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सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण यादव पर ED का बड़ा एक्शन: झांसी और लखनऊ में ताबड़तोड़ छापेमारी, 60 आपराधिक मामलों की कुंडली आई सामने !

सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण यादव पर ED का बड़ा एक्शन: झांसी और लखनऊ में ताबड़तोड़ छापेमारी, 60 आपराधिक मामलों की कुंडली आई सामने !

VOI News 2 days ago

खनऊ/झांसी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को उत्तर प्रदेश में एक बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव के साम्राज्य पर शिकंजा कस दिया है।

आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों के तहत केंद्रीय जांच एजेंसी ने पूर्व विधायक के झांसी और लखनऊ स्थित कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस अचानक हुई कार्रवाई से राजनीतिक गलियारों और रियल एस्टेट जगत में हड़कंप मच गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि अब तक इस पूरी कार्रवाई में क्या-क्या बड़ी बातें सामने आई हैं।

क्या है पूरा मामला और क्यों रडार पर आए पूर्व विधायक?

ईडी की यह मैराथन कार्रवाई झांसी की गरौठा विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनके बेहद करीबी मददगारों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) की जांच का हिस्सा है। जांच एजेंसी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर को आधार बनाकर शुरू किया गया था। आरोप है कि दीप नारायण सिंह यादव ने विधायक रहते हुए और अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर अपनी घोषित आय के स्रोतों से कहीं ज्यादा अकूत संपत्ति खड़ी की। इस अवैध कमाई को सफेद करने के लिए रियल एस्टेट और अन्य व्यवसायों से जुड़ी कई शेल (फर्जी) कंपनियों और एलएलपी (लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप) के जरिए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन किए गए।

60 आपराधिक मामलों की कुंडली आई सामने, गैंगस्टर और गुंडा एक्ट भी दर्ज

ईडी की तफ्तीश में पूर्व विधायक के काले कारनामों का एक लंबा चिट्ठा खुलकर सामने आया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में करीब 23 एफआईआर पहले से ही दर्ज थीं, लेकिन जब गहराई से कड़ियां जोड़ी गईं तो शुरुआती जांच में ही लगभग 60 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी मिली है। पूर्व विधायक के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, रंगदारी वसूलने, हत्या के प्रयास और डकैती जैसे संगीन आरोप शामिल हैं। इसके अलावा, उन पर उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट के तहत भी कड़ी कार्रवाई की जा चुकी है। ईडी को पुख्ता शक है कि आपराधिक गतिविधियों और जबरन वसूली के जरिए कमाए गए काले धन को ही अलग-अलग बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया है, जिसकी कड़ियां खंगालने के लिए पूर्व विधायक के परिवार और व्यावसायिक सहयोगियों के दफ्तरों व आवासों को खंगाला जा रहा है।

छापेमारी में मिले अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत, जांच जारी

झांसी और लखनऊ में घंटों चली इस छापेमारी के दौरान ईडी के हाथ कई बड़े और चौंकाने वाले सबूत लगे हैं। केंद्रीय एजेंसी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मौके से बड़ी मात्रा में संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के गुप्त दस्तावेज, डिजिटल उपकरण (जैसे लैपटॉप, हार्ड डिस्क और मोबाइल) और चल-अचल संपत्तियों के मालिकाना हक से जुड़े बेहद गोपनीय रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं। ईडी के अधिकारी अब इन सभी दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की बारीकी से स्क्रूटनी कर रहे हैं, ताकि इस बड़े सिंडिकेट में शामिल अन्य रसूखदार चेहरों और अवैध रूप से कमाए गए पैसों के मुख्य स्रोत (रूट) का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जा सके।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: VOI News