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नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

रीतिका

26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने नेपाल की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका दिया है। आर्थिक तौर पर नेपाल के सामने कमोबेश वैसी ही चुनौतियां फिर से खड़ी हो गई हैं जिनका सामना उसने 2015 में आए विनाशकारी भूकंपों के दौरान किया था।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक इस हफ्ते आई प्रलयकारी बाढ़ से उबरने के लिए नेपाल को 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत पड़ सकती है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने रॉयटर्स को यह जानकारी दी है और कहा है कि यह रकम देश की अर्थव्यवस्था के लगभग दसवें हिस्से के बराबर है। नेपाल आपदा के बाद भारत ने हिमालय पर निगरानी बढ़ाई

वागले ने कहा कि बाढ़ से हुए विनाश के बाद के पुनर्निमार्ण के लिए शुरुआती अनुमान 4-5 अरब डॉलर के बीच है। हालांकि, यह सिर्फ एक अनुमान है क्योंकि कुल नुकसान कितना हुआ है इस पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। साथ ही उन्होंने कहा कि नेपाल को 2015 के भूकंप के लिए जितनी जरूरत थी, उससे काफी कम की आवश्यकता होगी और फिलहाल कुल नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

वित्त मंत्री वागले ने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि पुनर्निर्माण का खर्च 2015 में आए भूकंप के बाद खर्च किए गए 9 अरब डॉलर से कम रहने की उम्मीद क्यों है। उस भूकंप में लगभग 9,000 लोग मारे गए थे, 5 लाख से अधिक घर नष्ट हो गए थे और नेपाल की अर्थव्यवस्था के लगभग एक तिहाई हिस्से के बराबर नुकसान हुआ था। बीते 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के कारण पत्थर, बर्फ, कीचड़ और मलबे का एक विशाल सैलाब हिमालय की पहाड़ी नदी त्रिशुली से होकर गुजरा। इस विनाशकारी सैलाब में नेपाल और चीन के तिब्बत में 600 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 2000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।

नेपाल को तकनीकी मदद की दरकार

लापता लोगों की तलाश में प्रभावित इलाके का खराब मौसम भी चुनौती बनकर उभरा है। नेपाल के शीर्ष अधिकारी नरेंद्र परियार ने रॉयटर्स को बताया कि खोज और बचाव कार्य अस्थायी रूप से रोक दिए गए हैं क्योंकि बारिश हो रही है और मौसम धुंधला है। वहीं, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि देश को खोज और बचाव अभियानों में मदद की जरूरत नहीं है, बल्कि सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, उन स्थानों पर परिवहन और संचार लाइनों को शुरू करने जहां पुल नष्ट हो गए थे, शवों की पहचान, डीएनए परीक्षण और शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में सहायता की जरूरत है। उन्होंने रॉयटर्स को बताया, "हमने ऐसे क्षेत्रों में विशेष सेवाओं और तकनीकी सहायता के लिए अनुरोध किया है जहां हमारे पास पर्याप्त विशेषज्ञता और तकनीकी जानकारी नहीं है।"

भारत ने नेपाल के लिए लगभग 60 टन राहत सामग्री ले जाने वाली तीन उड़ानें भेजी हैं, जिनमें कंबल, दवाएं, भोजन और पानी साफ करने वाली गोलियां शामिल हैं। इसके साथ ही भारत की योजना एक सुरंग बचाव दल और एक चिकित्सा दल भेजने की भी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने अपनी आपदा प्रतिक्रिया बल और पूर्वनिर्मित पुलों के साथ संपर्क बहाल करने में मदद के लिए तकनीकी टीमों की भी पेशकश की है। वहीं, चीन ने नेपाल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए आपातकालीन सहायता और अंतरराष्ट्रीय बचाव सहयोग का आह्वान किया है। हालांकि उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि चीन नेपाल को मदद के तौर पर क्या भेज रहा है। नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

अर्थव्यवस्था को फिर पीछे धकेला

बाढ़ ने सीमावर्ती इलाके के शहरों को तबाह कर दिया, पुलों और सड़कों को अपने साथ बहा ले गई और प्रमुख जलविद्युत स्टेशनों को नुकसान पहुंचाया है। पर्यटन और जलविद्युत पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए ये आपदा कई स्तरों पर विनाशकारी साबित हुई है। अब तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक इसने राष्ट्रीय बिजली उत्पादन क्षमता के 12 प्रतिशत से अधिक हिस्से वाले बिजली प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचाया है। इन योजनाओं में काम करने वाले 900 से ज्यादा कर्मचारी लापता बताए जा रहे हैं।

इस आपदा के आने से पहले से ही नेपाल की अर्थव्यवस्था दबाव में थी। जेन जी प्रदर्शनों के बाद सत्ता में आई प्रधानमंत्री बालेन शाहकी सरकार सीमित संसाधनों के साथ काम कर रही है। ऐसे में इस आपदा ने अर्थव्यवस्था पर कई गुना बोझ बढ़ा दिया है। इसके साथ ही पर्यटन पर निर्भर इस देश के लिए यह बाढ़ नुकसानदायक साबित हुई है क्योंकि इससे तीर्थ, ट्रेकिंग और पर्वतारोहण जैसी गतिविधियां ठप पड़ गई हैं। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक पर्यटन नेपाल की जीडीपी का 6.4 फीसदी हिस्सा है और देश की करीब 15 फीसदी नौकरियां यहीं से आती हैं।

अंतरराष्ट्रीय संस्था रेड क्रॉस ने कहा है कि इस बाढ़ से 93,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने बताया है कि इस आपदा ने 10,000 स्कूली बच्चों का भी नुकसान किया है क्योंकि प्रभावित इलाकों में कम से कम 18 स्कूल बह गए हैं और 20 स्कूलों की इमारतों को नुकसान पहुंचा है।

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