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ईरान-अमेरिका पर सिर्फ एक खबर आई और गिर गया सोना! एक्सपर्ट से जानिए क्या अभी और भी घटेंगे दाम?

ईरान-अमेरिका पर सिर्फ एक खबर आई और गिर गया सोना! एक्सपर्ट से जानिए क्या अभी और भी घटेंगे दाम?

Zee Business Hindi 1 month ago

दुनिया भर के निवेशकों के लिए 'सुरक्षित ठिकाना' माना जाने वाला सोना (Gold) इन दिनों खुद मुश्किलों से घिरा नजर आ रहा है. अगर आप सोच रहे थे कि युद्ध के माहौल में सोना आसमान छुएगा, तो बाजार के ताजा आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है.

सोमवार को ग्लोबल मार्केट में सोना 4,700 डॉलर प्रति औंस के नीचे ट्रेड करता दिखा. इसकी सबसे बड़ी वजह है अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों के बीच होने वाली एक संभावित डील.

खबरें हैं कि मिडिल ईस्ट में 45 दिनों के लिए सीजफायर यानी युद्धविराम हो सकता है. जैसे ही यह खबर बाजार में फैली, सोने की मांग कम होने लगी. लोग अब सोने को छोड़कर अन्य संपत्तियों की तरफ देख रहे हैं. पिछले कुछ समय में सोने की कीमतों में करीब 12% की गिरावट आई है. आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर सोने के साथ यह खेल हो क्यों रहा है.

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भारतीय बाजार में क्या है Gold की कीमत?

MCX पर सोना ₹1,50,811 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है. आज के कारोबार के दौरान सोना ₹1,48,298 के निचले स्तर से लेकर ₹1,51,390 के ऊपरी स्तर तक गया. अगर अब तक के रिकॉर्ड स्तर की बात करें तो सोने का लो ₹1,02,685 और हाई ₹2,02,984 रहा है. ये भाव 5 जून 2026 की एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट के लिए है.

युद्धविराम और घटती डिमांड का गणित

केडिया एडवाइजरी के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट अमित गुप्ता ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि जब भी दुनिया में तनाव कम होता है, सोने की चमक कम होने लगती है. लोग सोने को तब खरीदते हैं जब उन्हें डर लगता है, लेकिन सीजफायर की खबरों ने उस डर को कम कर दिया है.

  • सेफ हेवन डिमांड में कमी: युद्ध की आशंका कम होने से निवेशकों ने सोने से पैसा निकालना शुरू कर दिया है.
  • एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले: हालांकि तनाव कम हुआ है, लेकिन ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है.
  • कीमतों में बड़ी गिरावट: युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक सोने के दाम करीब 12% तक टूट चुके हैं.

महंगाई और ब्याज दरों का डबल अटैक

सोने के गिरने की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी हैं. तेल महंगा होने से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है. जब महंगाई बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला लेते हैं.

ब्याज दरों का असर: अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो लोग सोने के बजाय बैंक एफडी या बॉन्ड्स में पैसा लगाना बेहतर समझते हैं क्योंकि वहां से फिक्स रिटर्न मिलता है.

लिक्विडेशन का दबाव: कई निवेशकों को दूसरे बिजनेस या एसेट्स में घाटा हो रहा है, जिसकी भरपाई के लिए वे अपना सोना बेच रहे हैं. इसे बाजार की भाषा में 'फोर्स्ड लिक्विडेशन' कहते हैं.

तेल का खेल: कच्चे तेल की कीमतों में करीब 75% की तेजी आई है, जो सोने के लिए लंबी अवधि में तो अच्छा है लेकिन फिलहाल दबाव बना रही है.

ये भी पढ़ें: सोना-चांदी खरीदना होगा महंगा? सरकार ने आयात पर कसी नकेल, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर

Gold को लेकर चार्ट पर क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स?

एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के रविंदर कुमार का मानना है कि सोना अभी 'बेयरिश' यानी मंदी के दौर में है. उन्होंने निवेशकों के लिए कुछ जरूरी लेवल बताए हैं जिन्हें समझना बहुत जरूरी है.

पैरामीटरलेवल (डॉलर प्रति औंस)क्या होगा असर?
क्रुशियल सपोर्ट4,280 डॉलरअगर यहां से गिरा तो बड़ी मंदी आएगी
रेजिस्टेंस लेवल4,800 डॉलरइसके ऊपर जाने पर ही तेजी दिखेगी
अगला बड़ा टारगेट5,100 डॉलर4,800 का लेवल टूटने के बाद की राह

संस्थानों की बेरुखी: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के डेटा के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों ने इस बार सिर्फ 19 टन सोना खरीदा, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 26 टन था.

रुपये की चाल: भारतीय बाजार (MCX) पर रुपये की मजबूती की वजह से सोने के दाम नीचे आ रहे हैं.

भारत और चीन का सहारा: अच्छी बात यह है कि भारत और चीन में अभी भी सोने की फिजिकल डिमांड काफी मजबूत बनी हुई है.

ये भी पढ़ें: गोल्ड फंड्स की सुनामी में बही बड़ी-बड़ी इक्विटी कैटेगरी! 10 साल की रेस में सिर्फ एक 'छोटा शेर' ही निकला सोने से आगे

पहली बार युद्ध में भी गिर रहा सोना

आमतौर पर देखा जाता है कि जब भी दुनिया के किसी कोने में युद्ध छिड़ता है, तो निवेशक डर के मारे सोने की तरफ भागते हैं और कीमतें आसमान छूने लगती हैं. लेकिन इस बार बाजार का मिजाज बिल्कुल अलग और हैरान करने वाला है. आंकड़ों पर गौर करें तो कॉमेक्स (COMEX) मार्केट में सोना 5,600 डॉलर प्रति औंस के अपने ऊंचे स्तर से फिसलकर अब 4,100 डॉलर के करीब आ गया है.

इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण काम कर रहे हैं. पहला यह कि बड़े निवेशकों ने अब गोल्ड ईटीएफ (ETF) से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया है और वे अपना पैसा बाहर निकाल रहे हैं. दूसरा बड़ा दबाव उन केंद्रीय बैंकों की तरफ से आया है, जिन्होंने अपने गोल्ड रिजर्व का कुछ हिस्सा खुले बाजार में बेच दिया है.

इसकी वजह से बाजार में सोने की सप्लाई बढ़ गई और कीमतों पर भारी दबाव बना. दिनेश सोमानी का मानना है कि जब तक बाजार में कोई नया और सकारात्मक ट्रिगर नहीं आता, तब तक सोने का भाव एक दायरे में ही कैद रहेगा. आने वाले समय में सोना 4,100 डॉलर से लेकर 4,970 डॉलर के बीच ही झूलता हुआ नजर आ सकता है.

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