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नेपाल-तिब्बत सीमा पर विनाशकारी बाढ़: नेपाल में 626 मौतों से हाहाकार, चीन के सिर्फ 5 मौतों के दावे पर उठे गंभीर सवाल

नेपाल-तिब्बत सीमा पर विनाशकारी बाढ़: नेपाल में 626 मौतों से हाहाकार, चीन के सिर्फ 5 मौतों के दावे पर उठे गंभीर सवाल

VOI News 1 week ago

काठमांडू/ल्हासा: नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण जलप्रलय ने भारी तबाही मचाई है, लेकिन सीमा के दोनों तरफ इस आपदा की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें सामने आई हैं। एक ओर नेपाल में स्वतंत्र मीडिया और स्थानीय लोगों की मदद से तबाही की भयावह सच्चाई दुनिया के सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर तिब्बत में चीन की सूचना पाबंदियों और सख्त सेंसरशिप के चलते नुकसान का वास्तविक पैमाना छिपाने के आरोप लग रहे हैं।

आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर, चीनी दावों पर उठे सवाल

बाढ़ ने सीमावर्ती गांवों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है, रिहायशी घरों को बहा दिया है और सैकड़ों जिंदगियों को लील लिया है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार तक नेपाल में मृतकों की संख्या 626 तक पहुंच गई थी, जबकि सीमा पार तिब्बत क्षेत्र में चीन ने केवल 5 लोगों की मौत की सूचना दी है। ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत में ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग के आसपास दर्जनों गांव बसे हैं जहां हजारों की आबादी रहती है, ऐसे में मौतों का इतना कम आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेह पैदा कर रहा है।

नेपाल में ग्राउंड रिपोर्टिंग, चीन में सिर्फ 'राहत कार्यों' का प्रोपेगैंडा

नेपाल में आपदा के तुरंत बाद स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रकार सीधे ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। उन्होंने प्रत्यक्षदर्शियों, प्रभावित परिवारों और बचाव दलों से बातचीत कर जमीनी तबाही, विस्थापन और मानवीय संकट का विस्तृत ब्योरा पेश किया। वैज्ञानिक भी बाढ़ के सटीक कारणों का विश्लेषण करने में जुटे हैं। इसके विपरीत, तिब्बत में चीन के सरकारी मीडिया का रुख पूरी तरह नियंत्रित रहा। चीनी मीडिया ने तबाही की गंभीरता और प्रभावित लोगों की व्यथा दिखाने के बजाय केवल सरकारी बचाव दलों और राहत कार्यों के प्रचार-प्रसार पर ध्यान केंद्रित किया। एक लाइव प्रसारण के दौरान सरकारी पत्रकार ने राहत शिविर में मौजूद किसी भी प्रभावित नागरिक से बात तक नहीं की।

तिब्बत में स्वतंत्र पत्रकारिता पर सख्त पहरा

तिब्बत लंबे समय से चीन का अत्यधिक संवेदनशील और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण वाला इलाका रहा है। धार्मिक स्वतंत्रता और स्वायत्तता की मांग को लेकर उठने वाले विरोध-प्रदर्शनों को चीनी प्रशासन हमेशा सख्ती से दबाता आया है। विदेशी और स्वतंत्र पत्रकारों को तिब्बत में सीधे प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती; उन्हें केवल सरकार द्वारा प्रायोजित और पूरी तरह नियंत्रित टूर के जरिए ही जाने दिया जाता है। इस पूर्ण सेंसरशिप के कारण दुनिया के सामने तिब्बत में आई इस आपदा की वास्तविक क्षति और मानवीय संकट का सच नहीं आ पा रहा है।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: VOI News