1. सत्तू का विशेष महत्व (मुख्य कारण)
वैशाख मास में गर्मी अपने चरम पर पहुंचने लगती है। आयुर्वेद और परंपरा के अनुसार, इस समय शरीर को ठंडा रखने वाले आहार की आवश्यकता होती है। 'सातुवाई' शब्द 'सत्तू' से बना है। इस दिन सत्तू (जौ, चना या गेहूं का भुना हुआ आटा) खाना और दान करना अनिवार्य माना गया है।
2. ऋतु परिवर्तन और स्वास्थ्य
वैशाख की चिलचिलाती धूप में सत्तू एक 'सुपरफूड' की तरह काम करता है। यह पेट को ठंडा रखता है और लू (Loo) से बचाता है। इस दिन सत्तू का भोग भगवान विष्णु को लगाया जाता है और फिर सत्तू का शरबत या लड्डू प्रसाद के रूप में ग्रहण किए जाते हैं।
सतुवाई अमावस्या की पौराणिक कथा और महत्व
3. दान की परंपरा
सातुवाई अमावस्या पर 'सतुआ दान' का विशेष महत्व है। लोग ब्राह्मणों और गरीबों को मिट्टी के घड़े, सत्तू, गुड़ और पंखे दान करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया सत्तू का दान अक्षय पुण्य देता है और पितरों की आत्मा को तृप्ति प्रदान करता है।
4. पितृ तर्पण और पवित्र स्नान
अन्य अमावस्याओं की तरह, सातुवाई अमावस्या पर भी पितृ तर्पण किया जाता है। चूंकि यह वैशाख का महीना है, इसलिए गंगा स्नान या किसी पवित्र नदी में स्नान करने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
Satuvai Amavasya 2026: सतुवाई अमावस्या 2026 कब है, जानें मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
संक्षेप में:
इसे सातुवाई अमावस्या इसलिए कहते हैं क्योंकि इस दिन सत्तू का उपभोग और दान इस पर्व की मुख्य पहचान है। यह पर्व धर्म को स्वास्थ्य और प्रकृति के साथ जोड़ने का एक सुंदर उदाहरण है।

