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Janmashtami Special: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर करें 8 मंत्रों का जाप, दूर होंगे जीवन के सारे संताप और संकट

Janmashtami Special: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर करें 8 मंत्रों का जाप, दूर होंगे जीवन के सारे संताप और संकट

04 सितंबर 2026 शुक्रवार के दिन भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन मंदिरों में उनकी विशेष पूजा होती है और रात्रि की 12 बजे उत्सव मनाया जाता है। इस दिन यदि आप के जीवन में किसी भी प्रकार का संकट हो, आर्थिक समस्या हो, कर्ज हो, संतान सुख नहीं हो, गृह कलेश हो रहा हो तो निम्नलिखित 8 मंत्रों में से आपकी समस्या के अनुसार किसी एक मंत्र का चयन करके उसका जाप करें और जाप के आप अनुष्ठान पूर्ण करेंगे तो तुरंत ही समस्या का समाधान मिलेगा।

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भगवान श्रीकृष्ण के सिद्ध मंत्र एवं साधना की प्रामाणिक विधि

श्रीकृष्ण साधना जीवन के सभी कष्टों को हरकर सर्वसुख प्रदान करने वाली है। विभिन्न जीवन-समस्याओं के निवारण एवं मनोकामना पूर्ति के लिए शास्त्रों में अचूक कृष्ण-मंत्रों का विधान बताया गया है।

1. मनोकामना व समस्या-निवारण हेतु सिद्ध कृष्ण मंत्र

जीवन संकट व दिशाहीनता निवारण हेतु

मंत्र: श्री कृष्ण: शरणं मम्

फल: जीवन में समस्याओं का अंबार होने या कोई मार्ग न सूझने पर यह मंत्र अमोग आश्रय प्रदान करता है।

पारिवारिक शांति व स्वास्थ्य लाभ हेतु

मंत्र: क्लीं ऋषिकेशाय नम:

विधि: इस मंत्र का प्रतिदिन या विशेष अवसर पर 51 माला जप करें। इससे घर का तनाव और अशांति दूर होती है।

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आर्थिक समृद्धि व कर्ज मुक्ति हेतु

मंत्र: श्री गोपीजन वल्लभाय स्वाहा

फल: आर्थिक समस्याओं और धन के अभाव को दूर करने के लिए इस मंत्र का जप करें।

विवाह व गृहस्थ जीवन की समस्याओं हेतु

मंत्र: ॐ नमो भगवते रुक्मिणी वल्लभाय स्वाहा

फल: वैवाहिक बाधाओं को दूर कर दांपत्य जीवन में मधुरता लाता है।

संतान सुख एवं सर्वोत्कृष्ट संतान प्राप्ति हेतु

मंत्र: ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।

विशेष विधान: इस मंत्र जप के साथ लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें। उच्चारण के समय 'तनयं' शब्द का स्पष्ट और शुद्ध उच्चारण अत्यंत आवश्यक है।

धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष (चतुर्वर्ग) प्राप्ति हेतु

मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:

इष्ट सिद्धि हेतु

मंत्र: श्रीकृष्णाय नम:

सौभाग्य, सुख-शांति व मोक्ष वृद्धि हेतु

मंत्र: ॐ ऐं श्रीं क्लीं प्राणवल्लभाय सौ: सौभाग्यदाय श्रीकृष्णाय स्वाहा

2. मंत्र साधना के नियम एवं विशेष सावधानियां

जप का स्थान व समय: इन सिद्ध मंत्रों का मानसिक जप सदैव और किसी भी स्थान पर किया जा सकता है।

साधना सामग्री: जप के लिए तुलसी की माला और बैठने के लिए कुश के आसन का ही प्रयोग करें।

तिलक व वस्त्र: पूजन में चंदन का प्रयोग करें। स्वयं श्वेत या पीतांबर (पीले) वस्त्र धारण करें तथा गले में तुलसी की माला पहनें।

भोग व प्रसाद: प्रसाद के रूप में तुलसी-मिश्रित पंचामृत अर्पित करें और बाद में पंजीरी का प्रसाद वितरित करें।

आहार व दान: साधना काल में पूर्णतः सात्विक भोजन ग्रहण करें। साधना के पश्चात ब्राह्मण भोजन कराने से पूजा का फल द्विगुणित हो जाता है।

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