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CIBIL, CRIF या Experian: बैंक कौन सा स्कोर चेक करता है? लोन लेने से पहले जानें सच्चाई और कंफ्यूजन करें दूर

CIBIL, CRIF या Experian: बैंक कौन सा स्कोर चेक करता है? लोन लेने से पहले जानें सच्चाई और कंफ्यूजन करें दूर

Zee Business Hindi 5 months ago

जकल हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए लोग बैंक लोन लेते हैं-घर खरीदने से लेकर कार, पढ़ाई, बिजनेस या फिर क्रेडिट कार्ड तक.लेकिन लोन पास होने से पहले बैंक सबसे पहले जिस चीज को जांचता है, वह है आपका क्रेडिट स्कोर.असल में समस्या यह है कि भारत में कई क्रेडिट ब्यूरो हैं CIBIL, CRIF Highmark, Experian और Equifax और अक्सर लोगों को समझ नहीं आता कि बैंक किसे ज्यादा महत्व देता है और किस रिपोर्ट को देखकर फैसला लेता हैय

तो अब हम सरल भाषा में समझेंगे कि बैंक आपकी कौन-सी रिपोर्ट चेक करता है, स्कोर में अंतर क्यों होता है, और लोन लेने से पहले आपको किन बातों पर ध्यान देना चाहिए.

1. भारत में चार क्रेडिट ब्यूरो - कौन-कौन से हैं?

RBI ने भारत में चार क्रेडिट ब्यूरो को मंजूरी दे रखी है:

CIBIL (TransUnion CIBIL)

CRIF Highmark

Experian

Equifax

ये चारों ब्यूरो आपके बैंकिंग और क्रेडिट व्यवहार के आधार पर क्रेडिट स्कोर तैयार करते हैं.जी हां हर ब्यूरो का डेटा बैंक और NBFC से आता है, लेकिन सभी जगह डेटा अपडेट का तरीका और समय अलग होता है.तो इसलिए स्कोर में अंतर दिख सकता है.

2. बैंक किस क्रेडिट ब्यूरो की रिपोर्ट देखता है?

सबसे महत्वपूर्ण बात है कि बैंक किसी एक रिपोर्ट पर निर्भर नहीं करते हैं.हर बैंक के अपने सिस्टम और टाई-अप होते हैं.कुछ बैंक प्राइमरी रूप से CIBIL का उपयोग करते हैं. जबकि कई बैंक CRIF Highmark या Experian के साथ जुड़े होते हैं.लेकिनकुछ बैंक एक से ज्यादा ब्यूरो की रिपोर्ट देखते हैं.हालांकि एक चीज कॉमन है,तो अगर किसी ब्यूरो में आपका स्कोर बहुत खराब है, तो बाकी रिपोर्ट अच्छी होने पर भी बैंक सतर्क हो जाता है.

3. स्कोर अलग-अलग क्यों होते हैं?

लोग सोचते हैं कि उनका CIBIL स्कोर 780 है, लेकिन Experian 735 दिखाता है-क्यों? इसका कारण यह है कि:

  • सभी ब्यूरो का डेटा अपडेट टाइम अलग होता है
  • कुछ बैंक हर ब्यूरो को रिपोर्ट नहीं भेजते
  • एरर या मिसमैच डेटा की वजह से भी स्कोर बदल जाता है
  • कर्ज चुकाने की तारीखें अलग जगहों पर अलग तरीके से दर्ज होती हैं
  • इसी कारण से NPA, बाउंस, ओवरड्यू या सेटेलमेंट जैसी जानकारी हर जगह एक जैसी नहीं दिखती.

4. बैंक स्कोर के अलावा और क्या-क्या देखता है?

केवल क्रेडिट स्कोर ही लोन पास नहीं करवाता

बैंक इन 5 बातों की भी गहराई से जांच करता है:

  • रीपेमेंट हिस्ट्री - EMI कभी लेट हुई या नहीं
  • क्रेडिट मिक्स - पर्सनल लोन ज्यादा? या सिक्योर्ड लोन भी हैं?
  • क्रेडिट यूटिलाइजेशन - क्रेडिट कार्ड लिमिट का कितना यूज किया?
  • इनक्वायरी की संख्या - क्या आपने बहुत सारे लोन अप्लाई किए?
  • लोन की कुल देनदारी - इनकम के मुकाबले कर्ज कितना है?

इन सब फैक्टर से तय होता है कि आप "लो रिस्क" हैं या "हाई रिस्क"

5. लोन लेते समय कौन-सा स्कोर 'अच्छा' माना जाता है?

भारत में आमतौर पर स्कोर की रेंज 300-900 होती है

बैंक के अनुसार स्कोर का स्तर:

  • 750-900 → सबसे बेस्ट (High Approval Chances)
  • 700-749 → अच्छा (Approval Possible)
  • 650-699 → औसत (High Risk Category)
  • 600 से नीचे → लोन मिलना मुश्किल

कई बैंक 720+ स्कोर पर ही कम ब्याज दर देते हैं.

6. क्या कम स्कोर होने पर लोन बिल्कुल नहीं मिलता?

कुछ NBFC और FinTech कंपनियां कम स्कोर पर भी लोन देती हैं, लेकिन:ब्याज दर बहुत ज्यादा होती है और प्रोसेसिंग फीस भी बढ़ जाती है.इसके अलावा लोन अमाउंट कम मिलता है.तो इसलिए बेहतर है कि स्कोर सुधारकर ही लोन लिया जाए.

7. स्कोर कैसे सुधारा जा सकता है?

लोन लेने से पहले ये 5 कदम जरूर अपनाएं:

  • सभी EMI समय पर चुकाएं
  • क्रेडिट कार्ड का उपयोग 30% से कम रखें
  • ओवरड्यू या सेटेलमेंट से बचें
  • पुरानी क्रेडिट हिस्ट्री को मेंटेन रखें
  • अनावश्यक इनक्वायरी से बचें
  • 6-9 महीने में स्कोर मजबूत दिखने लगता है

निष्कर्ष: CIBIL हो या CRIF या Experian-लगातार बेहतर व्यवहार ही पास करता है लोन

हर बैंक अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग क्रेडिट ब्यूरो की रिपोर्ट चेक करता है, लेकिन एक बात साफ है है कि अगर आपकी रीपेमेंट हिस्ट्री अच्छी है, तो हर रिपोर्ट में आपका स्कोर मजबूत होगा.लोन लेने से पहले सिर्फ स्कोर नहीं, बल्कि अपनी पूरी क्रेडिट प्रोफाइल की जांच करना जरूरी है,तो एक मजबूत स्कोर न केवल लोन आसानी से दिलाता है, बल्कि ब्याज भी कम कराता है.(नोट खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अधिक जानकारी के लिए बैंक से संपर्क करें)

5 FAQs

1. बैंक किस क्रेडिट ब्यूरो की रिपोर्ट सबसे ज्यादा देखते हैं?
हर बैंक का सिस्टम अलग होता है। कुछ CIBIL को प्राथमिकता देते हैं, जबकि कई बैंक CRIF या Experian की रिपोर्ट चेक करते हैं।.कई बैंक एक से ज्यादा ब्यूरो की रिपोर्ट भी देखते हैं.

2. अलग-अलग ब्यूरो में मेरा स्कोर अलग क्यों दिखता है?
डेटा अपडेट का समय अलग होने, बैंक द्वारा सभी ब्यूरो को डेटा न भेजने और रिपोर्टिंग मिसमैच के कारण क्रेडिट स्कोर अलग-अलग दिख सकता है.

3. लोन पास होने के लिए कितना क्रेडिट स्कोर अच्छा माना जाता है?
750+ स्कोर को उत्कृष्ट माना जाता है और सबसे ज्यादा लोन अप्रूवल इसी रेंज में होते हैं। 700-749 अच्छा माना जाता है, जबकि 650 से नीचे स्कोर पर लोन मिलना मुश्किल होता है.

4. क्या कम क्रेडिट स्कोर पर भी लोन मिल सकता है?
हाँ, कुछ NBFC या फिनटेक कंपनियां कम स्कोर पर भी लोन देती हैं, लेकिन ब्याज दर ज्यादा और लोन अमाउंट कम मिलता है.

5. क्रेडिट स्कोर सुधारने का सबसे आसान तरीका क्या है?
EMI समय पर चुकाएं, क्रेडिट कार्ड उपयोग 30% से कम रखें, ओवरड्यू/सेटलमेंट से बचें और अनावश्यक लोन अप्लाई न करें. 6-9 महीनों में स्कोर बेहतर दिखने लगता है.

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