भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना
देश में जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो चुका है। गौरतलब है कि भारतीय इतिहास में यह पहली ऐसी जनगणना होगी जो पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से की जाएगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से सरकार न केवल जनसंख्या के आंकड़े, बल्कि भारतीय परिवारों की जीवनशैली और उनके बीच के संबंधों की प्रकृति को भी समझने का प्रयास करेगी। माना जा रहा है कि इस डिजिटल दृष्टिकोण से डेटा विश्लेषण में सटीकता और गति आएगी।
नागरिकों से पूछे जाएंगे 33 महत्वपूर्ण प्रश्न
इस गणना के दौरान प्रगणकों (Enumerators) द्वारा प्रत्येक परिवार से कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। इन प्रश्नों में मकान का विवरण (जैसे दीवार और छत की सामग्री), परिवार के सदस्यों की संख्या, शैक्षणिक योग्यता और जाति (SC, ST, OBC) जैसी बुनियादी जानकारी शामिल है। इसके अलावा, पीने का पानी, बिजली, शौचालय, रसोई के लिए इस्तेमाल होने वाला ईंधन जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ परिवार के पास उपलब्ध वाहन, टीवी, इंटरनेट और लैपटॉप जैसी आधुनिक सुविधाओं के बारे में भी विवरण एकत्र किया जाएगा।
विभिन्न राज्यों के लिए अलग-अलग समय सारणी
देशभर में जनगणना के लिए अलग-अलग तारीखें तय की गई हैं। 1 अप्रैल से दिल्ली, गोवा, कर्नाटक और ओडिशा सहित 8 राज्यों में काम शुरू हो चुका है। मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में 16 अप्रैल से, जबकि महाराष्ट्र और राजस्थान में 1 मई से प्रक्रिया शुरू होगी। तमिलनाडु और असम जैसे राज्यों में जुलाई और अगस्त के महीने में गणना की जाएगी। पश्चिम बंगाल वर्तमान में देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां अभी तक जनगणना की तारीख घोषित नहीं की गई है।
जनगणना का उद्देश्य और महत्व
जनगणना किसी भी देश के विकास के लिए सबसे बड़ा डेटा स्रोत है। इसके माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही सरकार भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं, सड़कों, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं का नियोजन करती है। हालांकि गुजरात में चुनाव के कारण इसमें देरी हुई है, लेकिन इस प्रक्रिया के पूरा होने से राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए सटीक जानकारी उपलब्ध होगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala

