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क्या तिब्बत में आपदा के नुकसान को छिपा रहा है चीन?

क्या तिब्बत में आपदा के नुकसान को छिपा रहा है चीन?

निखिल रंजन

नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाके में जिस विनाशकारी बाढ़ से नेपाल में हजारों लोगों के मरने और लापता होने की खबर दे रहा वहीं तिब्बत में हुए इस आपदा से हुए नुकसान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं आ रही है।

भारत के धर्मशाला में रह रहे निर्वासित तिब्बती लोगों ने चीनपर आरोप लगाया है कि वह इस बारे में जानकारी छिपा रहा है। चीन ने इन आरोपों को, "दुर्भावना से छवि खराब करना और सनसनीखेज" बनाने की कोशिश कह कर खारिज किया है। नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

चीन इस ऊंचे पठारी इलाके को अपना अटूट हिस्सा मानता है और यहां अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का लंबे समय से विरोध करता आया है और इसे अपनी संप्रभुता को चुनौती के रूप में देखता है।

ऐसी खबरें आ रही हैं कि विदेशी पत्रकारों को तिब्बत से रिपोर्टिंग करने से रोका जा रहा है। चीनी अधिकारियों ने इलाके की खबरों की स्रोतों पर कड़ा पहरा बिठा रखा है।

चीन की सरकारी मीडिया ने खबर दी है कि तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया है कि सूचना का प्रवाह, "खुला, पारदर्शी और समय से" है।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने मंगलवार, 1 सितंबर को कहा कि आपात सेवा के कर्मचारी जिंदा बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं और एक प्रमुख हाइवे को दोबारा खोलने की कोशिश कर रहे हैं। सरकारी प्रसारक सीसीटीवी ने कीचड़ भरी उफनती नदी से मलबा हटाते मशीनों की तस्वीरें दिखाई हैं।

चीन के अधिकारियों ने 10 लोगों को ऑनलाइन गलत जानकारी देने के आरोप में सजा भी दी है। इन लोगों का कहना था कि लापता और मृत लोगों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों की तुलना में बहुत ज्यादा है। नेपाल आपदा के बाद भारत ने हिमालय पर निगरानी बढ़ाई

तिब्बत में टूटे घर

निर्वासित तिब्बती लोग सरकार के दावों को गलत बता रहे हैं। भारत से चलने वाले निर्वासित लोगों के तिब्बत रेडियो का कहना है कि उसने 25 लोगों के मरने की जानकारी जुटाई है। इनमें 15 लोग सीमावर्ती क्षेत्र के हैं और 10 लोग वहां कारोबार और काम के लिए आए थे।

भारत में रह रहे निर्वासित तिब्बतियों ने आपदा की मार सबसे ज्यादा झेलने वाले ग्यिरोंग इलाके में परिवारों से भी संपर्क किया था। इन लोगों के मुताबिक पांच गांव प्रभावित हुए हैं।

परिवारों की सुरक्षा को लेकर डर की वजह से इन लोगों ने नाम जाहिर नहीं करने को कहा है। इनका कहना है कि तिब्बत में लोगों के अंतिम संस्कार हो रहे हैं और कम से कम 24 लोगों की मौत हुई है।

निर्वासित तिब्बतियों के मुताबिक रिश्तेदारों ने उन्हें बताया कि वहां बड़ी संख्या में ल्हासा और शिगात्से के मजदूर प्रभावित इलाके में पुल बनाने की परियोजनाओं में काम कर रहे हैं। आपदा के बाद ये लोग कहां हैं इसकी जानकारी नहीं है।

कुछ अधिकार समूह भी चीन की बताई संख्या पर सवाल उठा रहे हैं। इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत के अध्यक्ष तेनचो ग्यात्सो ने चीन से, "नुकसान और मरने वालों की पूरी और पुष्ट जानकारी देने को कहा है।"

इस समूह का कहना है कि तिब्बत के अंदर उसके सूत्रों ने कम से कम चार गांवों पर आपदा की गंभीर मार पड़ने की जानकारी दी है, जिसमें "300 से ज्यादा घर तबाह हुए हैं और बड़ी संख्या निवासी अब तक लापता है।" समूह का कहना है कि सूत्रों ने उन्हें जानकारी दी है कि मरने वालों की तादाद "काफी ज्यादा है।"

ग्लेशियर के ढहने से नेपाल में बेहद ठंडे पानी और मलबे की जो बाढ़ आई उसकी चपेट में आकर अब कम से कम 939 लोगों की मौत हुई है। 4,500 से ज्यादा लोग लापता भी हैं। नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

तिब्बत में रहने वाले रिश्तेदारों पर खतरा

तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा ने भारत में कहा है कि वह पीड़ितों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, सात ही उन्होंने दूसरे मुद्दों के लिए चेतावनी भी दी है। दलाई लामा का कहना है, "इस इलाके में पहले भी कई आपदाएं आई हैं, निश्चित रूप से यह गहराई में छिपे कारणों का संकेत भर है, यह जलवायु परिवर्तन भी हो सकता है और दूसरे कारण भी।"

दलाई लामा महज 23 साल के थे जब वह तिब्बत की राजधानी ल्हासा से भाग कर भारत आ गए। 1959 में चीनी सैनिकों ने बलपूर्वक तिब्बत का विद्रोह कुचल दिया था। डर था कि वह दलाई लामा को भी मार देंगे इसलिए वह चुपके से वहां से निकल आए। वह कभी वापस नहीं गए। चीन दलाई लामा को विद्रोही और अलगाववादी मानता है।

न्यूयॉर्क में तिब्बत हाउस के बियेटा टिकोस ने कहा है कि चीन के संदेशों को लेकर "उलझन हो सकती है" और यह कोई हैरानी की बात नहीं है। टिकोस का आरोप है कि चीन तिब्बत में बांध बना रहा है और नदियों की दिशा बदल रहा है जो आपदा का मुख्य कारण भी हो सकता है। टिकोस ने यह भी कहा, "बहुत सारे दस्तावेज मौजूद हैं जो यह संकेत देते हैं कि बांध बनाने से ग्लेशियरों और पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना बढ़ जाता है, जो पहले से ही गर्म हो रहे हैं।"

ऑस्ट्रेलिया में 3,000 से ज्यादा तिब्बती लोग निर्वासन में रहते हैं। उन्हें तिब्बत में अपने परिजनों को लेकर चिंता हो रही है। ऑस्ट्रेलिया तिब्बत काउंसिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जो बेडफोर्ड का कहना है, "हमारा मानना है कि वे नुकसान के पैमाने को घटा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले तिब्बती जानते हैं कि वे अपने रिश्तेदारों को फोन कर यह नहीं पूछ सकतेः 'वहां क्या हो रहा है?' इससे उनके परिजनों का जीवन संकट में पड़ जाएगा।"

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