2012 में केकेआर की जीत के बाद मुंबई इंडियंस के खिलाफ हुए इस विवाद ने देश भर की मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। अब सालों बाद, तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) इकबाल शेख ने इस घटना को एक नए नजरिए से पेश किया है।
हाल ही में एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में, पूर्व एसीपी इकबाल शेख ने उस घटना को याद करते हुए बताया कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था। उनके अनुसार, यह कोई सोची-समझी घटना नहीं बल्कि एक 'गलतफहमी' थी जो धीरे-धीरे एक बड़े विवाद में बदल गई।
शेख ने कहा, मैच खत्म हो चुका था, स्टेडियम लगभग खाली था और फ्लडलाइट्स भी बंद होने लगी थीं। तभी शाहरुख खान और उनके साथ कुछ बच्चे एक कोने में खेल रहे थे। एक सुरक्षा गार्ड ने सीटी बजाई, जिससे शाहरुख नाराज हो गए। इसके बाद शाहरुख और सुरक्षा गार्ड के बीच कुछ कहासुनी हुई और मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अधिकारी भी इसमें शामिल हो गए।
मामला इतना बढ़ गया कि वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण होने लगा था। देखते ही देखते स्टेडियम का माहौल बिगड़ गया था और स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस ने मोर्चा संभाला। स्थिति को और बिगड़ने से बचाने के लिए, पूर्व एसीपी ने शाहरुख खान को तुरंत स्टेडियम से बाहर जाने के लिए कहा ताकि विवाद और आगे न बढ़े।
इस घटना के समय शाहरुख खान ने अपने बचाव में कहा था कि उन्होंने केवल तब प्रतिक्रिया दी, जब वहां मौजूद बच्चों के साथ सुरक्षाकर्मियों ने कथित तौर पर गलत व्यवहार किया और उन्हें धकेला। बाद में, एक टीवी शो में शाहरुख खान ने इस पूरे प्रकरण पर खुलकर बात की थी।
शाहरुख ने बताया था कि मैं बहुत गुस्से में था, क्योंकि मेरे बच्चे वहां थे। मैंने बस यही कहा था कि ये हमारे बच्चे हैं और हम इन्हें ले जा रहे हैं। तभी वहां एक व्यक्ति ने कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जो दिल्ली के रहने वाले होने के नाते मुझे अपशब्द लगे। यह एक धार्मिक टिप्पणी भी थी। इसके बाद मैंने अपना आपा खो दिया और मैं उसे मारने के लिए आगे बढ़ा।
5 साल का बैन और माफी
वानखेड़े स्टेडियम में हुई इस झड़प के बाद, मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने शाहरुख खान पर 5 साल का प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके तहत वे स्टेडियम में प्रवेश नहीं कर सकते थे। हालांकि, बाद में उनके और एमसीए के रिश्ते सुधरे और इस बैन को 3 साल बाद ही हटा लिया गया था।

