Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास क्यों शुरू होता है? जानें धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक महत्व

देवशयनी एकादशी से चातुर्मास क्यों शुरू होता है? जानें धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक महत्व

Hari Shayani Ekadashi: हिंदू धर्म में देवशयनी/हरिशयनी एकादशी का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं।

इसी घटना के साथ चातुर्मास का आरंभ माना जाता है। 'चातुर्मास' का अर्थ है चार महीनों की अवधि, जो आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी/ देवउठनी एकादशी तक चलती है। इस बार 25 जुलाई 2026, दिन शनिवार से चातुर्मास शुरू हो रहा है और इसी दिन देवशयनी/हरिशयनी पर्व भी मनाया जाता है।Chaturmas 2026: आषाढ़ माह 2026: चातुर्मास की शुरुआत से पहले जान लें ये जरूरी नियम

1. पौराणिक कथा: राजा बली और भगवान विष्णु का वचन

2. वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण (ऋतु परिवर्तन)

3. शुभ कार्यों पर रोक क्यों?

हिंदू धर्म और पुराणों के अनुसार, देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होने के पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा और वैज्ञानिक/प्राकृतिक कारण दोनों हैं। इसे मुख्य रूप से भगवान विष्णु के शयनकाल (सोने के समय) से जोड़कर देखा जाता है:

1. पौराणिक कथा: राजा बली और भगवान विष्णु का वचन

इसके पीछे सबसे प्रमुख कथा वामन अवतार की है। जब भगवान विष्णु ने वामन रूप धरकर दैत्यराज बली से तीन पग में तीनों लोक नाप लिए थे, तब बली की दानवीरता से प्रसन्न होकर उन्होंने बली को पाताल लोक का राजा बना दिया और खुद भी उसके साथ पाताल चलने का वचन दे दिया।

इससे माता लक्ष्मी और बाकी देवता चिंतित हो गए। तब माता लक्ष्मी ने राजा बली को रक्षासूत्र (राखी) बांधकर उनसे उपहार स्वरूप भगवान विष्णु को मांग लिया। लेकिन भगवान विष्णु अपने भक्त बली को निराश नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने बली को वरदान दिया कि वे हर साल आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी अर्थात् देवप्रबोधिनी एकादशी तक पाताल लोक में रहकर राजा बली के महल का पहरा देंगे। इसी समय को भगवान विष्णु का शयनकाल माना जाता है और यहीं से चातुर्मास के चार महीने की अवधि की शुरुआत होती है।

2. वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण (ऋतु परिवर्तन)

अगर इसे हम व्यावहारिक और प्राकृतिक नजरिए से देखें, तो चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ महीने के अंत में होती है, जब वर्षा ऋतु या मानसून चरम पर होता है।

स्वास्थ्य का ध्यान: इन चार महीनों में अत्यधिक बारिश के कारण हवा और पानी में बैक्टीरिया, कीड़े-मकौड़े और संक्रामक बीमारियां तेजी से पनपती हैं। हमारी पाचन शक्ति यानी जठराग्नि भी इस दौरान कमजोर हो जाती है।

यात्रा पर रोक: पुराने समय में इस मौसम में नदियां उफान पर होती थीं और रास्ते बंद हो जाते थे। इसलिए साधु-संतों और लोगों को एक ही स्थान पर रुककर ईश्वर भक्ति करने की सलाह दी गई, ताकि वे सुरक्षित रह सकें।

3. शुभ कार्यों पर रोक क्यों?

चूंकि इन चार महीनों में कॉस्मिक एनर्जी यानी ब्रह्मांडीय ऊर्जा और मौसम में काफी बदलाव होते हैं, और भगवान विष्णु, जो सृष्टि के पालनहार हैं का प्रभाव इस दौरान आंतरिक साधना की ओर मुड़ जाता है, इसलिए बाहरी मांगलिक कार्य- जैसे शादी, मुंडन, गृह प्रवेश रोक दिए जाते हैं। यह समय बाहरी उत्सवों का नहीं, बल्कि आत्म-चिंतन, व्रत, और सात्विक जीवन जीने का होता है।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।चातुर्मास कब से होंगे प्रारंभ, क्या है इसका महत्व?

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Webduniya Hindi