कटनी/बहोरीबंद: मध्य प्रदेश में पड़ रही कड़ाके की गर्मी और लगातार नीचे गिरते भू-जल स्तर (Groundwater Level) के बीच कटनी जिले के बहोरीबंद विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम सिंदूरसी से एक बेहद राहत भरी खबर है।
गांव के मुख्य नलकूपों (Tube Wells) में पानी की क्षमता घटने के बावजूद, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) और स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयासों से ग्रामीणों को नियमित और सुचारु रूप से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रशासन ने योजना के पूरी तरह ठप होने का इंतजार किए बिना समय रहते वैकल्पिक जल स्रोतों को मुख्य सप्लाई लाइन से जोड़ दिया है, जिससे गांव में पानी के लिए हाहाकार नहीं मचा।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के कार्यपालन यंत्री श्री पवनसुत गुप्ता ने बताया कि सिंदूरसी गांव में ग्रामीणों को पानी देने के लिए 'मुख्यमंत्री ग्राम नलजल योजना' संचालित है।
योजना का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर: इस योजना के तहत गांव में दो मुख्य नलकूप, 100 किलोलीटर क्षमता की विशाल उच्चस्तरीय पानी की टंकी, 20 किलोलीटर का सम्पवेल और 337 घरेलू नल कनेक्शन का काम साल 2020 से पहले ही पूरा करके ग्राम पंचायत को सौंप दिया गया था।
बदली रणनीति: इस साल भीषण गर्मी के कारण योजना के मूल सरकारी नलकूपों में पानी की आवक (Water Capacity) काफी कम हो गई। ग्रामीणों को प्यासा रहने से बचाने के लिए विभाग ने तुरंत एक निजी नलकूप (Private Tube Well) को अनुबंधित कर उसे सीधे सम्पवेल और मुख्य पानी की टंकी से जोड़ दिया।
एक दिन छोड़कर मिल रहा पानी: इस नई वैकल्पिक व्यवस्था के कामयाब होने से अब पूरे सिंदूरसी गांव में एक दिन के अंतराल (Alternate Days) पर नियमित और पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
नल-जल योजना के अलावा, गांव में पानी के पारंपरिक और अन्य विकल्पों को भी पूरी तरह एक्टिव (सक्रिय) रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में पानी की कमी न हो:
चालू हालत में हैंडपंप: गांव में कुल 12 सरकारी हैंडपंप स्थापित हैं, जिनमें से 11 हैंडपंप वर्तमान में पूरी तरह सुचारु रूप से चालू हैं और पानी दे रहे हैं।
सिंगल फेस पंप: इसके अतिरिक्त, गांव के अलग-अलग मोहल्लों में 5 सिंगल फेस पंपों को भी चालू रखा गया है, जहां से ग्रामीण अपनी जरूरत का पानी आसानी से भर रहे हैं।
प्रशासन और पीएचई विभाग की इस त्वरित सक्रियता की वजह से सिंदूरसी में जल संकट की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बनी हुई है और ग्रामीणों को भीषण धूप में पानी के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है।

