इस अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की दिशा में इस परियोजना को देश के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
सालाना 20 करोड़ चिप्स का उत्पादन, लक्ष्य 500 करोड़ का
साणंद स्थित यह प्लांट हर वर्ष लगभग 20 करोड़ सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन करने की क्षमता रखता है। कंपनी ने भविष्य में इस क्षमता को बढ़ाकर 500 करोड़ चिप्स प्रति वर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
जापान और मलेशिया को शुरू हुआ निर्यात
इस प्लांट में निर्मित सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों में किया जाएगा। यहां तैयार हुई पहली खेप की चिप्स का निर्यात जापान और मलेशिया जैसे देशों में शुरू हो चुका है, जिससे भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद है।
5 हजार से अधिक रोजगार के अवसर
इस महत्वाकांक्षी परियोजना से अगले पांच वर्षों में लगभग 5,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे स्थानीय युवाओं को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार और करियर के नए अवसर मिलेंगे।
भारत का नया सेमीकंडक्टर हब बन रहा है साणंद
अब तक ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए प्रसिद्ध साणंद तेजी से देश के प्रमुख सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है। इस नए प्लांट के शुरू होने से गुजरात हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के क्षेत्र में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत कर रहा है।

