आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। विशेष रूप से पुरुष बांझपन (मेल इंफर्टिलिटी) के उन मामलों में जहां पहले कोई उम्मीद नहीं थी, अब नई उम्मीद जगी है।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित STAR (Sperm Tracking and Recovery) सिस्टम उन पुरुषों में दुर्लभ शुक्राणु (स्पर्म) को पहचान और निकाल रहा है, जिन्हें 'एज़ोस्पर्मिया' (Azoospermia) घोषित किया गया था-यानी वीर्य में शुक्राणु शून्य माने गए थे।
एज़ोस्पर्मिया: एक गंभीर समस्या
विश्व स्तर पर बांझपन प्रजनन आयु के लगभग हर छठे व्यक्ति को प्रभावित करता है, जिसमें पुरुष कारक लगभग 50% मामलों में जिम्मेदार होता है। करीब 1% पुरुष एज़ोस्पर्मिया से पीड़ित होते हैं। इस स्थिति में वीर्य में शुक्राणु नदारद होते हैं या इतने कम होते हैं कि पारंपरिक तरीकों से पता नहीं चल पाते।
सैमुअल और पेनेलोप की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। सैमुअल को क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome) था-एक आनुवंशिक स्थिति जिसमें पुरुष में अतिरिक्त X क्रोमोसोम होता है। इससे शुक्राणु उत्पादन बेहद कम या न के बराबर हो जाता है। ढाई साल की निरंतर कोशिशों के बाद नवंबर 2025 में पेनेलोप को डॉक्टर का वो फोन आया, जिसका इंतजार वे कर रहे थे-वे गर्भवती थीं।
एज़ोस्पर्मिया: एक गंभीर समस्या
विश्व स्तर पर बांझपन प्रजनन आयु के लगभग हर छठे व्यक्ति को प्रभावित करता है, जिसमें पुरुष कारक लगभग 50% मामलों में जिम्मेदार होता है। करीब 1% पुरुष एज़ोस्पर्मिया से पीड़ित होते हैं। इस स्थिति में वीर्य में शुक्राणु नदारद होते हैं या इतने कम होते हैं कि पारंपरिक तरीकों से पता नहीं चल पाते।
सैमुअल और पेनेलोप की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। सैमुअल को क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome) था-एक आनुवंशिक स्थिति जिसमें पुरुष में अतिरिक्त X क्रोमोसोम होता है। इससे शुक्राणु उत्पादन बेहद कम या न के बराबर हो जाता है। ढाई साल की निरंतर कोशिशों के बाद नवंबर 2025 में पेनेलोप को डॉक्टर का वो फोन आया, जिसका इंतजार वे कर रहे थे-वे गर्भवती थीं।
STAR सिस्टम: आकाश से प्रेरणा
कोलंबिया यूनिवर्सिटी फर्टिलिटी सेंटर के डायरेक्टर डॉ. ज़ेव विलियम्स को 2020 में यह विचार खगोल विज्ञान के एक लेख से मिला, जिसमें AI ब्रह्मांड के विशाल डेटा में नए, धुंधले सितारों को खोज रहा था। उन्होंने सोचा कि बांझ पुरुष के नमूने में एक दुर्लभ शुक्राणु को खोजना भी उसी तरह का चुनौतीपूर्ण कार्य है।
STAR सिस्टम माइक्रोफ्लुइडिक्स, हाई-स्पीड इमेजिंग और AI का अनोखा संयोजन है:
माइक्रोफ्लुइडिक चिप्स - मानव बाल जितने पतले चैनल, जिनसे नमूना बहता है।
हाई-स्पीड इमेजिंग - प्रति सेकंड सैकड़ों छवियां।
AI एल्गोरिदम - रियल-टाइम में कचरा, मलबे और कोशिका टुकड़ों से सक्रिय शुक्राणु को पहचानता है।
रोबोटिक सिस्टम - मिलीसेकंड में शुक्राणु वाले हिस्से को अलग कर लेता है।
परीक्षणों में यह तकनीक मानवीय खोज की तुलना में 40 गुना अधिक प्रभावी पाई गई है, साथ ही इसकी संवेदनशीलता दर 100% है।
पिछले साल के अंत में 20 साल की बांझपन की लड़ाई लड़ रहे एक जोड़े को STAR बेबी का सुख मिला-यह AI-सहायता से हुई पहली ज्ञात गर्भावस्था थी। सैमुअल के टेस्टिकल ऊतक से STAR ने 8 शुक्राणु निकाले। इनमें से एक भ्रूण में विकसित हुआ और 2026 में उनके घर बेटे का स्वागत होने वाला है।
अब तक 175 रोगियों पर इसके उपयोग में लगभग 30% मामलों में शुक्राणु मिले हैं-वे मामले जहां पहले पूरी तरह निराशा थी।
वारविक यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सियोभान क्वेंबी जैसी विशेषज्ञ चेतावती हैं कि AI के उत्साह में अति-आशावादी वादे न किए जाएं। बांझपन का इलाज महंगा और भावनात्मक रूप से थकाने वाला होता है। इसलिए बड़े पैमाने पर नैदानिक ट्रायल्स, नैतिक दिशा-निर्देश, डेटा गोपनीयता और जवाबदेही जरूरी हैं।
STAR अभी शुरुआती चरण में है। यह हर मरीज के लिए काम नहीं करेगा, लेकिन उन हजारों पुरुषों के लिए जो पहले 'बायोलॉजिकल पिता' बनने की उम्मीद छोड़ चुके थे, यह एक बड़ी उम्मीद है।
STAR सिस्टम सिर्फ एक तकनीकी आविष्कार नहीं, बल्कि विज्ञान और मानवीय इच्छाशक्ति का सुंदर मेल है। जो तकनीक सुदूर आकाश के सितारों को खोजती है, वही अब धरती पर नए जीवन की किरण ला रही है। सैमुअल जैसे लाखों पुरुषों के लिए यह 'असंभव' को 'संभव' बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
Edited By: Naveen R Rangiyal

