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पर्यटन को तीर्थाटन तक ही सीमित न रखें : योगी आदित्यनाथ

- आध्यात्मिक, सांस्कृतिक काया के साथ पर्यटन को नया कलेवर देना जरूरी

संजय सिंह

लखनऊ, 20 सितम्बर (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश बहुत समृद्ध है, लेकिन उस समृद्धि को समाज के समक्ष लाने में अभी तक संवादहीनता और दूरदर्शिता के अभाव की स्थिति रही है। इस स्तर पर व्यापक काम होना चाहिए था, लेकिन नहीं हुआ। हिन्दुस्थान समाचार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिहाज से एक अच्छी पहल की है। इसके लिए मैं उसे साधुवाद देता हूं और उम्मीद करता हूं कि हिन्दुस्थान समाचार के इस प्रयास के अच्छे नतीजे देखने को मिलेंगे।

कूप मंडूक रहकर हम नहीं ला सकते परिवर्तन

मुख्यमंत्री शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के सभागार में बहुभाषी समाचार एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश विकास संवाद-2 में तीर्थाटन, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास पर केन्द्रित समारोह में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि परिवर्तन के लिए हमें मानसिक तौर पर तैयार रहना होगा। कूप मंडूक रहकर हम परिवर्तन नहीं ला सकते। इस स्थिति से उबरना होगा और आगे जाना होगा। उन्होंने कहा कि कृषि और पर्यटन का क्षेत्र उत्तर प्रदेश में सबसे उर्वर और जल संसाधन से भरपूर है। इन दोनों ही क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं हैं। हमारी सरकार ने ढाई साल में इस दिशा में जो प्रयास किए हैं, उसकी झलक देखने को मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पास अयोध्या, मथुरा, काशी, वृंदावन, नैमिष आदि कई प्रमुख तीर्थस्थल, बौद्धस्थल हैं, जो धार्मिक पर्यटन का हिस्सा है। पर्यटन को आध्यात्मिक पर्यटन तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए बल्कि उसे हैरिटेज, वन्यजीवन तक बढ़ाया जाए तो इसे योजना बनाकर रोजी-रोजगार से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। पर्यटन क्षेत्र को तीर्थाटन से आगे ले जाकर हम आर्थिक स्वावलम्बन की दृष्टि से बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि हर पर्व भारत में किसी न किसी ऐसी घटना से जुड़ा है, जो युग परिवर्तन करते हैं।

संतों से बात करके शुरू की सामूहिक रूप से दीपोत्सव की परम्परा

उन्होंने कहा कि अयोध्या में पहले दीपावली पर शस्त्र पूजन आदि कर लिया जाता था, लेकिन हमारी सरकार ने संतों से बात करके सामूहिक रूप से दीपोत्सव मनाने की परम्परा शुरू की। अयोध्या के साथ दीपोत्सव अब जुड़ चुका है। योजना और सहभा​गिता साथ-साथ चले तो पर्यटन को नई दिशा दी जा सकती है। अयोध्या में पहले धर्मशालाएं हुआ करती थीं, लेकिन अब अयोध्या का सर्वांगीण विकास होना है। अब वहां होटल और रेस्टोरेंट के लिए लोग हमसे सम्पर्क कर रहे हैं।

गाइड रखने जाने की हुई पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सच है कि पर्यटन का स्वरूप तीर्थाटन के रूप में रहा है लेकिन तीर्थयात्री को भी कुछ सुविधा चाहिए। अगर उसके पास भुगतान क्षमता है तो यह एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ और उसके आसपास के क्षेत्र के विकास के लिए जब हम योजना बना रहे थे तो गाइड रखने का सुझाव आया था। पहले चरण में तीस गाइड रखे गए और वह सरकार पर बोझ बने बिना हर माह तीस हजार से लेकर एक लाख तक कमा रहे हैं।

कुम्भ में आए चौबीस करोड़ श्रद्धालु सुरक्षित पहुंचे घर

प्रयागराज कुम्भ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हमने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया और अर्द्धकुम्भ का नाम कुम्भ। अड़तालीस दिन में चौबीस करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे। पहले प्रयागराज कुम्भ का मतलब भगदड़ और मौत होता था लेकिन इस कुम्भ ने यह बता दिया कि यहां जो भी आएगा, वह सुरक्षित अपने घर जाएगा। ईश्वर की उपासना का ये मतलब नहीं कि लोग कुम्भ में जाकर मर जाएं बल्कि यहां से जाकर लोगों को अपने अनुभव बताएं। स्वच्छता का आदर्श प्रयागराज कुम्भ ने स्थापित किया है।

सुविधाओं के अभाव में पहले नहीं ठहरते थे पर्यटक

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक काया के साथ अगर हम अपने पर्यटन स्थल को नये कलेवर में नहीं रखेंगे तो दुनिया आकर्षित नहीं होगी। उत्तर प्रदेश में विकास की सम्भावनाएं पहले से ही मौजूद हैं। मथुरा, वृन्दावन, बरसाना, गोकुल, बलदेव आदि ब्रज तीर्थ के धार्मिक स्थलों के विकास की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां आने वाले पर्यटक तीर्थाटन के बाद जयपुर चले जाते थे, ऐसे में जो लाभ उत्तर प्रदेश को मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल पाता था। सरकार अच्छे गाइड रख रही है, जो हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को लोगों को समझा सकें। ब्रज तीर्थ परिषद का गठन इसी उद्देश्य से किया गया है।

संकरी गलियां नहीं चौड़े रास्ते से जाकर होंगे काशी विश्वनाथ के दर्शन

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1916 में महात्मा गांधी काशी आए थे और विश्वनाथ मंदिर दर्शन करने गए थे, तब उन्होंने वहां गलियों में मौजूद गन्दगी और संकीर्णता पर तल्ख टिप्पणी की थी। उनकी टिप्पणी के सौ साल बाद भी न तो गलियां चौड़ी हुईं और न ही गंदगी हटी। हमारी सरकार ने इस दिशा में प्रयास किया है। अब काशी में पांच फीट संकरी गलियां नहीं बल्कि सौ फीट चौड़ा रास्ता मिलेगा। मुख्यमंत्री ने ईको टूरिज्म के विकास पर भी जोर दिया। साथ ही यह भी कहा कि जब उनकी सरकार बनी थी तो प्रदेश में केवल दो एयरपोट सक्रिय थे, लेकिन अब छह एयरपोर्ट काम कर रहे हैं और ग्यारह पर काम चल रहा है। उन्होंने नसीहत दी कि हमें तीर्थाटन तक ही सीमित नहीं रहना है बल्कि पर्यटन को विराट बनाकर दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करना है।

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