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एमपी के मंडला में दर्दनाक हादसा: ऑटो-रिक्शा में महिला ने एक साथ 4 बच्चों को दिया जन्म, समय पर एम्बुलेंस न मिलने से चारों की मौत; परिजनों में भारी आक्रोश

एमपी के मंडला में दर्दनाक हादसा: ऑटो-रिक्शा में महिला ने एक साथ 4 बच्चों को दिया जन्म, समय पर एम्बुलेंस न मिलने से चारों की मौत; परिजनों में भारी आक्रोश

VOI News 5 days ago

ध्य प्रदेश के मंडला जिले से एक बेहद झकझोर देने वाली और दर्दनाक खबर सामने आई है। अस्पताल ले जाते समय एक गर्भवती महिला ने ऑटो-रिक्शा के भीतर एक साथ चार बच्चों (क्वाड्रुपलेट्स) को जन्म दिया, लेकिन अफसोस कि जन्म के कुछ ही देर बाद चारों नवजातों ने दम तोड़ दिया।

इस दर्दनाक घटना के बाद पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि अगर समय पर सरकारी एम्बुलेंस मिल जाती, तो आज चारों बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। दूसरी ओर, स्वास्थ्य अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मौत की वजह कुछ और बताई है।

गर्भावस्था के 7वें महीने में ही शुरू हो गई थी प्रसव पीड़ा

जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. डी.जे. मोहंती ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मंडला के नाइगांव की रहने वाली रजनी सिंगाराम को गर्भावस्था के सातवें महीने में ही अचानक तेज प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) शुरू हो गई थी। आनन-फानन में परिजन उन्हें एक निजी वाहन के जरिए घुथास स्थित सरकारी उप-स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां तैनात डॉक्टरों ने महिला की गंभीर हालत और प्री-मैच्योर डिलीवरी की संभावना को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत बिछिया के बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के लिए रेफर कर दिया।

अस्पताल पहुंचने से पहले ऑटो में गूंजी किलकारियां, फिर पसरा मातम

घुथास स्वास्थ्य केंद्र से रेफर किए जाने के बाद परिजन महिला को ऑटो-रिक्शा में बैठाकर बिछिया अस्पताल के लिए रवाना हुए। लेकिन रास्ते में महिला की पीड़ा असहनीय हो गई और उन्होंने बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले ही ऑटो के भीतर एक-एक कर चार बच्चों को जन्म दे दिया। इन नवजातों में तीन लड़कियां और एक लड़का शामिल था। जन्म के कुछ ही मिनटों के भीतर चारों बच्चों की सांसें थम गईं और पल भर में खुशियां मातम में बदल गईं। सीएमएचओ डॉ. मोहंती के मुताबिक, महिला को फिलहाल बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है और वह पूरी तरह खतरे से बाहर हैं।

सभी बच्चों का वजन था बेहद कम, डॉक्टरों ने बताया- समय से पहले हुआ जन्म

नवजातों की मौत के कारणों पर बात करते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की मौत एम्बुलेंस की कमी से नहीं, बल्कि समय से पहले जन्म (प्री-मैच्योर डिलीवरी) और उनके शरीर के अधूरे विकास के कारण हुई है। डॉ. मोहंती ने बताया कि सामान्य तौर पर नौ महीने में होने वाला जन्म यहां सातवें महीने में ही हो गया था, जिसके कारण चारों बच्चों का वजन बेहद कम (लगभग 1.5 किलोग्राम प्रति बच्चा) था। उनके फेफड़े और अन्य अंग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए थे, जिसके चलते उन्हें बचाया नहीं जा सका।

पीड़ित पिता का रो-रोकर बुरा हाल, बोले- फोन करने पर भी नहीं आई एम्बुलेंस

इस हादसे ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। महिला के पति गणेश सिंगाराम का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने सीधे तौर पर सरकारी सिस्टम को इस मौत का जिम्मेदार ठहराया है। गणेश का दावा है कि जैसे ही उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, उन्होंने तुरंत सरकारी इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवा (108) को कई बार फोन मिलाया, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला। जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो वे मजबूरी में ऑटो-रिक्शा से अस्पताल के लिए भागे। पीड़ित पिता का कहना है कि अगर एम्बुलेंस समय पर आ जाती, तो उसमें मौजूद ऑक्सीजन और मेडिकल सपोर्ट के सहारे उनके बच्चे आज जिंदा होते।

मामले पर जिला मजिस्ट्रेट का बयान: लिखित शिकायत मिलते ही होगी कड़ी जांच

इस संवेदनशील मामले और परिजनों के गंभीर आरोपों को लेकर जब मंडला के जिला मजिस्ट्रेट (DM) राहुल नामदेव धोटे से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर अभी तक इस घटना को लेकर कोई भी लिखित या आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। जिला मजिस्ट्रेट ने पीड़ित परिवार को आश्वासन देते हुए साफ किया कि जैसे ही उन्हें इस मामले में कोई शिकायत प्राप्त होती है, वे तुरंत उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी करेंगे। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा या जिस स्तर पर भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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