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ट्रंप की टैरिफ नीति से बिगड़े समीकरण, भारत, चीन और रूस के गठबंधन से बढ़ेगी अमेरिका की टेंशन

ट्रंप की टैरिफ नीति से बिगड़े समीकरण, भारत, चीन और रूस के गठबंधन से बढ़ेगी अमेरिका की टेंशन

India-China-Russia relations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक 'टैरिफ नीति' ने दुनिया भर में आर्थिक खलबली मची हुई है। मित्र देशों पर लगाए गए भारी-भरकम टैक्स के कारण अब भारत, चीन और रूस एकजुट होकर अमेरिका के प्रभाव से अलग एक नया आर्थिक फ्रंट तैयार करने में जुट गए हैं।
इस नई भू-राजनीतिक धुरी से वाशिंगटन में बेचैनी बढ़ गई है।

डोनाल्ड ट्रंप ने 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' के वादे के साथ दोबारा सत्ता संभालते ही वैश्विक स्तर पर आक्रामक टैरिफ वॉर की शुरुआत कर दी। लेकिन अपने मित्र राष्ट्रों पर भी अतिरिक्त टैक्स थपने का यह फैसला अब अमेरिका पर ही भारी पड़ता दिख रहा है। ट्रंप की इस आर्थिक नीति ने भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे उभरते देशों के हितों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। परिणाम स्वरूप, वाशिंगटन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत, चीन और रूस की अगुआई में एक नया इकोनॉमिक फ्रंट आकार लेने लगा है। शहबाज शरीफ के सामने गरजे पीएम मोदी, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे, जड़ से खत्म करना होगा इकोसिस्टम

क्या अमेरिका के खिलाफ खड़ा हो रहा है नया मोर्चा

दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले दो देश- भारत और चीन जब एक साथ व्यापारिक और आर्थिक तालमेल बढ़ाते हैं, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था का रुख बदलने की क्षमता रखता है। दोनों देशों के विशाल उपभोक्ता बाजार पर दुनिया भर की नजरें हैं। ट्रंप के मनमाने टैक्स रवैये ने भारत जैसे विश्वसनीय मित्र को भी अपनी व्यापारिक प्राथमिकताओं पर फिर से सोचने को मजबूर कर दिया है। भारत अब द्विपक्षीय संबंधों को नए आयाम देकर अपनी अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने में जुटा है।

अमेरिका ने पाकिस्तान को साधा, पर हाथ से फिसला भारत

व्हाइट हाउस में दोबारा प्रवेश के बाद ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मेहमाननवाजी की थी। हालांकि, अमेरिकी राजनीति के इन पैंतरों के जवाब में एशिया के शक्ति समीकरण तेजी से बदल गए। ट्रंप के टैरिफ वॉर के दबाव के चलते भारत और इस्लामाबाद का सदाबहार दोस्त माने जाने वाला चीन अब करीब आ रहे हैं। पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत की बड़ी आर्थिक छलांग: जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही, RBI का अनुमान पीछे छूटा

वहीं दूसरी ओर, भारत और रूस की दशकों पुरानी ऐतिहासिक और सैन्य रणनीतिक साझेदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत है। भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI (Su-30MKI) फाइटर जेट-जिन्होंने पाकिस्तान पर ब्रह्मोस मिसाइल दागकर अपनी ताकत दिखाई थी-उसी रूसी रक्षा प्रौद्योगिकी की पहचान हैं।

ब्रिक्स समिट में भारत की धमक

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव और वैश्विक कद ने पाकिस्तान को पहले ही असहज कर रखा है। अब भारत की मेजबानी में होने जा रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक ही मंच पर साथ नजर आएंगे। अमेरिका की नीतियों को दरकिनार कर इन तीन बड़ी ताकतों का एक साथ आना ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका साबित हो सकता है।

क्या अमेरिका से दूर हो रहा है भारत?

हालांकि ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि भारत अमेरिका से दूर हो रहा है, लेकिन वह अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत कर रहा है। दरअसल, भारत किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपनी जरूरतों के हिसाब से संबंधों को संतुलित करता है। यदि अमेरिका व्यापारिक प्रतिबंध या कठोर टैरिफ लगाता है, तो भारत अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए रूस और चीन के साथ व्यापारिक सहयोग बढ़ाने से पीछे नहीं हटता।

भारत और अमेरिका के संबंध रक्षा, तकनीक और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र की सुरक्षा में आज भी महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, वाशिंगटन की नीतियां जब भारत के व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं, तो नई दिल्ली अपने विकल्पों का विस्तार करती है। भारत यह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि अमेरिका के साथ रिश्ते पारस्परिक सम्मान और लाभ पर आधारित होने चाहिए, न कि एकतरफा दबाव या व्यापारिक पाबंदियों पर।

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