दिल्ली में प्रदूषण को कम करने का प्रयास हुआ तेज, सरकार बनाएगी ऑटो- रिक्शा के लिए अलग फिटनेस लेन

Drive Spark via Dailyhunt

दिल्ली का परिवहन विभाग अपनी बुराड़ी सुविधा में दस स्वचालित निरीक्षण और प्रमाणन लेन स्थापित करेगा। इन स्पेशल लेन के शुरू होने के बाद फिटनेस परीक्षण की प्रक्रिया आसान और कम समय लेने वाली होने की उम्मीद है।

परिवहन विभाग के अनुसार, परीक्षण केंद्रों के संचालन के लिए में बोली की प्रक्रिया कुछ ही महीनों में शुरू की जाएगी जिसके बाद वाहनों का परीक्षण शुरू किया जाएगा।

ऑटोमैटिक प्रक्रिया के शुरू होने से, फिटनेस परीक्षणों की सटीकता बेहतर हो जाएगी क्योंकि ब्रेक, क्लच, हेडलाइट्स और सस्पेंशन जैसे विभिन्न घटकों की जांच और मूल्यांकन मशीनों और कंप्यूटरों के माध्यम से किया जाएगा।

वर्तमान में, विभाग बुराड़ी केंद्र में मैन्युअल रूप से ऑटो- रिक्शा, टैक्सी और ग्रामीण परिवहन वाहनों जैसे छोटे वाहनों का फिटनेस परीक्षण किया जा रहा है। यह प्रक्रिया काफी समय लेने वाली है और सटीक भी नहीं है। वहीं, स्वचालित प्रक्रिया के साथ, चीजें बेहतर होने की उम्मीद है।

इस सुविधा में प्रतिदिन लगभग 300 वाहन फिटनेस परीक्षण के लिए आते हैं। झुलझुली में विभाग की सुविधा में वर्तमान में बसों और ट्रकों जैसे बड़े वाहनों का परीक्षण किया जा रहा है।

बता दें कि दिल्ली सरकार बहुत जल्द फ्यूल पंप पर ईंधन लेने के लिए वैध पीयूसी ( प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र) को अनिवार्य करने जा रही है। दिल्ली सरकार बहुत जल्द इस संबंध में एक नया नियम लागू करने वाली है।

इसके लिए दिल्ली सरकार ने हाल ही में एक ड्राफ्ट नोटफिकेशन जारी किया है और लोगों से सुझाव और आपत्तियों को आमंत्रित किया है।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि इससे दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। दिल्ली सरकार ने एक सूचना में बताया है कि राष्ट्रीय राजधानी के सभी पेट्रोल पंप पर ईंधन लेने के लिए पीयूसी अनिवार्य किया जाएगा।

अगर पीयूसी अमान्य पाया जाता है तो उसे पुनः जारी करवाने की सुविधा फ्यूल पंप पर होगी।

दिल्ली सरकार ने हाल में फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए मोटर व्हीकल एग्रिगेटर स्कीम, 2021 की घोषणा की है। इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में डिलीवरी या कैब सर्विस फ्लीट में चलने वाले पारंपरिक वाहनों के जगह इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना है।

दिल्ली सरकार की एक सूचना के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मार्च 2023 तक सभी कैब एग्रीगेटर कंपनियों को अपने दो- पहिया वाहनों के बेड़े में 50 फीसदी और चार- पहिया वाहनों के बेड़े में 25 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाना अनिवार्य होगा।

बता दें कि दिल्ली परिवहन विभाग ने प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए पिछले साल दिल्ली में 1 लाख से ज्यादा पुराने वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया। राज्य में 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों का पंजीकरण रद्द किया जा रहा है।

दिल्ली- राज्यक्षेत्र में गंभीर वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहनों से होने वाला उत्सर्जन है। इसमें डीजल से चलने वाले कमर्शियल वाहनों की अहम भूमिका है।

डीजल वाहन को इलेक्ट्रिक में बदलने के बाद वाहन मालिक दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत मिलने वाली सब्सिडी और छूट का लाभ उठा सकते हैं।

दिल्ली सरकार ने 1,000 इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए केंद्र सरकार ने अगस्त 2020 में सब्सिडी की मंजूरी दी थी।

इस एग्रीमेंट के तहत दिल्ली में 550 इलेक्ट्रिक बसों को चलाने का परमिट दे दिया गया है और अन्य बसों को अगले कुछ महीनों में शुरू किया जाएगा।

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