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NEET-UG Paper Leak Case: 'UPSC से कुछ तो सबक लो.' NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट की NTA को भारी फटकार; कहा- युवाओं को निराश नहीं कर सकते

NEET-UG Paper Leak Case: 'UPSC से कुछ तो सबक लो.' NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट की NTA को भारी फटकार; कहा- युवाओं को निराश नहीं कर सकते

Yash Bharat 1 week ago

ई दिल्ली: नीट-यूजी (NEET-UG) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई। देश की सर्वोच्च अदालत ने परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के ढीले रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उसे जमकर फटकार लगाई।

सुप्रीम कोर्ट ने देश की सर्वोच्च सिविल सेवा परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि UPSC प्रणाली में कभी ऐसी बड़ी गड़बड़ियां नहीं देखी गईं, NTA को उनकी कार्यप्रणाली से सबक लेने की सख्त जरूरत है।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, "हम अपने देश के युवाओं को इस तरह निराश नहीं कर सकते। यह उनके लिए बेहद दुखद और मानसिक रूप से तोड़ने वाला है, क्योंकि छात्रों ने इस परीक्षा की तैयारी में अपना सालों का कीमती समय और भावनाएं लगाई हैं।"

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के प्रमुख और निगरानी समिति के सदस्य डॉ. राधाकृष्णन से बेहद कड़े सवाल किए:

  • निगरानी में कहाँ हुई चूक?: कोर्ट ने पूछा कि जब देश में पहले से ही एक मजबूत निगरानी तंत्र और इतनी सारी निगरानी समितियां मौजूद थीं, तो उनके होते हुए भी इतनी बड़ी परीक्षा का पेपर कैसे लीक हो गया?

  • कार्यान्वयन पर सवाल: अदालत ने डॉ. राधाकृष्णन से स्पष्ट करने को कहा कि समिति द्वारा पहले सुझाए गए सुरक्षा उपायों का जमीन पर वास्तव में कितना क्रियान्वयन (Implementation) और मॉनिटरिंग की गई थी? समिति से ऐसी कौन सी बातें छूट गईं, जिसका फायदा उठाकर लीक करने वाले कामयाब हो गए?

सुनवाई के दौरान परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और 'लीक-प्रूफ' बनाने के लिए कोर्ट और सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता के बीच कई अहम सुझावों पर चर्चा हुई:

  • एक्सपर्ट्स और विश्वविद्यालयों का सहयोग: कोर्ट ने सुझाव दिया कि प्रश्नपत्रों की छपाई और वितरण जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के लिए एक छोटी निगरानी समिति बनाई जाए, जो देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम करे।

  • IIT और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल: सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कुछ आधुनिक सुझाव देश के IIT संस्थानों से लिए जा सकते हैं। इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि पद्धतियां और तकनीक लगातार बदल रही हैं, ऐसे में AI (Artificial Intelligence) के सही इस्तेमाल के लिए किसी बड़े तकनीकी विश्वविद्यालय के साथ पूर्णकालिक समन्वय (Coordination) स्थापित किया जाना चाहिए।

अदालत ने एनटीए (NTA) के महानिदेशक और उच्चाधिकार समिति के प्रमुख डॉ. राधाकृष्णन द्वारा दाखिल किए गए हलफनामों (Affidavits) को रिकॉर्ड पर ले लिया है। अब इस मामले में केंद्र सरकार को अपना अंतिम रुख साफ करना है:

  • शिक्षा मंत्रालय दाखिल करेगा हलफनामा: सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (पूर्व में मानव संसाधन विकास मंत्रालय) को कोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दायर करना होगा। इसमें यह बताना होगा कि भविष्य में परीक्षाओं का आयोजन और समापन किस फुल-प्रूफ प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

  • संसाधनों की समीक्षा: कोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि NTA के पास आने वाली परीक्षाओं (चाहे वह 2024 के लंबित मामले हों या 2026 की वर्तमान परीक्षाएं) को पूरी तरह पारदर्शी ढंग से आयोजित करने के लिए भौतिक (Physical) और बौद्धिक (Intellectual) संसाधन मौजूद हैं या नहीं।

  • 2 जुलाई तक की डेडलाइन: केंद्र सरकार को यह शपथ पत्र 2 जुलाई से पहले हर हाल में दाखिल करना होगा। इस दौरान कोर्ट को अवगत कराया गया कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े इस बड़े मामले की निगरानी स्वयं माननीय प्रधानमंत्री भी कर रहे हैं।

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