गलत साइड में ड्राइविंग सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण, नशें में गाड़ी चलाने से हुईं 8,355 सड़क दुर्घटनाएं

Drive Spark via Dailyhunt

सड़क पर यातायात नियमों को तोड़ना किसी भी तरह से सही नहीं हैं। लेकिन, नियमों को ताक पर रखकर वाहन चलाना लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

देश में 2020 में हुए सड़क दुर्घटनाओं में शराब के नशे में गाड़ी चलाने और गलत साइड में ड्राइविंग को सड़क हादसों का मुख्य कारण बताया गया है।

बुधवार को राज्यसभा को दिए गए एक लिखित उत्तर में, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, नितिन गडकरी ने कहा कि भारत में 2020 के दौरान कुल 3,66,138 सड़क दुर्घटनाएं हुईं।

उन्होंने कहा कि यह पिछले वर्ष दर्ज किए गए 4,37,396 सड़क दुर्घटनाओं के मामलों से कम है।

गडकरी ने कहा कि लाल बत्ती उल्लंघन के कारण 2,721 दुर्घटनाएं हुईं। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल से 6,753 दुर्घटनाएं हुईं, जबकि अन्य कारणों से कुल 62,738 दुर्घटनाओं के मामले दर्ज किए गए।

मंत्री ने कहा कि शराब पीकर गाड़ी चलाने से 8,355 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जबकि गलत साइड से गाड़ी चलाने से वर्ष 2020 के दौरान 20,228 दुर्घटनाएं हुईं।

गडकरी ने कहा कि 2020 में शराब के नशे में वाहन चलाने वालों पर 56,204 चालान किए गए, जबकि 2021 में ऐसे मामलों की संख्या बहुत कम है जब इसी तरह के उल्लंघन के लिए केवल 48,144 चालान जारी किए गए थे।

जहां तक ​​यातायात नियम उल्लंघन से जुर्माना वसूलने का सवाल है, उत्तर प्रदेश में पिछले साल सबसे जुर्माना वसूला गया है।

उत्तर प्रदेश ने जुर्माने के रूप में 447 करोड़ रुपये, हरियाणा ने 326 करोड़ रुपये, राजस्थान ने 267 करोड़ रुपये और बिहार ने 258 करोड़ रुपये का संग्रह किया।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ( NHAI) ने 2020 - 21 के दौरान 27,744 करोड़ रुपये का टोल टैक्स एकत्र किया। पिछले साल अप्रैल से दिसंबर तक का कलेक्शन 24,989 करोड़ रुपये रहा।

एक अन्य सवाल के जवाब में गडकरी ने बताया कि हरित राजमार्ग ( वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यीकरण और रखरखाव) नीति, 2015 के तहत दिसंबर 2021 तक 51,178 किलोमीटर की लंबाई वाली 869 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में 244.68 लाख पौधे लगाए गए हैं।

गडकरी ने कहा कि सरकार ने 2020 - 21 में राष्ट्रीय परमिट जारी करके 1,636 करोड़ रुपये कमाए। नई राष्ट्रीय परमिट प्रणाली को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 88( 14) के तहत 7 मई, 2010 की अधिसूचना के साथ प्रभावी बनाया गया है।

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