकी दिया था.
इसका वीडियो सोशल मीडिया में भी कुछ घंटे बाद वायरल हो गया था और इसी वीडियो के बाद प्रशासन में कथित जमीन मालिक आजाद इराकी सहित दो के खिलाफ अपराध दर्ज किया है.
अंबिकापुर रिंग बांध की जमीन पर कब्जा अतिक्रमण को लेकर लोगों के द्वारा कार्रवाई की मांग की जा रही थी लोगों का आरोप है कि फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार कर जमीन अपने नाम पर आजाद इराकी के द्वारा रजिस्ट्री कराई गई है. इसके लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र का उपयोग किया गया है. फर्जी रजिस्ट्री के बाद तालाब की जमीन पर मिट्टी डालकर उसे समतल किया जा रहा है. इन तमाम शिकायतों के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और नगर निगम और प्रशासन की टीम ने संयुक्त रूप से तालाब में डाले गए मिट्टी को हटाने के लिए कल सुबह कार्रवाई शुरू की इस दौरान मौके पर कथित जमीन मालिक आजाद इराकी मौके पर पहुंचा और अपने साथियों के साथ मिट्टी हटाने पहुंचे नगर निगम के जेसीबी आपरेटर, ट्रेक्टर चालक व अन्य कर्मचारियों को धमकाने लगा. इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ और फिर प्रशासन की किरकिरी होने लगी तत्काल सरगुजा कलेक्टर के निर्देश पर नगर निगम के कमिश्नर ने आजाद इराकी सहित दो लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कराया गया.
पिछले दिनों समाजसेवी और भाजपा के नेता कैलाश मिश्रा ने भी इस जमीन पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री करने का आरोप लगाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था और कलेक्टर से इस पूरे मामले की शिकायत की थी. इसके अलावा नगर निगम के पदाधिकारियो ने भी कलेक्टर से मिलकर पूरे मामले की जांच करते हुए तालाब की जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग की थी. कांग्रेस पार्षद शुभम जायसवाल ने भी अंबिकापुर शहर क्षेत्र के सभी तालाबों में किए गए अतिक्रमण को हटाने की मांग की है. इससे पहले जिला प्रशासन की टीम ने भाथू तालाब में होटल संचालक के द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही लगातार दो दिनों तक की थी. उसके बाद अब रिंग बांध तालाब की जमीन को कब्जा मुक्त किया जा रहा है.
लेकिन सवाल उठ रहा है कि तालाब की जमीन का रजिस्ट्री फर्जी तरीके से हुआ है तो फिर इसमें विभाग के जिन अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत है उनके खिलाफ जांच कब शुरू होगी क्योंकि बिना अधिकारी कर्मचारियों की मिली भगत के किसी भी शासकीय जमीन या किसी भी तालाब की रजिस्ट्री और उसमें मिट्टी डालने की दबंगई कोई भी जमीन माफिया नहीं कर सकता है.

