कार कंपनियों के पास 7 लाख आर्डर हैं पेंडिंग, एक कार की डिलीवरी का औसत समय हुआ 14 सप्ताह

Drive Spark via Dailyhunt

देश में सेमीकंडक्टर की कमी के कारण दिसंबर 2021 में वाहन निर्माताओं के पास सात लाख से अधिक ऑर्डर का बैकलॉग है। वाहन कंपनियों के लिए एक कार को डिलीवर करने का औसत समय वैश्विक स्तर पर लगभग 14 सप्ताह रहा है।

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ( सियाम) के आंकड़ों के अनुसार, देश में कार निर्माताओं ने दिसंबर 2021 में घरेलू बाजार में 2,19,421 यात्री वाहनों की बिक्री की, जो कि दिसंबर 2020 के मुकाबले 13 फीसदी कम है।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि यह मांग की समस्या नहीं है, बल्कि आपूर्ति- पक्ष का मुद्दा है। विभिन्न कार निर्माताओं द्वारा साझा किये गए आंकड़ों से पता चलता है कि दिसंबर 2021 तक 7 लाख से अधिक ऑर्डर लंबित थे।

सर्वेक्षण में सरकार के द्वारा देश में सेमीकंडक्टर के निर्माण को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला गया। देश में सेमीकंडक्टर्स और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए 76,000 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई है।

ध्यान देने वाली बात है कि यह प्रयास ऐसे समय में किया जा रहा है जब घरेलू वाहन निर्माता सेमीकंडक्टर की आपूर्ति में कमी का सामना कर रहे हैं।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि वाहन उद्योग में उत्पादन से जुड़ा प्रोत्साहन ( पीएलआई) जैसी योजनाएं केवल सेमीकंडक्टर्स के उत्पादन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करती हैं, बल्कि भारतीय कंपनियों को चिप निर्माण में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में भी मदद करेंगी।

चिप की कमी से विभिन्न उद्योगों से जुड़ी कई कंपनियों ने या तो कारखाने बंद कर दिए या उत्पादन कम कर दिया। सेमीकंडक्टर का उपयोग ऑटोमोबाइल उद्योग के अलावा चिकित्सा और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उद्योग से जुड़ी कंपनियां भी करती हैं।

क्या होते हैं सेमीकंडक्टर सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक चिप होते हैं जिन्हें सिलिकॉन से बनाया जाता है। ये कारों के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में करंट को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इनके बिना आज कारों की कल्पना ही नहीं की जा सकती।

मौजूदा समय में बाजार में जितनी भी कारें उपलब्ध हैं, सभी में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। इनके बिना कारों को हाईटेक नहीं बनाया जा सकता।

कारों में डिस्प्ले पैनल, नेविगेशन, लाइट, पावर स्टीयरिंग और लगभग सभी ऑटोमैटिक फीचर्स में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। चिप्स की कमी की वजह से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में सेमीकंडक्टर की भारी कमी हो गई है, इसलिए कारों का उत्पादन तय संख्या में नहीं हो रहा है।

क्यों हुई सेमीकंडक्टर की कमी सेमीकंडक्टर को अलग- अलग प्रकार के सैकड़ों चिप से बनाया जाता है। अभी सबसे अच्छी गुणवत्ता के चिप की सप्लाई फिलहाल क्वालकॉम इंक और इंटेल कॉर्प कंपनियां कर रही हैं।

वैश्विक कोरोना महामारी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मांग में भारी इजाफा हुआ जिसके कारण चिप निर्माताओं ने अपनी उत्पादन क्षमता को उसी के अनुसार स्थानांतरित कर दिया।

लेकिन बाद में जब ऑटो उद्योग ने लॉकडाउन के बाद परिचालन फिर से शुरू किया, तो माइक्रोचिप्स की मांग में काफी वृद्धि हुई, और एक बड़ा व्यवधान उत्पन्न हुआ और चिप निर्माता मांग को पूरा करने में असमर्थ हो गए।

स्मार्टफोन, टीवी, ऐसी जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में सेमीकंडक्टर की डिमांड बढ़ गई है जिससे निर्माण करने वाली कंपनियां आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। इसी कारण से कारों में लगने वाले कुछ सेमीकंडक्टर चिप की कीमतों में भारी उछाल आया है।

कारों में लगने वाले डिस्प्ले ड्राइवर चिप की कीमत बढ़ गई है, जिनका इस्तेमाल टेलीविजन, लैपटॉप, कार और विमानों के उत्पादन में भी होता है।

पूरी कहानी देखें