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हनुमान जयंती 2 अप्रैल: पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र, प्रासाद और संपूर्ण आरती

हनुमान जयंती 2 अप्रैल: पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र, प्रासाद और संपूर्ण आरती

Hanuman Jayanti 2026: उदियातिथि के अनुसार 02 अप्रैल 2026 गुरुवार के दिन हिंदू मंदिरों में हनुमान जयंती यानी जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन कई शुभ योग और मुहूर्त में पूजा करना लाभदायक रहेगा।
चलिए जानते हैं हनुमान पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र, प्रासाद और आरती के साथ संपूर्ण जानकारी।

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1. हनुमान पूजा का शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 12:00 से दोपहर 12:50 के बीच।

अमृत काल: सुबह 11:18 से दोपहर 12:59 के बीच।

गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:38 से 07:01 के बीच।

सन्ध्या पूजा मुहूर्त: शाम 06:49 से रात्रि 07:48 के बीच।

निशीथ काल मुहूर्त: मध्यरात्रि 12:01 से 12:47 के बीच।

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2. हनुमान पूजा का मंत्र

1. ॐ हं हनुमते नम:।

2. ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकायं हुं फट्।

3. ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा।

4. ॐ नमो भगवते हनुमते नम:।

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3. हनुमान पूजन विधि

।।हनुमान जी की विधिवत पूजन प्रक्रिया।।

पूर्व तैयारी और संकल्प

शुद्धिकरण: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

स्थान पवित्रता: पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें और सभी पूजन सामग्री को एक थाल में सजाकर रखें।

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आसन एवं स्थापना

चौकी स्थापना: पूजा स्थल पर लकड़ी का एक साफ पाट (चौकी) रखें और उस पर लाल या सफेद सूती वस्त्र बिछाएं।

कलश व पंचदेव स्थापना: चौकी के उत्तर दिशा में कलश स्थापित करें और साथ ही पंचदेवों (गणेश, शिव, विष्णु, सूर्य और दुर्गा) की स्थापना करें।

हनुमान जी का विराजना: चौकी के मध्य में हनुमान जी की मूर्ति या चित्र को श्रद्धापूर्वक स्थापित करें।

अभिषेक एवं श्रृंगार

पवित्रीकरण: मूर्ति या चित्र पर पुष्प से जल छिड़क कर उन्हें प्रतीकात्मक स्नान कराएं और साफ वस्त्र से पोंछ दें।

वस्त्र: हनुमान जी को सुंदर लाल वस्त्र या कलावा (मौली) अर्पित करें।

चोला अर्पण: उन्हें सिंदूर, अक्षत (चावल), चंदन और चमेली का तेल मिलाकर लेप लगाएं। यह चोला चढ़ाना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

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आवाहन एवं पूजन

दीप-धूप: शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और सुगंधित अगरबत्ती या धूप जलाएं।

आवाहन: हाथ जोड़कर हनुमान जी का ध्यान करें और उन्हें अपनी पूजा में पधारने का आग्रह करें।

पुष्प वर्षा: हनुमान जी को फूलों की माला पहनाएं और उनके चरणों में ताजे लाल फूल (विशेषकर गेंदा या गुलाब) अर्पित करें।

पंचदेव पूजन: हनुमान जी के साथ-साथ स्थापित कलश और पंचदेवों का भी गंध-पुष्प से पूजन करें।

नैवेद्य और भोग

पंचामृत: सबसे पहले पंचामृत अर्पित करें।

मुख्य भोग: हनुमान जी का मनपसंद नैवेद्य जैसे- बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू या शुद्ध घी का चूरमा अर्पित करें।

विशेष: भोग में तुलसी दल (पत्ता) अवश्य रखें, क्योंकि इसके बिना वे भोग स्वीकार नहीं करते।

पाठ और स्तुति

आसन पर बैठकर पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें। यदि समय कम हो, तो संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ भी कर सकते हैं।

स्तुति मंत्र:

1- मनोजवं मारुततुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठ। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

2- अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

आरती और ध्वजा रोहण

आरती: कपूर या घी के दीपक से हनुमान जी की विधिवत आरती उतारें।

क्षमा प्रार्थना: पूजा में हुई किसी भी अनजानी भूल के लिए हाथ जोड़कर क्षमा मांगें।

ध्वजा रोहण: अंत में अपने घर की छत पर या मुख्य द्वार पर हनुमान जी की केसरिया ध्वजा (झंडा) फहराएं। यह घर की सुरक्षा और विजय का प्रतीक माना जाता है।

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4. हनुमान जी का प्रसाद और भोग

पंचामृत: सबसे पहले पंचामृत अर्पित करें।

प्रसाद: गुड़-चना, चना मिश्री या बेसन के लड्डू का प्रसाद रखें।

मुख्य भोग: हनुमान जी का मनपसंद भोग है- बूंदी या बेसन के लड्डू, इमरती या जलेबी, रोठ या शुद्ध घी का चूरमा अर्पित करें।

5. हनुमानजी की आरती

।।हनुमान आरती।।

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।

पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।

बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।

जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।

(समाप्त)

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