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SSY vs MF: बेटी के फ्यूचर के लिए कहां बनेगा 'असली पैसा'? क्या कहता है अब तक का ट्रैक रिकॉर्ड? देखें कैलकुलेशन

SSY vs MF: बेटी के फ्यूचर के लिए कहां बनेगा 'असली पैसा'? क्या कहता है अब तक का ट्रैक रिकॉर्ड? देखें कैलकुलेशन

Zee Business Hindi 1 month ago

ब घर में नन्ही परी के कदम पड़ते हैं, तो खुशियों के साथ-साथ एक जिम्मेदारी का अहसास भी जुड़ जाता है. हर पिता चाहता है कि जब उसकी बेटी बड़ी हो, तो उसे अपनी पढ़ाई या शादी के लिए किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े.

आज के दौर में ₹50 लाख की रकम बड़ी लग सकती है, लेकिन 18-21 साल बाद की महंगाई को देखें तो यह एक बुनियादी जरूरत होगी.

निवेश की दुनिया में दो रास्ते सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं. पहला है सुरक्षित रास्ता यानी सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), जिसे सरकार का पूरा समर्थन प्राप्त है. दूसरा है थोड़ा रिस्की, लेकिन ज्यादा रिटर्न वाला रास्ता यानी म्यूचुअल फंड (Mutual Funds), जिसमें आप SIP कर सकते हैं. जहां सुकन्या में आपको मानसिक शांति मिलती है कि पैसा डूबेगा नहीं, वहीं म्यूचुअल फंड में आपको 'कंपाउंडिंग' (चक्रवृद्धि ब्याज) की वह ताकत मिलती है जो आपके पैसे को कई गुना बढ़ा सकती है. आज हम इन दोनों का ऐसा एनालिसिस करेंगे कि आप खुद तय कर पाएंगे कि आपकी बेटी के लिए 'असली पैसा' कहां बनेगा.

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सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): सुरक्षित और टैक्स-फ्री रास्ता!

भारत सरकार ने 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत इस योजना को शुरू किया था. अप्रैल-जून 2026 की तिमाही के लिए इसकी ब्याज दर 8.2% तय की गई है, जो पीपीएफ (PPF) जैसे अन्य विकल्पों से कहीं बेहतर है. SSY की खास बातें जो आपको जाननी चाहिए:

खाता कब खुलता है: बेटी के जन्म से लेकर 10 साल की उम्र होने तक.

निवेश की अवधि: आपको खाता खोलने की तारीख से 15 साल तक पैसे जमा करने होते हैं.

मैच्योरिटी: खाता 21 साल बाद मैच्योर होता है, भले ही आपकी बेटी की उम्र तब कुछ भी हो.

टैक्स का फायदा:

  • पुरानी टैक्स व्यवस्था में जमा राशि पर ₹1.5 लाख तक की छूट (80C), जबकि नई टैक्स व्यवस्था में ये छूट नहीं मिलती.
  • सालाना मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री.
  • मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम टैक्स-फ्री.

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₹50 लाख का फंड कैसे बनेगा?

अगर आप अपनी बेटी के जन्म के तुरंत बाद निवेश शुरू करते हैं और ब्याज दर 8.2% के आसपास बनी रहती है:

सालाना निवेश: ₹1,00,000 (करीब ₹8,333 महीना)

15 साल में कुल जमा: ₹15,00,000

21 साल बाद कुल फंड: लगभग ₹47 लाख से ₹50 लाख

ध्यान दें: सुकन्या समृद्धि योजना में आप अधिकतम ₹1.5 लाख सालाना जमा कर सकते हैं. अगर आप इसे बढ़ाकर ₹1.3-1.4 लाख सालाना (करीब ₹11,000 महीना) कर देते हैं, तो आपकी बेटी के 18 साल के होने तक ही ₹50 लाख का फंड तैयार हो सकता है.

म्यूचुअल फंड (SIP): जोखिम.. लेकिन बड़ा रिटर्न

म्यूचुअल फंड में निवेश का मतलब है कि आप अपनी बेटी के नाम पर बाजार की हिस्सेदारी खरीद रहे हैं. पिछले 10-15 सालों का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो अच्छे 'इक्विटी म्यूचुअल फंड' ने औसतन 12% से 15% तक का रिटर्न दिया है.

म्यूचुअल फंड के फायदे और रिस्क

ज्यादा रिटर्न: जहां सुकन्या 8.2% पर रुकी है, म्यूचुअल फंड 15% तक जा सकता है.

लचीलापन: इसमें 15 साल की कोई पाबंदी नहीं है. आप जब चाहें पैसा निकाल सकते हैं या निवेश बढ़ा सकते हैं.

टैक्स: म्यूचुअल फंड में ₹1.25 लाख से ज्यादा के मुनाफे पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स देना पड़ता है (SSY में यह जीरो है).

जोखिम: बाजार गिरने पर आपका फंड कम हो सकता है, लेकिन 15-20 साल के लंबे समय में जोखिम बहुत कम हो जाता है.

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₹50 लाख का फंड कैसे बनेगा?

अगर हम 12% का औसत रिटर्न भी मानकर चलें:

महीने की SIP: ₹5,000

20 साल तक निवेश: ₹12,00,000 कुल जमा

20 साल बाद कुल फंड: लगभग ₹50 लाख

फर्क देखिए: सुकन्या में ₹50 लाख के लिए आपको ₹8,333 महीना देना पड़ रहा था, जबकि म्यूचुअल फंड में (अगर 12% ही रिटर्न मिले) तो सिर्फ ₹5000 महीने की SIP से भी यह लक्ष्य हासिल हो सकता है. हालांकि, इस पर टैक्स भी लगेगा.

कितना टैक्स लगेगा?

20 साल बाद जब आप अपने 50 लाख रुपये निकालेंगे तो वह आपका लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा, जिस पर आपको 1.25 लाख से ऊपर के गेन पर टैक्स देना होगा. वहीं आपने कुल 12 लाख रुपये जमा किए हैं, इस पर भी कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा. हालांकि, टैक्स स्लैब के हिसाब से हो सकता है कि आपने पहले ही टैक्स चुकाने के बाद बचे पैसों से निवेश किया हो. अब 50 लाख में से 1.25+12 लाख लाख घटा दें तो बचता है 36.5 लाख रुपये. इस पर आपको 12.5 फीसदी का टैक्स देना होगा यानी करीब 4.5 लाख रुपये का टैक्स लगेगा. तो इस तरह आपका 50 लाख का कॉर्पस, असल में 45.5 लाख रुपये का बचेगा.

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अगर म्यूचुअल फंड में सुकन्या जितना करें निवेश

अगर म्यूचुअल फंड में भी हर महीने 8333 रुपये का निवेश करें तो 20 साल में आपका फंड करीब 76.5 लाख रुपये का हो जाएगा. इसमें से 1.25 लाख रुपये का रिलीफ हटा दें तो 75 लाख रुपये बचता है. आपका कुल निवेश करीब 20 लाख रुपये का होगा, यानी 55 लाख रुपये पर आपको 12.5 फीसदी का टैक्स चुकाना होगा, जो करीब 7 लाख रुपये बनता है. तो आपका असल कॉर्पस करीब 75-7=68 लाख रुपये का बनेगा.

SSY बनाम म्यूचुअल फंड: एक तुलना भी देख लीजिए

फीचरसुकन्या समृद्धि (SSY)म्यूचुअल फंड (SIP)
रिटर्न (ब्याज)8.2% (गारंटीड)12% - 15% (बाजार आधारित)
सुरक्षाबहुत अधिक (सरकारी भरोसा)मध्यम से अधिक (बाजार जोखिम)
टैक्स लाभपूरी तरह टैक्स फ्री (EEE)*मुनाफे पर टैक्स लगेगा
निवेश की अवधिफिक्स 15 साल जमा, 21 साल लॉक-इनजब तक आप चाहें
₹50 लाख के लिए निवेश₹8,333 / महीना₹4,500 - ₹5,000 / महीना (20 साल के लिए)

*पुरानी टैक्स व्यवस्था में जमा राशि पर ₹1.5 लाख तक की छूट (80C), जबकि नई टैक्स व्यवस्था में ये छूट नहीं मिलती. सालाना मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री. मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम टैक्स-फ्री.

तो क्या है सबसे बेस्ट स्ट्रेटेजी?

देखने में तो म्यूचुअल फंड बहुत ही आकर्षक लग रहा है, लेकिन अधिकतर फाइनेंस एक्सपर्ट दोनों के मिक्स की सलाह देते हैं.

सुरक्षा के लिए SSY: अपनी बेटी के नाम एक सुकन्या खाता जरूर खुलवाएं और उसमें कम से कम इतना डालें, जिससे उसकी शिक्षा का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षित हो जाए. यह आपका 'सेफ्टी नेट' है.

ग्रोथ के लिए SIP: जो अतिरिक्त पैसा है, उसे अच्छी क्वालिटी के म्यूचुअल फंड (Index या Large Cap Fund) में डालें. इससे आपको महंगाई से लड़ने की ताकत मिलेगी.

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Conclusion

अगर आप एक ऐसे निवेशक हैं जो बिल्कुल भी रिस्क नहीं लेना चाहते और टैक्स बचाना आपकी प्राथमिकता है, तो सुकन्या समृद्धि योजना से बेहतर कुछ नहीं है. लेकिन अगर आप चाहते हैं कि कम पैसे निवेश करके बड़ा फंड बनाया जाए और आप थोड़े उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं, तो म्यूचुअल फंड विजेता बनकर उभरता है. बेटी के भविष्य के लिए असली पैसा 'अनुशासन' (Discipline) और 'जल्दी शुरुआत' (Starting Early) से बनता है. चाहे आप सुकन्या चुनें या SIP, जितनी जल्दी शुरू करेंगे, कंपाउंडिंग का जादू उतना ही बड़ा असर दिखाएगा.

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