1. चर्च की रौनक और प्रार्थना का स्वर
ईस्टर की सुबह गिरजाघरों (चर्च) में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। प्रभु यीशु के पुनर्जीवित होने की खुशी में श्रद्धालु एकत्रित होकर विशेष प्रार्थना करते हैं। अंधकार पर प्रकाश की विजय के प्रतीक रूप में मोमबत्तियां जलाई जाती हैं और बाइबिल के पवित्र संदेशों का पाठ किया जाता है। लोग एक-दूसरे को गले लगकर 'हैप्पी ईस्टर' कहते हुए इस दिव्य चमत्कार की बधाई देते हैं।
2. ईस्टर एग्स: नए जीवन की सुनहरी शुरुआत
ईस्टर की सबसे रंगीन परंपरा है 'ईस्टर एग्स'। ईसाई मान्यता में अंडे को 'नए जीवन' और 'उमंग' का प्रतीक माना गया है। जैसे एक अंडे के भीतर से जीवन फूटता है, वैसे ही यीशु कब्र से जीवित बाहर आए थे। लोग अंडों को आकर्षक रंगों और कलाकृतियों से सजाते हैं और प्रेम के प्रतीक के रूप में एक-दूसरे को उपहार में देते हैं।
3. वह खाली कब्र और मरियम मगदलिनी का साक्षात्कार
बाइबिल के अनुसार, सूली से उतारने के बाद यीशु के पार्थिव शरीर को एक गुफा (कब्र) में रखा गया था, जिसके द्वार पर एक विशाल पत्थर लगा था। रविवार की अलसुबह जब मरियम मगदलिनी वहां पहुँची, तो वह पत्थर हटा हुआ था और कब्र खाली थी।
रोती हुई मरियम ने जब कब्र के भीतर झांका, तो वहां दो स्वर्गदूत बैठे थे। जैसे ही वह मुड़ी, साक्षात प्रभु यीशु वहां खड़े थे। उन्होंने मरियम से कहा- "मैं अपने परमपिता के पास जा रहा हूँ, तुम जाकर भाइयों को यह शुभ संदेश दो।" मरियम ने शिष्यों को जाकर हर्षोल्लास के साथ बताया- "मैंने प्रभु को जीवित देखा है!"
4. 40 दिनों का प्रवास और स्वर्गारोहण
पुनर्जीवित होने के बाद ईसा मसीह तुरंत स्वर्ग नहीं गए। उन्होंने अगले 40 दिनों तक पृथ्वी पर रहकर अपने शिष्यों को सत्य का मार्ग दिखाया और 'कलीसिया' (चर्च समूह) की नींव रखी। इसके बाद, जैतून के पहाड़ पर अपने अनुयायियों को आशीर्वाद देते हुए वे बादलों के बीच स्वर्ग की ओर विदा हो गए। स्वर्गदूतों ने तब भविष्यवाणी की थी कि यीशु एक बार फिर समस्त मानवता का न्याय करने लौटेंगे।
5. चर्च ऑफ द होली सेपल्कर: आस्था का केंद्र
यरूशलेम की प्राचीन दीवारों के पास स्थित 'चर्च ऑफ द होली सेपल्कर' दुनिया के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। माना जाता है कि इसी स्थान पर वह गुफा थी जहाँ यीशु को दफनाया गया था और यहीं से वे पुनः जीवित हुए थे। यह स्थल ईसा मसीह के अंतिम भोज (Last Supper) की स्मृतियों को भी संजोए हुए है, जहाँ आज भी लाखों लोग शीश नवाने पहुँचते हैं।
- अनिरुद्ध जोशी

