असली TMC के दावे से कोलकाता से दिल्ली तक हड़कंप; दलबदल कानून से बचने का ऋतब्रत गुट ने निकाला विधिक रास्ता, ममता बोलीं- दिल्ली की साजिश
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) में लगी बगावत की आग अब बुझने का नाम नहीं ले रही है।
निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीप सिंह (संदीपन साहा) की अगुवाई में कुल 59 बागी विधायकों ने विधानसभा पहुंचकर खुद को 'असली तृणमूल कांग्रेस' घोषित करने का विधिक दांव चल दिया है। इस टूट ने न सिर्फ बंगाल बल्कि देश के सियासी विन्यास को हिलाकर रख दिया है, क्योंकि बागी गुट के पास दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) को निष्प्रभावी करने के लिए जरूरी दो-तिहाई (2/3) से ज्यादा का बहुमत मौजूद है।
विधानसभा परिसर से आ रही ताजा खबरों के मुताबिक, बागी गुट ने पूरी रणनीति को बेहद गोपनीय और विधिक तरीके से अंजाम दिया है:
दलबदल कानून बेअसर: बंगाल विधानसभा में इस बार टीएमसी के कुल 80 विधायक जीतकर आए थे। विधिक नियमानुसार, पार्टी तोड़ने और सदस्यता बचाने के लिए दो-तिहाई यानी कम से कम 54 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता थी। ऋतब्रत बनर्जी 59 विधायकों के दस्तखत वाला समर्थन पत्र लेकर पहुंचे हैं, जो कुल संख्या का लगभग 74% है।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गुस्सा: बागी गुट के विधायकों का कहना है कि वे ममता बनर्जी का सम्मान करते हैं, लेकिन चुनाव में हार के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के काम करने के तरीके और मनमाने विन्यास से वे आहत थे। विधायकों ने आरोप लगाया कि 6 मई की बैठक में बिना चर्चा किए सीनियर विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने के लिए कई विधायकों के फर्जी दस्तखत (Forged Signatures) कराए गए, जिसके खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई।असली TMC के दावे से कोलकाता से दिल्ली तक हड़कंप; दलबदल कानून से बचने का ऋतब्रत गुट ने निकाला विधिक रास्ता, ममता बोलीं- दिल्ली की साजिश
इस महा-विद्रोह के बाद कोलकाता में चल रहे धरने से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा:
"दिल्ली में बैठे आकाओं ने धनबल और एजेंसियों के दम पर तृणमूल कांग्रेस को टुकड़ों में तोड़ने की विधिक साजिश रची है। लेकिन बंगाल की जनता यह तमाशा देख रही है। कुछ लोग सिर्फ इसलिए पाला बदल रहे हैं क्योंकि हम इस बार सरकार में नहीं हैं। लेकिन याद रखिए, ममता बनर्जी ही तृणमूल कांग्रेस है, इसके अलावा बाकी सब एक मजाक है। हम आखिरी सांस तक इस बुलडोजर राजनीति के खिलाफ लड़ेंगे।"

