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कला और संस्कृति
उर्दू जगत के मशहूर कवि Shamsur Rahman Faruqi का निधन, अपने घर पर ली आखिरी सांस

साल 1960 में उन्होंने लिखना शुरू किया। शुरू में, उन्होंने भारतीय डाक सेवा (1960-1968) के लिए काम किया, और फिर 1994 तक एक मुख्य पोस्टमास्टर-जनरल और पोस्टल सर्विसेज बोर्ड, नई दिल्ली के सदस्य के रूप में काम किया।

आज यानी 25 दिसंबर के दिन उर्दू जगत के जाने माने कवि शम्सुर्रहमान फारुकी का इलाहाबाद में अपने घर पर सुबह 11.20 बजे निधन हो गया। शम्सुर्रहमान फारुकी एक जाने माने भारतीय कवि और उर्दू समीक्षक और सिद्धांतकार थे। उन्होंने साहित्यिक प्रशंसा के नए मॉडल तैयार किए थे।

उन्होंने साहित्यिक आलोचना के पश्चिमी सिद्धांतों को आत्मसात किया और बाद में उन्हें उर्दू साहित्य में लागू किया। उनका जन्म 30 सितंबर 1935 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने 1955 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री प्राप्त की थी।

साल 1960 में उन्होंने लिखना शुरू किया। शुरू में, उन्होंने भारतीय डाक सेवा (1960-1968) के लिए काम किया, और फिर 1994 तक एक मुख्य पोस्टमास्टर-जनरल और पोस्टल सर्विसेज बोर्ड, नई दिल्ली के सदस्य के रूप में काम किया। वे अपनी साहित्यिक पत्रिका शबखून के संपादक भी थे।

वे पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में दक्षिण एशिया क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र में पार्ट टाइम प्रोफेसर के तौर पर भी काम करते थे। कई चांद थे सरे-आसमां, दी मिरर ऑफ ब्यूटी उनके कुछ प्रसिद्ध रचनाओं में से एक हैं। साल 1996 में उन्हें सरस्वती सम्मान से नवाजा गया था। इसके अलावा उन्हें भारत सरकार की तरफ से 2009 में पद्म श्री से भी नवाजा गया था।

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