मेनका गांधी और उनकी बहन की रिट अपील खारिज: भोपाल की 522 एकड़ पुश्तैनी जमीन विवाद पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
जबलपुर: भोपाल स्थित करोड़ों रुपये की 522 एकड़ पुश्तैनी जमीन को लेकर वरिष्ठ राजनेता मेनका गांधी और उनकी बहन अंबिका शुक्ला के बीच वर्षों से चली आ रही कानूनी लड़ाई पर जबलपुर हाई कोर्ट ने विराम लगा दिया है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ (Division Bench) ने दोनों बहनों की रिट अपील को निरस्त कर दिया है। इस फैसले के साथ ही विवादित संपत्ति का वी. एम. सिंह (V.M. Singh) के नाम नामांतरण (Mutation) कराने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है।
भोपाल के बहेटा, बोरबन और लाऊखेड़ी क्षेत्र की लगभग 522 एकड़ बहुमूल्य भूमि से जुड़ा यह पारिवारिक विवाद दशकों पुराना है:
विवाद की शुरुआत (1975): इस जमीनी विवाद की शुरुआत वर्ष 1975 में दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक विभाजन वाद (Partition Suit) से हुई थी।
समझौता डिक्री (1993): बाद में परिवार के सदस्यों के बीच सहमति बनी और 25 अगस्त, 1993 को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक समझौता डिक्री (Compromise Decree) पारित की।
सुप्रीम कोर्ट की मोहर (2005): इस डिक्री को चुनौती दी गई थी, लेकिन वर्ष 2005 में देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने समझौता डिक्री को बरकरार रखा था। मेनका गांधी और उनकी बहन की रिट अपील खारिज: भोपाल की 522 एकड़ पुश्तैनी जमीन विवाद पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट के 2005 के फैसले के बावजूद भोपाल स्थित इस संपत्ति के राजस्व अभिलेखों (Revenue Records) में नाम दर्ज कराने और नामांतरण को लेकर विवाद थम नहीं रहा था। मेनका गांधी और अंबिका शुक्ला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की डबल बेंच ने रिट अपील खारिज कर दी, जिससे अब राजस्व रिकॉर्ड में वीएम सिंह के नाम संपत्ति दर्ज करने की कानूनी बाधाएं दूर हो गई हैं।

