अगर आप केंद्रीय कर्मचारी हैं और परिवार के साथ दुबई, थाईलैंड, सिंगापुर या यूरोप घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. अब विदेश यात्रा को लेकर सिर्फ छुट्टी मंजूर होना काफी नहीं होगा.
सरकार ने साफ कर दिया है कि विदेश जाने से पहले तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है और आवेदन भी समय रहते देना होगा.
हाल ही में जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि कई कर्मचारी विदेश यात्रा की अनुमति के लिए आखिरी समय में आवेदन भेज रहे थे, जिससे जांच, क्लियरेंस और अनुमोदन प्रक्रिया में दिक्कत आ रही थी. इसी वजह से अब स्पष्ट व्यवस्था लागू की गई है कि विदेश यात्रा के लिए आवेदन प्रस्तावित यात्रा की तारीख से कम से कम 21 दिन पहले जमा करना होगा.
आखिर सरकार को दोबारा नियम याद दिलाने की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक कई कर्मचारी विदेश यात्रा से महज 4-5 दिन पहले अनुमति के लिए आवेदन भेज रहे थे. इससे प्रशासन के सामने कई समस्याएं खड़ी हो रही थीं.
- दस्तावेजों की जांच का समय नहीं मिल रहा था.
- जरूरी क्लियरेंस लेने में दिक्कत हो रही थी.
- अगर आवेदन में कोई कमी हो तो उसे सुधारने का समय नहीं बचता था.
- सक्षम प्राधिकारी के निर्णय की सूचना समय पर नहीं पहुंच पाती थी.
इसी कारण कर्मचारियों को पहले से आवेदन देने के निर्देश दोबारा जारी किए गए हैं.
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सिर्फ छुट्टी मंजूर है, तो क्या विदेश जा सकते हैं?
यहीं सबसे बड़ी गलतफहमी होती है. कई कर्मचारियों को लगता है कि अगर उनकी Earned Leave या Casual Leave मंजूर हो गई तो वे विदेश जा सकते हैं. लेकिन सरकारी नियम इसके आगे की प्रक्रिया भी तय करते हैं.
विदेश यात्रा चाहे निजी हो या किसी अन्य उद्देश्य से, कई मामलों में सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति जरूरी होती है. DoPT ने पहले भी स्पष्ट किया था कि बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय छोड़कर विदेश जाना गंभीर मामला माना जा सकता है और उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है.


अब क्या करना होगा?
विदेश जाने की योजना बनाते समय कर्मचारी को निर्धारित प्रोफॉर्मा भरकर आवेदन देना होगा.
आवेदन में मांगी जाने वाली प्रमुख जानकारी
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| कर्मचारी का नाम | पूरा नाम |
| पद | वर्तमान पदनाम |
| विभाग/मंत्रालय | संबंधित कार्यालय |
| पासपोर्ट नंबर | वैध पासपोर्ट विवरण |
| यात्रा अवधि | कब से कब तक |
| कौन-कौन से देश जाएंगे | सभी देशों का विवरण |
| यात्रा का उद्देश्य | पर्यटन, पारिवारिक या अन्य |
| खर्च कितना होगा | अनुमानित व्यय |
| पैसा कहां से आएगा | फंड का स्रोत |
पिछले चार साल का रिकॉर्ड भी देना होगा
नए आवेदन के साथ कर्मचारी को यह भी बताना होगा कि उसने पिछले चार वर्षों में किन-किन देशों की यात्रा की है.
इसके लिए अलग कॉलम दिया गया है जिसमें:
- यात्रा की अवधि
- देश का नाम
- यात्रा का उद्देश्य
लिखना होगा.
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21 दिन पहले आवेदन क्यों जरूरी?
मान लीजिए आपने जुलाई में विदेश यात्रा की योजना बनाई है.
अगर आपकी फ्लाइट 25 जुलाई की है तो आपको कम से कम 4 जुलाई तक आवेदन जमा कर देना चाहिए.
सरकार का कहना है कि इससे:
- प्रशासन को जांच का पर्याप्त समय मिलेगा
- सुरक्षा और सतर्कता संबंधी मंजूरियां ली जा सकेंगी
- आवेदन में कमी होने पर सुधार किया जा सकेगा
- अंतिम आदेश समय पर जारी हो सकेगा
विदेश जाने से पहले यह Undertaking भी देनी होगी
नियमों के तहत कर्मचारी को एक लिखित Undertaking भी देनी होगी.
इसमें उसे कुछ महत्वपूर्ण बातें स्वीकार करनी होंगी.
कर्मचारी को लिखकर देना होगा कि:
- विदेश में रहते हुए किसी भी तरह की सरकार विरोधी गतिविधि में शामिल नहीं होगा.
- स्वीकृत छुट्टी अवधि समाप्त होने के बाद विदेश में नहीं रुकेगा.
- विदेश में रहते हुए भी उस पर सरकारी कर्मचारी आचरण नियम लागू रहेंगे.
- सरकारी दस्तावेज, गोपनीय जानकारी या आधिकारिक सूचनाओं के नियमों का पालन करेगा.
- नियमों का उल्लंघन भारत में हो या विदेश में, दोनों स्थिति में कार्रवाई हो सकती है.
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विदेश में रहते हुए भी लागू रहेंगे सेवा नियम
कई कर्मचारियों को लगता है कि विदेश पहुंचने के बाद सरकारी सेवा नियम लागू नहीं होते. लेकिन Undertaking में साफ लिखा गया है कि कर्मचारी विदेश में रहने के दौरान भी Government Servants Conduct Rules के दायरे में रहेगा.
यानी:
- सरकारी गोपनीय जानकारी साझा नहीं कर सकता.
- सरकार की आलोचना से जुड़े नियम लागू रहेंगे.
- प्रेस या मीडिया से जुड़े नियमों का पालन करना होगा.
बिना अनुमति गए तो क्या हो सकता है?
यह इस आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. DoPT ने पहले ही स्पष्ट कर रखा है कि विदेश यात्रा के लिए पूर्व अनुमति न लेना गंभीर मामला माना जाएगा. ऐसी स्थिति में कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जा सकती है. इसलिए इसे सिर्फ औपचारिकता समझने की गलती नहीं करनी चाहिए.
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कर्मचारियों के लिए सबसे जरूरी सलाह
गर्मी की छुट्टियों और त्योहारों के मौसम में बड़ी संख्या में कर्मचारी विदेश यात्रा की योजना बनाते हैं. ऐसे में सबसे पहले टिकट बुक करने की बजाय अपने विभाग के नियम देखना ज्यादा समझदारी होगी. अगर विदेश जाने का कार्यक्रम तय हो गया है तो अंतिम समय का इंतजार न करें. आवेदन, दस्तावेज और Undertaking पहले से तैयार रखें. इससे मंजूरी में देरी और बाद की परेशानी से बचा जा सकता है.
सीधी भाषा में कहें तो अब केंद्रीय कर्मचारियों के लिए विदेश यात्रा का नियम बिल्कुल साफ है- पहले अनुमति, फिर यात्रा. यही तरीका भविष्य की किसी भी प्रशासनिक परेशानी से बचा सकता है.

