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गोगा नवमी 2026: गोगा जी महाराज पूजन विधि, कथा और आरती

गोगा नवमी 2026: गोगा जी महाराज पूजन विधि, कथा और आरती

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को गोगा नवमी का पर्व बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह पर्व लोक देवता गोगा जी (जाहरवीर बाबा) को समर्पित है, जिन्हें नागों के देवता के रूप में पूजा जाता है।
इस बार गोगा नवमी का पर्व 05 सितंबर 2026 शनिवार के दिन रहेगी।

1. पूजन सामग्री एवं सरल पूजा विधि

पूजन सामग्री: कच्चा दूध, रोली, अक्षत, जल, दीप, देसी घी, धूप, बाजरा, खीर, चूरमा, पूड़ी, और नाग देवता या गोगा जी की मूर्ति/चित्र।

सफाई व स्थापना: प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा स्थान को स्वच्छ करें। दीवार पर गेरू से लीपकर काजल या रोली से नाग/गोगा जी का चित्र बनाएं अथवा गोगा जी की मूर्ति स्थापित करें।

अभिषेक व तिलक: गोगा जी महाराज को जल, रोली और अक्षत अर्पित करें। उन्हें कच्चे दूध का अर्घ्य दें।

विशेष भोग: गोगा जी को मुख्य रूप से दूध, बाजरा, खीर, पूड़ी और चूरमे का भोग लगाया जाता है।

घोड़े की पूजा: गोगा जी के प्रिय नीले घोड़े (नीला घोड़ा) के नाम से भी चना, बाजरा व चारा अर्पित किया जाता है।

आरती व क्षमा याचना: धूप-दीप जलाकर गोगा नवमी की कथा सुनें या पढ़ें और अंत में गोगा जी महाराज की आरती उतारें।

2. गोगा नवमी की व्रत कथा

पौराणिक एवं लोक कथाओं के अनुसार, राजस्थान के ददरेवा राज्य के राजा जेवर सिंह की पत्नी रानी बाछल संतानहीन थीं। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने गुरु गोरखनाथ की कठोर तपस्या की। रानी बाछल की भक्ति से प्रसन्न होकर गुरु गोरखनाथ ने उन्हें प्रसाद स्वरूप 'गुगल' नामक फल दिया और आशीर्वाद दिया कि उन्हें एक पराक्रमी पुत्र की प्राप्ति होगी।

समय आने पर रानी बाछल के गर्भ से एक प्रतापी बालक का जन्म हुआ, जिनका नाम 'गोगा जी' रखा गया (गुगल फल के नाम पर)। गोगा जी बाल्यकाल से ही अत्यंत सिद्ध, पराक्रमी और चमत्कारिक पुरुष थे। उन्होंने गुरु गोरखनाथ से योग और सिद्धियां सीखीं।

गोगा जी ने अपने जीवनकाल में नागों के राजा तक्षक को भी परास्त किया था, जिससे प्रसन्न होकर नागदेव ने उन्हें नागों पर नियंत्रण और सर्पदंश से रक्षा करने का वरदान दिया। गोगा जी ने अपने धर्म और प्रजा की रक्षा के लिए विदेशी आक्रांताओं से वीरतापूर्वक युद्ध किया। अंत में, उन्होंने जीवित समाधि ले ली थी। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति गोगा नवमी के दिन सच्चे मन से गोगा जी की पूजा करता है, उसके परिवार की सर्पदंश (नाग के डंक) से रक्षा होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

3. श्री गोगा जी महाराज की आरती

जय गोगा देव हरे, स्वामी जय जाहरवीर हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे।।

जय गोगा देव हरे...

बाछल के गृह जन्मे, जाहरवीर पीरा।

गोरख देव कृपा से, मेटे सब पीरा।।

जय गोगा देव हरे...

शीश पर मुकुट विराजे, कांधे धनुष धारी।

नीले घोड़े असवारी, मूरत अति प्यारी।।

जय गोगा देव हरे...

विषधर नाग नचावे, सर्पों के स्वामी।

दूर करें दुख-दंश, अंतरयामी।।

जय गोगा देव हरे...

जो कोई आरती गावे, शुद्ध मन लावे।

भय और रोग मिटे सब, सुख-संपत्ति पावे।।

जय गोगा देव हरे...

आरती नंबर-2

ॐ जय जाहरवीर हरे, बाबा जय गोगा वीर हरे।

धरती पर आ करके, सब दुख दूर करे ॥ ॐ जय.

जेवर राव के पुत्र, रानी बाछल माता।

बाग़ में जन्म लिया, जन-जन के भाग्य दाता ॥ ॐ जय... ॥

मेडी धाम विराजे, अनुपम रूप धरे।

रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे ॥ ॐ जय... ॥

सत्य अहिंसा का व्रत, तुमने सदा पाला।

संकट में भक्तों का, साथ नहीं टाल्या ॥ ॐ जय... ॥

जो कोई नर गावे, ध्यान धरे मन में।

वांछित फल पावे, संकट नहिं तन में ॥ ॐ जय... ॥

आरती गोगा जी की, जो कोई जन गावे।

कहत नरसिंह पांडे, सुख-संपत्ति पावे ॥ ॐ जय... ॥

विशेष मान्यता: गोगा नवमी के दिन बहने अपने भाइयों की दीर्घायु और रक्षा के लिए भी प्रार्थना करती हैं तथा इस दिन नाग देवता को कच्चा दूध चढ़ाना विशेष शुभ माना जाता है।

बोलो जाहरवीर गोगा जी महाराज की जय!

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