श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोदया॥
1. मां महागौरी का अर्थ
इस कठोर तपस्या के कारण इनका शरीर एकदम काला पड़ गया। इनकी तपस्या से प्रसन्न और संतुष्ट होकर जब भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगाजी के पवित्र जल से मलकर धोया तब वह विद्युत प्रभा के समान अत्यंत कांतिमान-गौर हो उठा। तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा।
2. मां महागौरी की पूजा विधि
तैयारी और संकल्प:
अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और सफेद रंग के वस्त्र धारण करें (सफेद रंग माँ को अत्यंत प्रिय है)। पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़क कर उसे पवित्र करें।
आचमन और ध्यान:
हाथ में जल लेकर आचमन करें और दीप प्रज्वलित करें। माँ महागौरी का ध्यान करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें:
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
पंचोपचार पूजन
अभिषेक: माँ की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं।
वस्त्र और श्रृंगार: माँ को सफेद या गुलाबी वस्त्र अर्पित करें। माँ को सफेद फूल (विशेषकर मोगरा या कुंद) और अक्षत चढ़ाएं।
धूप-दीप: धूप और घी का दीपक जलाकर माँ की आरती की तैयारी करें।
प्रिय रंग: सफेद और गुलाबी।
प्रिय पुष्प: मोगरा, चमेली या सफेद फूल।
प्रिय भोग: नारियल या नारियल से बनी मिठाई।
हाथ जोड़कर इस मंत्र का उच्चारण करें-
'सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥'
विशेष भोग (नैवेद्य):
माँ महागौरी को नारियल का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
कई भक्त इस दिन हलवा, पूरी और काले चने का भोग भी लगाते हैं, जिसे बाद में कन्या पूजन के लिए उपयोग किया जाता है।
कन्या पूजन (महाष्टमी का विशेष महत्व)
अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष विधान है। 2 से 10 वर्ष तक की नौ कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोएं, उन्हें भोजन (हलवा-पूरी) कराएं और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लें। इन्हें साक्षात माँ का स्वरूप माना जाता है।
देवी महागौरी के मंत्र-
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
प्रार्थना:
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
महागौरी स्तोत्र-
सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
महागौरी ध्यान मंत्र:-
वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥
पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्॥
महागौरी कवच :
ओंकारः पातु शीर्षो मां, हीं बीजं मां, हृदयो।
क्लीं बीजं सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाटं कर्णो हुं बीजं पातु महागौरी मां नेत्रं घ्राणो।
कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा मा सर्ववदनो॥
3. मां महागौरी की आरती-lyrics
।।माँ महागौरी की आरती।।
जय महागौरी जगत की माया।
जया उमा भवानी जय महामाया।।
हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहां निवासा।।
चंद्रकली और ममता अंबे।
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।
भीमा देवी विमला माता।
कौशिकी देवी जग विख्याता।।
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।
सती 'सत' हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।
तभी मां ने महागौरी नाम पाया।
शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।
शनिवार को तेरी पूजा जो करता।
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।।
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो।।
(समाप्त)
4. मां महागौरी व्रत की कथा
परम कृपालु मां महागौरी कठिन तपस्या कर गौरवर्ण को प्राप्त कर भगवती महागौरी के नाम से संपूर्ण विश्व में विख्यात हुईं। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान् शिव को पतिरूप में पाने के लिए इन्होंने हजारों सालों तक कठिन तपस्या की थी जिस कारण इनका रंग काला पड़ गया था परंतु बाद में भगवान शिव ने गंगा के जल से इनके वर्ण को फिर से गौर कर दिया और इनका नाम महागौरी विख्यात हुआ। अपने पार्वती रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति-रूप में प्राप्त करने के लिए बड़ी कठोर तपस्या की थी। इनकी प्रतिज्ञा थी कि 'व्रियेऽहं वरदं शम्भुं नान्यं देवं महेश्वरात्।' (नारद पांचरात्र)। गोस्वामी तुलसीदासजी के अनुसार भी इन्होंने भगवान शिव के वरण के लिए कठोर संकल्प लिया था-
जन्म कोटि लगि रगर हमारी।
बरऊं संभु न त रहऊं कुंआरी॥
5. माता महागौरी की चालीसा
॥ श्री महागौरी चालीसा ॥
मन मंदिर मेरे आन बसो, आरम्भ करूं गुणगान,
गौरी माँ मातेश्वरी, दो चरणों का ध्यान।
पूजन विधी न जानती, पर श्रद्धा है आपर,
प्रणाम मेरा स्विकारिये, हे माँ प्राण आधार।
नमो नमो हे गौरी माता, आप हो मेरी भाग्य विधाता,
शरनागत न कभी गभराता, गौरी उमा शंकरी माता।
आपका प्रिय है आदर पाता, जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,
महादेव गणपति संग आओ, मेरे सकल कलेश मिटाओ।
सार्थक हो जाए जग में जीना, सत्कर्मो से कभी हटु ना,
सकल मनोरथ पूर्ण कीजो, सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।
हे माँ भाग्य रेखा जगा दो, मन भावन सुयोग मिला दो,
मन को भाए वो वर चाहु, ससुराल पक्ष का स्नेहा मै पायु।
परम आराध्या आप हो मेरी, फ़िर क्यूं वर मे इतनी देरी,
हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो, थोडे में बरकत भर दीजियो।
अपनी दया बनाए रखना, भक्ति भाव जगाये रखना,
गौरी माता अनसन रहना, कभी न खोयूं मन का चैना।
देव मुनि सब शीश नवाते, सुख सुविधा को वर मै पाते,
श्रद्धा भाव जो ले कर आया, बिन मांगे भी सब कुछ पाया।
हर संकट से उसे उबारा, आगे बढ़ के दिया सहारा,
जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे, निराश मन मे आस जगावे।
शिव भी आपका काहा ना टाले, दया द्रष्टि हम पे डाले,
जो जन करता आपका ध्यान, जग मे पाए मान सम्मान।
सच्चे मन जो सुमिरन करती, उसके सुहाग की रक्षा करती,
दया द्रष्टि जब माँ डाले, भव सागर से पार उतारे।
जपे जो ओम नमः शिवाय, शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,
जिसपे आप दया दिखावे, दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।
सता गुन की हो दता आप, हर इक मन की ग्याता आप,
काटो हमरे सकल कलेश, निरोग रहे परिवार हमेश।
दुख संताप मिटा देना माँ, मेघ दया के बरसा देना माँ,
जबही आप मौज में आय, हठ जय माँ सब विपदाए।
जीसपे दयाल हो माता आप, उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,
फल-फूल मै दुग्ध चढ़ाऊ, श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।
अवगुन मेरे ढक देना माँ, ममता आँचल कर देना माँ,
कठिन नहीं कुछ आपको माता, जग ठुकराया दया को पाता।
बिन पाऊ न गुन माँ तेरे, नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,
जितने आपके पावन धाम, सब धामो को माँ प्राणम।
आपकी दया का है ना पार, तभी को पूजे कुल संसार,
निर्मल मन जो शरण मे आता, मुक्ति की वो युक्ति पाता।
संतोष धन्न से दामन भर दो, असम्भव को माँ सम्भव कर दो,
आपकी दया के भारे, सुखी बसे मेरा परिवार।
अपकी महिमा अती निराली, भक्तो के दुःख हरने वाली,
मनो कामना पुरन करती, मन की दुविधा पल मे हरती।
चालीसा जो भी पढे-सुनाया, सुयोग वर् वरदान मे पाए,
आशा पूर्ण कर देना माँ, सुमंगल साखी वर देना माँ।
गौरी माँ विनती करूँ, आना आपके द्वार,
ऐसी माँ कृपा किजिये, हो जाए उद्धहार।
हीं हीं हीं शरण मे, दो चरणों का ध्यान,
ऐसी माँ कृपा कीजिये, पाऊँ मान सम्मान।
॥इति श्री महागौरी चालीसा सम्पूर्ण॥
6. मां महागौरी की पूजा का लाभ
- महागौरी की पूजा करने से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
- समस्त पापों का नाश होता है।
- सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है और हर मनोकामना पूर्ण होती है।
- माँ महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं, इसलिए इनकी पूजा से राहु के दोष शांत होते हैं।
- घर में सुख-समृद्धि चाहते हैं, तो अष्टमी पर माँ को लाल चुनरी में सिक्के और बताशे रखकर अर्पित करें और बाद में इसे अपनी तिजोरी में रख दें।
- सौभाग्य प्राप्ति और सुहाग की मंगल कामना लेकर मां को चुनरी भेंट करने का भी इस दिन विशेष महत्व है।
- इस मंत्र के उच्चारण के पश्चात महागौरी देवी के विशेष मंत्रों का जाप करें और मां का ध्यान कर उनसे सुख, सौभाग्य हेतु प्रार्थना करें।
7. मां महागौरी पर पूछे जाने वाले प्रश्न-FAQs
1. माँ का नाम 'महागौरी' कैसे पड़ा?
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी, जिससे उनका शरीर काला पड़ गया था। जब शिव जी ने प्रसन्न होकर उन पर गंगाजल छिड़का, तो वे अत्यंत गौर वर्ण (गोरी) और कांतिमय हो गईं। इसी कारण उनका नाम महागौरी पड़ा।
2. माँ महागौरी का स्वरूप कैसा है?
माँ का स्वरूप पूर्णतः श्वेत और अत्यंत सौम्य है:
वर्ण: पूर्णतः गोरा (गौर)।
वस्त्र और आभूषण: श्वेत (सफेद)।
वाहन: वृषभ (बैल), इसीलिए इन्हें 'वृषारूढ़ा' भी कहा जाता है।
मुद्रा: इनके चार हाथ हैं। ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा में और नीचे वाले हाथ में त्रिशूल है। ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में है।
3. महागौरी की पूजा का आध्यात्मिक महत्व क्या है?
माँ महागौरी की उपासना से भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं और वे पवित्र हो जाते हैं। वे असंभव कार्य को भी संभव बनाने वाली देवी हैं। उनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां प्राप्त होती हैं और बुद्धि का विकास होता है।
4. अष्टमी के दिन 'कन्या पूजन' क्यों किया जाता है?
अष्टमी तिथि को कन्या पूजन का विशेष महत्व है क्योंकि छोटी कन्याओं को साक्षात माँ महागौरी का स्वरूप माना जाता है। 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को भोजन कराकर और उन्हें उपहार देकर भक्त देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इससे घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
5. माँ महागौरी को क्या भोग लगाना चाहिए?
माँ महागौरी को नारियल का भोग अत्यंत प्रिय है। अष्टमी के दिन नारियल चढ़ाने या नारियल से बनी मिठाइयों का भोग लगाने से माँ प्रसन्न होती हैं। इसके अलावा, कन्या पूजन में हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद भी बांटा जाता है।
6. पूजा के लिए कौन सा मंत्र सबसे प्रभावी है?
माँ की वंदना के लिए इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते॥
या बीज मंत्र:
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

