भारत और ओमान के बीच हुआ Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) अब 1 जून 2026 से लागू हो गया है.इसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है.
असल में सरकार का कहना है कि यह समझौता व्यापार, निवेश, रोजगार और प्रोफेशनल अवसरों को नई रफ्तार देगा.
इस समझौते के तहत भारत के 99.38% निर्यात को ओमान में ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी.यानी भारतीय उत्पाद अब बिना आयात शुल्क या बेहद कम चार्ज के साथ ओमान के बाजार में पहुंच सकेंगे. इससे भारतीय कंपनियों को कीमत के मोर्चे पर बड़ा फायदा मिलेगा और वे अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी.
भारत और ओमान के बीच यह समझौता 18 दिसंबर 2025 को मस्कट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद की मौजूदगी में साइन हुआ था.दोनों देशों की आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे अब लागू कर दिया गया है.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने क्या है कहा?
बता दें कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता किसानों, मछुआरों, युवाओं, महिलाओं, उद्यमियों और MSME सेक्टर के लिए नए अवसर लेकर आएगा.उनके मुताबिक ओमान भारत का भरोसेमंद साझेदार है और यह समझौता भारत को खाड़ी देशों और पूर्वी अफ्रीका के बाजारों से और मजबूती से जोड़ने का काम करेगा.
इन सेक्टरों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
CEPA लागू होने के बाद कृषि, समुद्री उत्पाद, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, फुटवियर और ऑटोमोबाइल सेक्टर के निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है.सरकार का मानना है कि इससे रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा.
किसानों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित
असल में भारत ने व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों का भी ध्यान रखा है.इसलिए डेयरी उत्पाद, अनाज, फल-सब्जियां, खाद्य तेल, तिलहन, रबर, चमड़ा और मसालों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को बाजार पहुंच से बाहर रखा गया है.
भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए खुलेंगे नए रास्ते
ओमान ने 127 सर्विस सब-सेक्टर्स में बाजार पहुंच देने की पेशकश की है.इससे भारतीय इंजीनियरों, डॉक्टरों, आईटी प्रोफेशनल्स, शिक्षकों और कंसल्टेंट्स को नए अवसर मिल सकते हैं.बिजनेस विजिटर्स के लिए 90 दिन तक और स्वतंत्र पेशेवरों के लिए 180 दिन तक रहने की सुविधा भी दी गई है.
फार्मा कंपनियों को मिलेगा बड़ा फायदा
जी हां भारतीय दवा कंपनियों के लिए भी यह समझौता अहम साबित हो सकता है.USFDA, EMA, UK MHRA और TGA से मंजूर दवाओं को ओमान में तेजी से मार्केटिंग मंजूरी मिलने का रास्ता तैयार किया गया है.इससे भारतीय फार्मा कंपनियों को खाड़ी क्षेत्र में कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी.
GCC और पूर्वी अफ्रीका तक आसान पहुंच
ओमान के सोहार, दुक्म और सलालाह जैसे प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब भारतीय निर्यातकों को न सिर्फ ओमान बल्कि पूरे GCC क्षेत्र और पूर्वी अफ्रीका के बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करेंगे.यही वजह है कि इस समझौते को भारत के लिए एक नए ट्रेड कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है.
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 11.18 अरब डॉलर तक पहुंच गया था.सरकार को उम्मीद है कि CEPA लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ेगा तथा दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी.

