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CG News: कांग्रेस ने सरकार के 'चिंतन शिविर' को बताया 'चिंता शिविर', BJP ने कहा- भ्रष्टाचार मॉडल बनाने वाले सुशासन क्या समझेंगे

CG News: कांग्रेस ने सरकार के 'चिंतन शिविर' को बताया 'चिंता शिविर', BJP ने कहा- भ्रष्टाचार मॉडल बनाने वाले सुशासन क्या समझेंगे

Vistaar News 2 weeks ago

CG News: छत्तीसगढ़ की सत्ता आज क्लासरूम में है, लेकिन बाहर सियासत वार रूम में चल रही है. आईआईएम रायपुर में साय सरकार का चिंतन शिविर 3.0 शुरू हो चुका है. जहां मंत्री सुशासन, नवाचार और विकसित छत्तीसगढ़ का रोडमैप तैयार कर रहे हैं.

लेकिन कांग्रेस इसे चिंतन नहीं, चिंता शिविर बता रही है. वहीं बीजेपी का पलटवार है. जिस पार्टी ने शासन को भ्रष्टाचार का मॉडल बनाया, वो सुशासन का मतलब क्या समझेगी.

आईआईएम रायपुर में दो दिन तक किताबों की नहीं, सरकार के भविष्य की क्लास चलेगी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पूरा मंत्रिमंडल सुशासन, निवेश, कृषि, उद्योग, पर्यटन, खेल, नई तकनीक और परिणाम आधारित प्रशासन पर मंथन कर रहा है. सरकार का दावा है यही चिंतन विकसित छत्तीसगढ़ की नई दिशा तय करेगा. इस शिविर में सिर्फ मंत्री ही नहीं देशभर के नीति विशेषज्ञ भी मौजूद हैं.

उद्देश्य साफ है विभागों के बीच बेहतर तालमेल, तेज फैसले और जनता तक योजनाओं की प्रभावी पहुंच. यानि सरकार इसे गुड गवर्नेंस की प्रयोगशाला बता रही है. लेकिन विपक्ष इस पूरे आयोजन पर सवाल उठा रहा है. कांग्रेस का कहना है यह चिंतन नहीं, चिंता शिविर है. सरकार अपनी नाकामियों और अंदरूनी असंतोष को छिपाने के लिए ऐसे आयोजन कर रही है. यानी विपक्ष के निशाने पर शिविर नहीं सरकार की मंशा है.

विपक्ष के आरोपों पर सरकार ने भी पलटवार में कोई कसर नहीं छोड़ी. उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा मुंगेरीलाल के हसीन सपने कांग्रेस देख रही है. जनता ने उन्हें सत्ता से हटाकर हमें चुना है. कांग्रेस एक परिवार की चाटुकार पार्टी है. भय, भ्रम और भ्रष्टाचार की राजनीति करने वाले चिंतन शिविर का महत्व नहीं समझ सकते. उन्हें जनता और सुशासन से कोई मतलब नहीं है. यानि सत्ता का दावा यह प्रशासन सुधार का मंच है और विपक्ष का आरोप यह सरकार बचाने का मंच है.

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आईआईएम के भीतर विकसित छत्तीसगढ़ का विजन लिखा जा रहा है. लेकिन आईआईएम के बाहर विपक्ष उसी विजन पर सवालों की स्याही उड़ेल रहा है. एक तरफ सरकार कह रही है यही चिंतन भविष्य बदलेगा. दूसरी तरफ कांग्रेस कह रही है जब वर्तमान ही सवालों में है, तो भविष्य का ब्लूप्रिंट किस काम का. यानी चिंतन शिविर शुरू होते ही सियासी संग्राम भी पूरी रफ्तार पकड़ चुका है. अब देखना होगा आईआईएम का यह मंथन जनता के लिए नया मॉडल देता है या विपक्ष को सरकार घेरने का नया मुद्दा.

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