पिछड़े गांव को नई पहचान दी, खेतों में धान भी लगाए, ऐसा रहा लवलीना सफर

My Khel via Dailyhunt

लवलीना की कामयाबी ने ना सिर्फ मेडल दिलाया, बल्कि असम के उस पिछड़े गांव को भी नई पहचान दिलाई। असम के विधायकों ने देखा लवलीना का LIVE मैच, स्थगित रही विधानसभा ।

पिछड़े गांव को नई पहचान दी लवलीना की बदाैलत उनके गांव को नई पहचान मिली है।

खेतों में धान भी लगाए ओलंपिक कांस्य पदक जीतने के लिए धान के खेत में काम करना। पिछले साल लॉकडाउन के दौरान लवलीना धान के खेतों में अपने पिता टिकेन बोरगोहेन की मदद कर रही थीं।

लवलीना ने ओलंपिक पदक जीतने के लिए कई कठिनाइयों का सामना किया है। लवलीना के पिता एक छोटे से चाय के खेत के मालिक हैं।

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