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'घर वापसी' नाटक ने वेदों की ओर लौटने का संदेश दिया

'घर वापसी'नाटक ने वेदों की ओर लौटने का संदेश दिया

गुड़गांव, 19 अगस्त (हि.स.)। वेद ही ऐसे प्राचीन धर्म ग्रंथ हैं, जो कहते हैं कि मनुर्भव यानी मनुष्य बनो...ऐसी ही थीम पर आधारित 'घर वापसी' नाटक ने वेदों की ओर लौटने का संदेश दिया।
हरियाणा कला परिषद और अथर्व भारत रिसर्च फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान मेंगुड़गांवसेक्टर 12ए के भारत विकास परिषद, विवेकानंद आरोग्य केंद्र के सभागार में 'घर वापसी' नाटक का सफल मंचन किया गया। इस नाटक के लेखक तेजपाल सिंह धामा हैं और यह नाटक फरहाना ताज की आत्मकथा 'घर वापसी' परआधारित है। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से इस कहानी पर आधारित आत्मकथा की लेखिका मधु धामा (फरहाना ताज) को 2018 में संस्कृति मनीषी सम्मान से सम्मानित कर चुका है, जिसके तहत डेढ़ लाख की नगद धनराशि, प्रशस्ति पत्र और शाल भेंट किया गया था।

घर वापसी नाटक का निर्देशन प्रख्यात थियेटर निर्देशक सुनील चौहान ने किया। सुनील चौहान इस नाटक का मंचन देश के विभिन्न शहरों में निर्देशित कर चुके हैं। परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश, महाकुंभ प्रयाग, मार्केंडय मंडप छतरपुर, सुशांत लोक गुडगांव, श्रीराम सेंटर मंडी हाउस आदि स्थलों पर इस नाटक का जब भी मंचन हुआ, तो हर बार दर्शकों का भरपूर प्यार और उपस्थिति मिली।इस अवसर पर जैन मिलन संस्था के मनोज जैन, बालीवुड एक्टर कपिल सोलंकी, जगत चौधरी, वैदिक साहित्य प्रतिष्ठान के प्रबंध निदेशक गणेश गोयल एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गरिमा गोयल जी समेत सैकड़ो लोग उपस्थित थे। अथर्व भारत रिसर्च फाउंडेशन की नीता गुप्ता और संस्था के वरिष्ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


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