मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा सालाना रिपोर्ट ने देश के बैंकिंग सेक्टर की सुरक्षा और लोन सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक धोखाधड़ी (Bank Fraud) के मामलों में शामिल रकम में 46 फीसदी का भारी-भरकम उछाल दर्ज किया गया है।
बैंकों में होने वाले घोटालों की रकम बढ़कर अब 48,021 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है, जो कि पिछले वित्त वर्ष में 32,803 करोड़ रुपये थी।
हालांकि, इस रिपोर्ट में एक राहत की बात यह भी है कि कुल फ्रॉड के मामलों की संख्या में भारी कमी आई है। यानी छोटे-मोटे फ्रॉड कम हुए हैं, लेकिन बड़े कॉर्पोरेट लोन घोटालों ने बैंकों की तिजोरी को भारी नुकसान पहुंचाया है।
आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि सिस्टम में बड़े मूल्य (High-Value Fraud) के फ्रॉड तेजी से बढ़े हैं:
केस घटे, नुकसान बढ़ा: वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 10,114 धोखाधड़ी के मामले सामने आए, जबकि इससे पिछले साल यह संख्या 23,722 थी। मामलों की संख्या आधी से भी कम होने के बावजूद डूबी हुई रकम का $46\%$ बढ़ जाना यह दिखाता है कि बड़े स्तर पर सेंधमारी हुई है।
सरकारी बैंकों को सबसे बड़ी चपत: सरकारी (Public Sector) बैंकों में फ्रॉड की रकम पिछले साल के 23,617 करोड़ रुपये से बढ़कर 35,709 करोड़ रुपये हो गई। वहीं, निजी (Private) बैंकों में भी यह आंकड़ा 8,927 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,399 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
बैंकिंग विशेषज्ञों के मुताबिक, बैंकों के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती एडवांस/लोन कैटेगरी (Loan Fraud) बनी हुई है:
फर्जी दस्तावेजों का खेल: कुल धोखाधड़ी में से 40,774 करोड़ रुपये की चपत अकेले बैंक लोन के जरिए लगाई गई है। बड़े कॉर्पोरेट और रसूखदार लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे लोन लेकर रफूचक्कर हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद री-ओपनिंग: आरबीआई ने साफ किया कि इस साल के आंकड़ों में 30,199 करोड़ रुपये के 314 पुराने मामले भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के 27 मार्च 2023 के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद इन पुराने मामलों की दोबारा जांच की गई, जिसके बाद इन्हें इस साल की रिपोर्ट में जोड़ा गया।
जहां एक तरफ बड़े घोटालों ने चिंता बढ़ाई है, वहीं देश के आम डिजिटल ग्राहकों के लिए एक बेहद शानदार और राहत देने वाली खबर है:
डिजिटल फ्रॉड में भारी गिरावट: आरबीआई की सख्त मॉनिटरिंग और कड़े सुरक्षा उपायों की वजह से कार्ड और डिजिटल पेमेंट फ्रॉड में अभूतपूर्व गिरावट आई है। यह रकम 517 करोड़ रुपये से घटकर सिर्फ 29 करोड़ रुपये रह गई है। फ्रॉड के केस भी 13,332 से घटकर महज 293 रह गए हैं।
क्या है 'किल स्विच' (Kill Switch System)? डिजिटल बैंकिंग को अचूक बनाने के लिए आरबीआई जल्द ही 'किल स्विच' सुविधा लॉन्च करने जा रहा है। इसके तहत अगर किसी ग्राहक को अपने खाते में किसी साइबर धोखे का शक होता है, तो वह एक सिंगल क्लिक के जरिए अपने खाते के सभी ट्रांजैक्शन (लेनदेन) तुरंत ब्लॉक कर सकेगा।
दुनिया में पहला देश बना भारत: साइबर सुरक्षा को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने के लिए आरबीआई ने बैंकों के लिए .bank.in नाम का एक सुपर-सिक्योर डोमेन शुरू किया है। भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने ऑनलाइन फ्रॉड रोकने के लिए ऐसा कड़ा और सुरक्षित कदम उठाया है।

