पहले दिन ही अधिकारियों ने खुद मिसाल पेश की
इस फैसले के पहले सोमवार को ही कैंपस में इसका व्यापक असर देखने को मिला और वाहनों की आवाजाही न के बराबर हो गई। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर खुद इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर सवार होकर हेड ऑफिस पहुंचे और अपने सेक्रेटरी के साथ टू-व्हीलर पूलिंग करके एक आदर्श उदाहरण पेश किया। दूसरी ओर, रजिस्ट्रार कृष्णराजसिंह चूडासमा भी पर्यावरण के समर्थन में वाहन के बजाय पैदल चलकर यूनिवर्सिटी आए।
वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने का अनुरोध
यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा सभी प्राध्यापकों, गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और छात्रों से सोमवार के दिन अपने निजी वाहनों को घर पर छोड़कर आने की अपील की गई है। वाहनों के बदले साइकिल, सार्वजनिक परिवहन (बस-ऑटो), कारपूलिंग या पैदल यात्रा को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है। इस अभियान का क्रियान्वयन हर स्तर पर व्यापक हो, इसके लिए यूनिवर्सिटी की सभी फैकल्टी के डीन को भी कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
लाखों रुपए के ईंधन की बचत और पर्यावरण जागरूकता
एमएस यूनिवर्सिटी में वर्तमान में 50 हजार से अधिक छात्र पढ़ाई करते हैं और हजारों की संख्या में स्टाफ कार्यरत है। अधिकारियों के अनुसार, यदि सभी लोग इस सोमवार के अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें, तो हर हफ्ते लाखों रुपए का पेट्रोल-डीजल बचाया जा सकेगा और प्रदूषण में भारी कमी आएगी। वाइस चांसलर ने आगे कहा कि यह पहल केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करने का एक बड़ा प्रयास है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala

