Dharmendra Pradhan : CBSE OSM विवाद पर विपक्ष का हमला, ट्रांसफर, ट्रांसफर और धर्मेंद्र प्रधान सेफ
आईएमडी ने अपने ताजा पूर्वानुमान में कहा कि दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर, लक्षद्वीप द्वीपसमूह, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, साथ ही बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। विभाग ने अनुमान जताया है कि 4 जून के आसपास मानसून इन क्षेत्रों में और अधिक सक्रिय हो सकता है।
Gel vs AGM vs Lead-Acid Battery : कौन-सी बैटरी है सबसे बेहतर? जानिए फायदे, नुकसान, उम्र और सही उपयोग
आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून मई के तीसरे सप्ताह में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह पहुंचता है और इसके बाद भारतीय मुख्य भूमि की ओर बढ़ता है। केरल में मानसून के आगमन की आधिकारिक सामान्य तिथि 1 जून मानी जाती है, लेकिन इस वर्ष इसके कुछ दिनों की देरी से पहुंचने की संभावना जताई गई है।
सामान्य से कम बारिश का अनुमान
इस वर्ष मानसून की प्रगति पर विशेष नजर रखी जा रही है, क्योंकि आईएमडी ने पहले ही देश में सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार, इस बार बारिश दीर्घकालिक औसत (Long Period Average-LPA) का लगभग 90 प्रतिशत रह सकती है।
मौसम विशेषज्ञों की चिंता का एक प्रमुख कारण एल नीनो (El Niño) प्रभाव भी है। यह मौसमीय घटना आमतौर पर कमजोर और अनियमित वर्षा से जुड़ी मानी जाती है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है।
बंगाल में महाराष्ट्र जैसा 'खेला' होने की आहट! क्या ममता बनर्जी के हाथ से भी छिन जाएगी असली TMC?
कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम
भारत में सालाना वर्षा का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा जून से सितंबर के बीच आने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून से प्राप्त होता है। यही वजह है कि मानसून को देश की कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। जून से शुरू होने वाला खरीफ फसल सीजन धान, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई के लिए महत्वपूर्ण होता है। देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में खरीफ सीजन का योगदान 50 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे में मानसून का प्रदर्शन कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव डालता है। Edited by : Sudhir Sharma

