चंपत राय समेत 3 शीर्ष पदाधिकारियों की संपत्ति की जांच, SIT ने बैंक कर्मियों से की 8 घंटे पूछताछ
अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब देश के सबसे बड़े वित्तीय और प्रशासनिक घोटाले की जांच में बदलती जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच का दायरा बेहद व्यापक कर दिया है।
शुक्रवार को एसआईटी (SIT) ने रामजन्मभूमि परिसर में लगातार आठ घंटे तक गहन पड़ताल की। इस दौरान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत शीर्ष पदाधिकारियों की संपत्तियों के विवरण का परीक्षण किया गया और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए।
जांच के सबसे बड़े घटनाक्रम में अब ट्रस्ट के शीर्ष चेहरे भी एसआईटी के रडार पर आ गए हैं। एसआईटी ने जांच के दौरान निम्नलिखित प्रमुख व्यक्तियों के संपत्ति विवरणों (Property Details) और वित्तीय लेनदेन का बारीकी से परीक्षण किया है:
- चंपत राय (महासचिव, राम मंदिर ट्रस्ट)
- डॉ. अनिल मिश्र (ट्रस्टी)
- गोपाल राव (व्यवस्थापक)
इसके साथ ही, ट्रस्ट के नाम पर पिछले कुछ समय में हुई भूमि खरीद (Land Deals) और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन का भी गहराई से सत्यापन किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावे की नकदी की गिनती में बड़ी हेराफेरी की आशंका है। इसी सिलसिले में एसआईटी ने:
एसबीआई (SBI) कर्मियों से पूछताछ: मंदिर के चढ़ावे की नकदी गिनने की प्रक्रिया में शामिल स्टेट बैंक के कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ की गई। जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि क्या नकदी संभालते समय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का उल्लंघन किया गया था।
व्हीलचेयर राइडर्स बने 'कैरियर': जांच की आंच अब दर्शन व्यवस्था से जुड़े निचले कर्मचारियों तक पहुंच गई है। व्हीलचेयर सेवा से जुड़े तीन राइडर और दर्शन सेल के सुरक्षाकर्मी एसआईटी के निशाने पर हैं। आरोप है कि इनमें से एक राइडर ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ल से वाहन खरीदने के लिए ₹2 लाख लिए थे। आशंका है कि ये लोग नकदी को बाहर भेजने के लिए 'कैरियर' (लॉजिस्टिक मददगार) के रूप में काम कर रहे थे।
एसआईटी ने राम मंदिर के पुराने आंतरिक ऑडिट रिकॉर्ड्स (Internal Audit Records) की भी बारीकी से जांच की है। इस दौरान मिली कुछ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के चलते कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एसआईटी ने अपने कब्जे में ले लिया है। इसके अलावा, मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों के रखरखाव से जुड़े ट्रस्ट के कर्मचारियों से भी तीखे सवाल-जवाब किए गए हैं। चंपत राय समेत 3 शीर्ष पदाधिकारियों की संपत्ति की जांच, SIT ने बैंक कर्मियों से की 8 घंटे पूछताछ
15 जुलाई तक बढ़ी समयसीमा: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने एसआईटी को जांच पूरी करने के लिए 15 जुलाई 2026 तक का समय दिया है। समयसीमा बढ़ने के बाद जांच एजेंसियों ने अयोध्या में संदिग्धों की बेनामी संपत्तियों का पता लगाना भी शुरू कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

