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गुजरात में अफसरों के बंगलों पर चला बुलडोजर, नर्मदा जिला प्रशासन की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई

गुजरात में अफसरों के बंगलों पर चला बुलडोजर, नर्मदा जिला प्रशासन की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई

गुजरात के नर्मदा जिले में प्रशासन ने अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) के पास गरुड़ेश्वर में सरकारी अफसरों द्वारा रियायती (सब्सिडी वाले) आवासीय प्लॉट का कमर्शियल इस्तेमाल करने के आरोप में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है।
नर्मदा जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बने ऐसे 5 अवैध आलीशान बंगलों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया है।

आरटीआई (RTI) से हुआ बड़ा खुलासा

इस अभूतपूर्व कार्रवाई के तहत स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से महज 1 किलोमीटर दूर गरुड़ेश्वर में इन निर्माणों को ढहाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, आवासीय उपयोग की शर्तों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करके ये संपत्तियां बनाई गई थीं। इस पूरे वीआईपी घोटाले का खुलासा इस साल की शुरुआत में एक अन्य सरकारी अधिकारी द्वारा दायर की गई आरटीआई (RTI) जांच के बाद हुआ, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। गुजरात शिक्षा बोर्ड का बड़ा फैसला: 10वीं में अब तीन भाषाएं पढ़ना होगा अनिवार्य

छुट्टी के दिन त्वरित कार्रवाई

नर्मदा जिला प्रशासन ने रविवार जैसे छुट्टी के दिन भारी पुलिस बंदोबस्त के साथ इस तव त्वरित एक्शन को अंजाम दिया। यह कार्रवाई मुख्य रूप से वर्ष 2019 में जिले के 13 वरिष्ठ अधिकारियों को आवंटित किए गए प्लॉट और निर्माणों को निशाना बनाकर की गई थी। इस जमीन आवंटन के आधिकारिक दस्तावेजों पर नर्मदा के तत्कालीन जिला कलेक्टर आरएस निनामा ने हस्ताक्षर किए थे।

कौड़ियों के भाव बांटी गई जमीन

ये सभी सरकारी प्लॉट वरिष्ठ अधिकारियों को उनके निजी निवास के उद्देश्य से बेहद कम और सस्ते दामों पर आवंटित किए गए थे। प्रत्येक अधिकारी को 135 वर्ग मीटर का प्लॉट दिया गया था, जिसके लिए उनसे सिर्फ 37 हजार 210 रुपए से लेकर 50,000 रुपए तक की मामूली रकम वसूली गई थी। अधिकारियों ने एक तरह से माटी (मिट्टी) के भाव यह बेशकीमती सरकारी जमीन हासिल कर ली थी। मानसून से पहले गुजरात सरकार की नई गाइडलाइन: जर्जर कमरों में नहीं लगेगी क्लास, स्कूलों में फर्स्ट एड किट अनिवार्य

बाजार कीमत में भारी कटौती

इन प्लॉट्स की कीमत तय करने के लिए राजस्व विभाग के एक पुराने सर्कुलर का सहारा लिया गया था। इस सर्कुलर के तहत, जमीन की वास्तविक मूल्यांकन बाजार कीमत (Market Value) जो कि 99,255 रुपए थी, उसमें सीधे 50 से 75 प्रतिशत तक की भारी कटौती कर दी गई। इस तरह सरकारी अधिकारियों को भारी छूट देकर प्राइम लोकेशन पर जमीन सौंप दी गई।

समय सीमा का उल्लंघन और प्लॉट रद्दीकरण

गरुड़ेश्वर में बन रहे आदिवासी संग्रहालय (Tribal Museum) के ठीक बगल में स्थित इन प्रीमियम प्लॉट्स से दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) का सीधा और खूबसूरत नजारा दिखता है। नियमों के मुताबिक, आवंटित 13 अधिकारियों में से 5 अधिकारी तय समय सीमा के भीतर अपना आवासीय मकान पूरा करने की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर पाए थे। इस नियम उल्लंघन के कारण वे प्लॉट डिफॉल्ट रूप से पहले ही सरकार को वापस मिल गए थे।

छोटे मकान की जगह 12 बेडरूम के आलीशान बंगले

बाकी बचे प्लॉट धारकों ने भी आवंटन पत्र की शर्तों का पालन नहीं किया और 2 साल के भीतर सामान्य आवासीय निर्माण नहीं कराया। जांच के दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को पता चला कि वहां किसी सामान्य सरकारी कर्मचारी के रहने लायक घर के बजाय 6 से 12 बेडरूम वाले बड़े, बहुमंजिला और बेहद आलीशान बंगले खड़े कर दिए गए थे। इनमें से 6 बंगलों का काम पूरी तरह से तैयार हो चुका था, जबकि 7वें बंगले का निर्माण चल रहा था।

होमस्टे के जरिए कमर्शियल कमाई का खेल

सरकारी जांच में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि ये सभी आलीशान संपत्तियां सरकारी कर्मचारियों के रहने के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक रूप से 'होमस्टे' (Homestay) चलाने के इरादे से बनाई जा रही थीं। चूंकि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर्यटकों के लिए एक वैश्विक केंद्र है, इसलिए यहां होमस्टे का बिजनेस बेहद मुनाफे वाला है। प्रशासन की प्रारंभिक जांच के अनुसार, इन बंगलों का नक्शा और डिजाइन ही विशेष रूप से पर्यटकों को कमरे किराए पर देने के व्यावसायिक उद्देश्य से तैयार किया गया था।

दो अधिकारियों ने ली कोर्ट की शरण

इस बड़े डिमोलिशन ड्राइव (तोड़फोड़ अभियान) के बीच दो अधिकारियों - डीआरडीए (DRDA) निदेशक एलएस डिंडोर और जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी बी.डी. बारिया ने प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में कानूनी अपील दायर कर दी है। कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण रविवार को उनके बंगलों पर बुलडोजर नहीं चलाया गया, जबकि अन्य 6 अधिकारियों के प्लॉट पहले ही वापस लिए जा चुके हैं।

सांसद मनसुख वसावा का कड़ा रुख

इस पूरे मामले पर भरूच लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद मनसुख वसावा ने प्रशासन की इस बुलडोजर कार्रवाई का पुरजोर समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और यह कार्रवाई चयनात्मक (Selective) या पक्षपातपूर्ण नहीं होनी चाहिए। वसावा ने इस क्षेत्र में बन रहे एक 5-star होटल प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर की जा रही लैंडफिलिंग (जमीन भराई) और संदिग्ध मंजूरियों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala

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