आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पोस्ट के साथ अपने वीडियो संदेश में कहा कि 20% इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लेकर जनता में काफी नाराजगी है। 30 जून को केंद्र सरकार ने अटॉर्नी जनरल के जरिए सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि यह सिर्फ एक प्रयोग है और आगे की कार्रवाई नतीजों पर निर्भर करेगी। लेकिन, जब यह मामला मीडिया और प्रेस में आया, तो केंद्र सरकार पूरी तरह से पीछे हट गई। सरकार ने एक बयान जारी कर दावा किया कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा था और इन खबरों को गलत बताया।
1.4 अरब लोगों की आबादी प्रभावित
आप नेता ने कहा कि प्रयोग का मतलब आम तौर पर किसी चीज को सीमित स्तर पर आजमाना होता है, जैसे 100, 500 या 1,000 गाड़ियों पर। ऐसे ट्रायल के नतीजों के आधार पर यह तय किया जाता है कि इसे पूरे देश में लागू किया जाए या नहीं। फिर भी, आपने पूरे देश में सारी गाड़ियों के लिए इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल अनिवार्य कर दिया है, जिससे 1.4 अरब लोगों की आबादी प्रभावित हो रही है, और साथ ही आप यह भी दावा कर रहे हैं कि आप एक प्रयोग कर रहे हैं।
क्या मुआवजा देगी सरकार?
उन्होंने मोदी सरकार से सवाल किया कि क्या आप उन लोगों को मुआवजा देंगे जिनकी गाड़ियां खराब हो रही हैं? लोगों के जनादेश का सम्मान करना, उनकी चिंताओं को सुनना और उनकी इच्छाओं के अनुसार काम करना आपकी जिम्मेदारी है। मैं आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनसे इस नीति को वापस लेने का आग्रह करूंगा। E20 पेट्रोल से इंजन खराब हुआ तो क्या इंश्योरेंस क्लेम मिलेगा? सरकार ने बताई सचाई, क्या बोलीं बीमा कंपनियां
गौरतलब है कि E20 ब्लेंडेड पेट्रोल को पर्यावरण अनुकूल और आयात कम करने का विकल्प बताया जा रहा था, लेकिन विपक्ष और कई उपभोक्ता इसे बिना उचित तैयारी और इंफ्रास्ट्रक्चर के देशवासियों पर थोपा गया फैसला बता रहे हैं।

